मध्यप्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन मात्र ₹600 : महंगाई की मार में बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग सांसत में!

भोपाल/इंदौर, 7 दिसंबर 2025
मध्यप्रदेश में जब एक तरफ लाड़ली लक्ष्मी योजना और लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को ₹1,250 से ₹3,000 तक की मासिक सहायता राशि दी जा रही है और उसका जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना (पुरानी वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग पेंशन) के तहत लाखों जरूरतमंदों को अभी भी सिर्फ ₹600 प्रति माह दिए जा रहे हैं। यह राशि पिछले 8-10 साल से जस की तस पड़ी हुई है, जबकि इसी दौरान महंगाई 80-100% तक बढ़ चुकी है।
₹600 में महीना कैसे कटेगा भैया?
आज के बाजार भाव देखिए:
10 किलो गेहूं/चावल = ₹350-400
5 लीटर दूध = ₹350-400
2 लीटर सरसों का तेल = ₹350-400
दाल, सब्जी, नमक-मिर्च, साबुन-तेल, दवा = कम से कम ₹1,500-2,000
कुल मिलाकर एक अकेले बुजुर्ग या विधवा का न्यूनतम ₹4,000-5,000 प्रति माह में ही किसी तरह गुजारा कर पाते हैं। ₹600 तो 10-12 दिन की रोटी भी मुश्किल से आती है। बाकी के 18-20 दिन भगवान भरोसे!
सरकार का दोहरा चरित्र सामने आया
लाड़ली बहना योजना में ₹1,250 से शुरू करके अब ₹3,000 तक कर दिया गया (2025 में घोषणा)
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में ₹51,000 तक एकमुश्त
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में युवाओं को लाखों का लोन सब्सिडी
लेकिन जो सबसे कमजोर तबका है – बुजुर्ग, विधवा, दिव्यांग – उन्हें 2016 से ₹600 पर ही अटका रखा है। 2023 में डॉ. मोहन यादव सरकार ने ₹600 से बढ़ाकर ₹800 करने की घोषणा की थी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी 80% से ज्यादा पेंशनर्स को ₹600 ही मिल रहे हैं। बाकी का पैसा कटौती, बैंक कमीशन और बिचौलियों के जेब में चला जाता है।
पेंशनर्स की आवाज
इंदौर की 72 वर्षीय विधवा शांति बाई कहती हैं,
“बिटिया, लाड़ली बहना को ₹3,000 मिलते हैं, उसका तो बेटा-बहू कमाते हैं। हम तो बिल्कुल अकेले हैं। ₹600 में दवा भी नहीं आती। कई बार तो दो वक्त की रोटी के लाले पड़ जाते हैं।”
ग्वालियर के दिव्यांग रामप्रसाद यादव ने बताया,
“मैं 90% दिव्यांग हूं। दवा का खर्च ही ₹2,000 महीना है। ₹600 आते ही खत्म। सरकार कहती है सबका साथ-सबका विकास, लेकिन हम तो विकास की मुख्यधारा से बाहर ही छोड़ दिए गए।”
विशेषज्ञ भी उठा रहे सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व IAS अधिकारी डॉ. आर.एस. शर्मा कहते हैं,
“मध्यप्रदेश में 42 लाख से ज्यादा सामाजिक सुरक्षा पेंशनर्स हैं। अगर सरकार इनकी पेंशन ₹2,000 भी कर दे तो सालाना सिर्फ ₹6,000 करोड़ अतिरिक्त खर्च आएगा। जबकि लाड़ली बहना योजना पर ही सरकार 2025-26 में ₹18,000 करोड़ से ज्यादा खर्च कर रही है। यह स्पष्ट है कि वोटबैंक की राजनीति में कमजोर तबका पीछे छूट गया।”
जनहित याचिका तक पहुंचा मामला
हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि ₹600 प्रतिमाह की पेंशन “जीने के अधिकार” (अनुच्छेद-21) का उल्लंघन है। कोर्ट ने सरकार से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।
जनता की मांग
सामाजिक सुरक्षा पेंशन तुरंत ₹2,500 प्रति माह की जाए
75 साल से ऊपर के सभी बुजुर्गों को ₹3,000
पेंशन सीधे आधार-लिंक्ड खाते में बिना किसी कटौती के आए
पिछले 5 साल का महंगाई भत्ता (arrears) एकमुश्त दिया जाए
अगर सरकार सचमुच “सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास” में यकीन रखती है तो अब वक्त आ गया है कि लाड़ली बहना के साथ-साथ “लाड़ले बुजुर्ग” और “लाड़ली विधवा” को भी सम्मानजनक जीवन मिले।
वरना यह दोहरा मापदंड जनता लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेगी। 2028 के चुनाव नजदीक हैं – यह बात सरकार को याद रखना चाहिए।















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