जिले में अवैध रेत उत्खनन एवं रेत परिवहन : एक गंभीर मुद्दा
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पांढुर्ना – सौसर में कन्हान नदी से अवैध रेत उत्खनन एक गंभीर मुद्दा है, जिससे न केवल पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि यह शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
अवैध उत्खनन की समस्या
इस संबंध में कई खबरें सामने आई हैं जिनमें बताया गया है कि रेत माफिया दिन-रात नदियों से रेत निकालकर ट्रैक्टर और डंपरों से परिवहन कर रहे हैं। यह अवैध उत्खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि यह स्थानीय निवासियों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। इसके पूर्व भी सोशल मीडिया और प्रेस के द्वारा इस मामले की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाई गई किंतु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं होने से अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले बुलंद है। इन ओवरलोड डंपरों और ट्रैक्टरों से सड़के भी खराब हो रही है , जगह जगह सड़कों पे बड़े बड़े गड्ढे हो गए है जिसमें गिर के राहगीर हताहत हो रहे है लेकिन इन अवैध उत्खनन करने वालों पर कार्यवाही सिफर है।

शासन और प्रशासन की भूमिका
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि रेत माफिया को सत्ताधारी नेताओं और खनिज विभाग की मिलीभगत से संरक्षण प्राप्त है। खनिज विभाग के अधिकारी और निरीक्षक AC ऑफिस में बैठे रहते हैं, जबकि जिले में अवैध उत्खनन जोरों पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भी निर्देश दिए हैं कि अवैध रेत उत्खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन इसके बावजूद भी अवैध उत्खनन जारी है।

अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए प्रशासन और शासन को कड़ी कार्रवाई करनी होगी। इसके लिए आवश्यक है कि:
– कठोर कार्रवाई: अवैध उत्खनन में शामिल माफिया और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
– पारदर्शिता: खनिज विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए।
– स्थानीय भागीदारी: स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अवैध उत्खनन के खिलाफ लड़ाई में शामिल किया जाए। अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए एक संयुक्त प्रयास की आवश्यकता है, जिसमें प्रशासन, शासन और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी हो।


















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