सरगम टॉकीज में गूंजा सनातन का शंखनाद,प्रखर वक्ता सोपान महाराज कनेरकर जी का तीखा, निर्भीक और चेतावनी भरा उद्बोधन
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

(युवाओं में बढ़ते नशे, पश्चिमी सभ्यता और धर्म से भटकाव पर किया करारा प्रहार)
पांढुरना – जिले की धर्मिक–सामाजिक संस्था विशाल जामसांवली पदयात्रा समिति द्वारा पदयात्रा के 16वें वर्ष के अवसर पर नगर के सरगम टॉकीज में आयोजित विशाल सनातन गर्जना कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र में वैचारिक हलचल पैदा कर दी। इस अवसर पर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध प्रखर वक्ता मा. सोपान महाराज कनेरकर जी का ओजस्वी, निर्भीक और झकझोर देने वाला उद्बोधन हुआ।
नगर से प्रतिवर्ष वर्ष के अंतिम शनिवार को 38 किलोमीटर दूर स्थित चमत्कारी श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली तक निकलने वाली विशाल पदयात्रा के अंतर्गत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं में सनातन धर्म के प्रति आस्था, चेतना और जिम्मेदारी का संचार करना था। कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया, जिसके परिणामस्वरूप सरगम टॉकीज खचाखच भरा रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत हनुमान चालीसा पाठ से हुई, जिसके पश्चात सोपान महाराज कनेरकर जी ने मंच से ऐसा तीखा प्रहार किया कि श्रोता स्तब्ध रह गए। महाराज ने युवाओं में बढ़ते नशे, पश्चिमी सभ्यता की अंधी नकल, और हिंदू युवाओं का अपने धर्म से दूर जाना गंभीर और चिंताजनक बताते हुए खुलकर कटाक्ष किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आज का युवा नहीं जागा, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से पूरी तरह कट जाएंगी।
महाराज ने पति–पत्नी संबंधों, परिवार की मर्यादा, और समाज के प्रति कर्तव्यों पर भी तीखे शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने युवाओं और युवतियों को चेताते हुए कहा कि दिखावे और भटकाव की राह छोड़कर अपने धर्म, परिवार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व समझना ही सच्चा विकास है।

सैकड़ों की संख्या में उपस्थित सनातन धर्म प्रेमियों ने महाराज के प्रत्येक शब्द को आंखों में चेतना और मन में संकल्प के साथ आत्मसात किया। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में कहा कि महाराज का यह उद्बोधन केवल भाषण नहीं, बल्कि सनातन समाज के लिए चेतावनी और दिशा देने वाला शंखनाद था।
इस अवसर पर विशाल जामसांवली पदयात्रा समिति के अध्यक्ष श्री मनोज गुडधे, समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं क्षेत्र के सैकड़ों धर्मप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि पांढुरना की धरती पर सनातन चेतना जीवित है और पूरी ताकत से गर्जना कर रही है।


















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