पेंशन पर सरकार की बेरहमी
विद्युत पेंशनरों का फूटा ज्वालामुखी*पेंशन गारंटी व महंगाई राहत की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुर्णा मध्य प्रदेश

पांढुरना – मध्य प्रदेश सरकार की कथित उदासीनता और वादाखिलाफी के खिलाफ मंगलवार को विद्युत पेंशनरों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। मध्य प्रदेश विद्युत मंडल पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर प्रदेशभर में हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने एक साथ आंदोलन कर सरकार को खुली चेतावनी दी। पांढुर्णा जिला मुख्यालय में आक्रोशित पेंशनरों ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया और मुख्यमंत्री के नाम तीखा ज्ञापन सौंपा।
पेंशनरों ने साफ शब्दों में कहा कि जिन्होंने जीवन भर प्रदेश को बिजली दी, आज वही सरकार उनके बुढ़ापे की रोटी छीनने पर आमादा है। 2005 से पूर्व नियुक्त कर्मचारी विद्युत प्रदाय अधिनियम 1948 के तहत पूर्ण रूप से पेंशन के हकदार हैं, इसके बावजूद सरकार जानबूझकर उनके भविष्य को अंधकार में धकेल रही है।
पेंशन गारंटी नहीं तो संघर्ष तय
संयुक्त मोर्चा ने मांग की कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर तत्काल पेंशन भुगतान की लिखित गारंटी दी जाए। पेंशनरों ने कहा कि जब तक सरकारी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक उनका बुढ़ापा भय और अनिश्चितता में गुजरता रहेगा।
दूसरी प्रमुख मांग केंद्र सरकार द्वारा घोषित दर एवं तिथि से ही महंगाई राहत (DR) का भुगतान है, जिसे वर्षों से काटा जा रहा है।
69 हजार करोड़ चाहिए, फंड में सिर्फ 2 प्रतिशत
ज्ञापन में सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए बताया गया कि विद्युत पेंशन फंड के लिए जहां 69,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, वहीं सरकार ने महज 1750 करोड़ रुपये ही जमा किए हैं। पेंशनरों ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों से नियामक आयोग के निर्देशों को रौंदते हुए जानबूझकर फंड का आकलन नहीं किया गया, जिससे पेंशनरों को मानसिक और आर्थिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है।
उपभोक्ताओं से वसूली, पेंशनरों से कटौती
प्रांतीय अध्यक्ष एस.के. जायसवाल एवं आर.सी. सोमानी ने आरोप लगाया कि सरकार एक ओर बिजली उपभोक्ताओं से टैरिफ के नाम पर करोड़ों रुपये वसूल रही है, वहीं दूसरी ओर पेंशनरों को जुलाई 2019 से कम दर पर महंगाई राहत दी जा रही है। स्थिति यह है कि दिसंबर 2025 तक मूल पेंशन का 6.64 गुना भुगतान लंबित है।
अब आर–पार की लड़ाई
संयुक्त मोर्चा ने दो टूक शब्दों में चेताया कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो यह आंदोलन जिला से राजधानी और फिर सड़क से सदन तक जाएगा। पेंशनरों ने स्पष्ट कहा कि यह लड़ाई भीख की नहीं, हक और सम्मान की है, और जरूरत पड़ी तो वे निर्णायक संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे।


















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