ज्ञानीजनो के पास रहने हमेशा ज्ञान ही मिलता है – मुनि मुक्ति सागर जी
पिड़ावा में हुआ आर्यिका चिन्मयमति माताजी संसघ का पिच्छिका समारोह सम्पन्न
सत्यार्थ न्यूज़ संवाददाता मनोज कुमार माली सोयत कला नगर

नगर में ज्ञानीजनो के पास रहने हमेशा ज्ञान ही मिलता है इसलिए ज्ञानी व्यक्तियो और सन्तो के मध्य रहकर शास्त्रों का अध्ययन करे जिससे आपके ज्ञान की वृद्धि होंगी उक्त बात सकल दिगंबर जैन समाज पिड़ावा के तत्वाधान में आयोजित आर्यिका संघ के पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कही। रविवार को नगर के समीपस्थ नगर पिड़ावा राजस्थान में आर्यिका चिन्मयमति माताजी संसघ का भव्य पिच्छिका का परिवर्तन समारोह का आयोजन किया गया। यह समारोह मुस्कान दीदी, शैलनी दीदी के कुशल निर्देशन में सम्पन्न हुआ। सर्वप्रथम नयापुरा लाल मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जो प्रमुख मार्गों से होते हुए आयोजन स्थल निजी रिसोर्ट पहुंची। दोपहर में 1.30 बजे भव्या पिच्छिका परिवर्तन समारोह संगीतकार हरीश गंधर्व व आशीष जैन के भजनों के साथ में मंगलमय वातावरण हो गया है। मंगलाचरण में दर्शी एन्ड बालिका ग्रुप ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। सर्व प्रथम सीतापुर, प्रतापगढ़, कोटा, भीलवाड़ा के श्रावको ने दीप प्रज्ज्वलित किया। जिसके बाद छोटी छोटी बच्चियों ने सांस्कृतिक प्रतुतिया दी। विभिन्न शहरों से पधारे श्रवाक श्राविकाओं व चातुर्मास समिति के सदस्यों ने माता जी को श्रीफल अर्पित किए। मुक्ति सागर जी महाराज के पाद पक्षालन का सौभाग्य भवानीमंडी सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष विजय जैन को मिला। शास्त्र भेट का सौभाग्य कोमल चंद जैन परिवार को मिला। गुरुमा आर्यिका चिन्मय मति माताजी के पाद पक्षालन का सौभाग्य मनसुख जैन नयापुरा परिवार को मिला। जैन समाज की आन बान और शान परम गुरु भक्त अवधेश सिंह जैन द्वारा मुनि श्री विश्वमित सागर जी के मंगल विहार में पिड़ावा से लेकर सागर तक लगभग 650 किलोमीटर तक अकेले ही आचार्य विशुद्ध सागर जी के पावन सानिध्य तक मुनि श्री विश्वमीत सागर जी के साथ विहार में रहे ऐसे गुरु भक्त का चातुर्मास समिति द्वारा सम्मान किया गया। जिसके बाद गुरुमा व मुक्ति सागर महाराज के मंगल प्रवचन हुए। आर्यिका चिन्मय मति माताजी की पुरानी पिच्छिका प्राप्त करने का सौभाग्य शहर के ही ब्रह्मचारी पीयूष जैन को मिला। इस दौरान पूर्व राज्य मंत्री मानसिंह चौहान, पूर्व प्रधान रामलाल चौहान आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ,आगर, नलखेड़ा, अमरकोट, सोयत, सुसनेर, मोड़ी, भवानीमण्ड़ी, पाटन, रटलाई झालावाड़, कड़ोदिया ,सेमलखेड़ी, कोटा, भीलवाड़ा आदि स्थानों से श्रावक श्राविकाये पधारे उसके बाद चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष मुकेश जैन शम्भू की और से सकल दिगम्बर जैन समाज व विभिन्न शहरों से उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। वही वात्सल्य भोज का आयोजन त्रिलोक जैन की ओर से किया गया।

















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