*पशुओं में लंपी वायरस का बढ़ता प्रकोप, पशु अस्पताल के कर्मियों द्वारा नहीं लगाया गया टीका*
*राजकीय पशु अस्पताल नगवां के प्रभारी की मनमानी, टीकाकरण से वंचित पशु हो रहे बीमार*
*सोनभद्र*/सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह

विकास खंड नगवां के वैनी में स्थित राजकीय पशु अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर की तानाशाही आई सामने बरसात से पूर्व पशुओं को लगने वाला टिका नही लगाने से पशुओं में भिन्न भिन्न प्रकार की बीमारी होने लगी है अक्सर पशुओं में लंपी वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है जिससे पशुओं की असमय मौत हो रही है।
प्रभारी पशु अस्पताल के डॉक्टर की मनमानी और लापरवाही पूर्ण रवैया देखने को मिली है सरकार द्वारा पशुओं को बरसात से पहले टिका लगाने के लिए पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन दी जाती है की सभी पशुओं का टीकाकरण हो सके और उन्हे गंभीर बीमारियों से बचाया जा सके लेकिन डॉक्टरों की मनमानी से पशुपालकों को अपने पशुओं को मरते हुए देखना पड़ता है।
एक सप्ताह पूर्व सिकरवार निवासी पूर्व प्रधान भोला प्रसाद चौरसिया की गाय बीमार थी डॉक्टर को फोन किया गया तो वह बाहर होने का हवाला देकर अस्पताल के चपरासी को इलाज। के लिए भेज दिए चपरासी ने ठीक कर देने का वादा कर इंजेक्शन लगाया और पांच सौ रुपए भी लिया उसके जाने के दो घंटे बाद ही दुधारू गाय की मौत हो गई।
पशुपालकों ने प्रभारी डॉक्टर के ऊपर आरोप लगाया है कि जब भी पशु बीमार होते हैं तो जब हम लोग डॉक्टर को फोन लगाते हैं तो हमेशा बाहर होने का हवाला देकर नहीं आते हैं अपनी जगह चपरासी या कंपाउंड को भेज कर इलाज करवाते हैं जिससे अधिकतर पशुओं की मौत हो जाती है।
सूत्रों की माने तो प्रभारी डॉक्टर महीने में दो चार दिन ही अस्पताल में आते हैं और पूरे महीने का अटेंडेंस बनाकर चले जाते हैं उनकी यह मनमानी पूर्ण रवैया बहुत दिनों से देखने को मिल रही है अस्पताल चपरासी और कंपाउंडर के सहारे चल रहा है जिससे पशुओं को उचित इलाज नहीं हो पा रहा है।
पशुपालकों ने जिलाधिकारी सोनभद्र का ध्यान आकृष्ट कराते हुए पूरे मामले की जांच कर संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। सूत्रों का मानना है कि विभाग के उच्च अधिकारी के रहम पर नहीं आते हैं














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