Advertisement

पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी-कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ

पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी-कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ

संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

*जनजातीय ग्राम नंदेवानी में ‘मीरा बाल उद्यान’ का शुभारंभ*

पांढुरना – ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान ने संसाधनों का उपयोग करते हुए निर्मित किए गए सस्टेनेबल प्ले ग्राउंड (‘मीरा बाल उद्यान’) का उद्घाटन गुरुवार को सौंसर विकासखंड के ग्राम नंदेवानी के शासकीय एकिकृत माध्यमिक शाला में संपन्न हुआ। यह पहल जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों के समग्र विकास को समर्पित है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या में पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को भी समुचित स्थान देना चाहिए। खेल से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।” उन्होंने खेलों को बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए आवश्यक बताया।

इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य संदीप मोहोड़, डिप्टी कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, सरपंच शालू मरकाम, शिक्षा विभाग की सहायक संचालक रश्मी कुशरे, संस्था के अजय धवले, संस्था निदेशक विजय धवले,जनपद सीईओ प्रफुल्ल लव्हाले, भाजपा नेता मोरेश्वर मर्सकोले, देवेंद्र गायकवाड़, नामदेव इवनाती, जगदीश त्रिवेदी और विभिन्न विभागों के अधिकारीगण प्रमुखता से उपस्थित थे।

जिला पंचायत सदस्य एवं भाजपा जिला अध्यक्ष श्री मोहोड़ ने इस अवसर पर कहा कि, “एक संतुलित विद्यार्थी वह है जो कक्षा में भी उत्कृष्ट हो और खेल के मैदान पर भी। सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि खेल का मैदान भी चरित्र निर्माण करता है।” उन्होंने संस्थान द्वारा अनुपयोगी वस्तुओं का प्रयोग कर बनाए गए इस सुंदर खेल मैदान की सराहना की और विद्यार्थियों को अपनी ओर से स्वेटर वितरित किए।

संस्था निदेशक श्री धवले ने कार्यक्रम का प्रस्ताविक देते हुए बताया कि यह ‘मीरा बाल उद्यान’ सहयोगी संस्था कैरोसल ड्रीम्स फाउंडेशन के साथ मिलकर बनाया गया एक अद्वितीय और पर्यावरण-अनुकूल सस्टेनेबल खेल मैदान है। इस खेल मैदान का उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना हैं। यह खेल मैदान कम लागत में, टिकाऊपन के सिद्धांत पर बनाया गया है। इसके निर्माण में मुख्य रूप से पुराने टायर, गाँव की लकड़ी, पत्थर और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को रचनात्मक ढंग से उपयोग में लाकर खेल के मैदान को बनाया गया। ‘मिरा बाल उद्यान’ सिर्फ एक खेल का मैदान नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि नवाचार और सामुदायिक भागीदारी से सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

कार्यक्रम का संचालन संस्था समन्वयक आशीष पाल ने किया और बीईओ भास्कर गावंडे ने उपस्थित सभी अतिथियों का आभार प्रदर्शन किया।

बॉक्स -बच्चों की कला से दीवारें हुईं जीवंत

इस खेल मैदान में सबसे प्रेरणादायक विशेषता छात्रों की भागीदारी रही है। शाला के बच्चों ने स्वयं खेल मैदान की दीवारों पर सुंदर पेंटिंग (चित्रकला) बनाकर इसमें अपना योगदान दिया है। इन चित्रों में बंदरों और अन्य प्राकृतिक दृश्यों को शामिल किया गया है, जिससे यह खेल का मैदान बच्चों के लिए एक इंटरैक्टिव लर्निंग एनवायरनमेंट (पारस्परिक शिक्षण वातावरण) बन गया है। इस पहल ने छात्रों में स्वामित्व की भावना और रचनात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा दिया है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!