मध्य प्रदेश में किसान कल्याण निधि का दुरुपयोग, CAG ने खोली पोल
हरिशंकर पाराशर,

भोपाल, 02 अगस्त 2025मध्य प्रदेश में किसानों के लिए बने फर्टिलाइजर डेवलपमेंट फंड (FDF) के दुरुपयोग ने सरकारी तंत्र की पोल खोल दी है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट, जो हाल ही में विधानसभा में पेश हुई, ने सनसनीखेज खुलासा किया है कि किसानों के लिए आवंटित 5.31 करोड़ रुपये में से 90% से अधिक, यानी 4.79 करोड़ रुपये, किसानों तक पहुंचने के बजाय सरकारी गाड़ियों की खरीद, रखरखाव और ड्राइवरों के वेतन पर खर्च कर दिए गए। यह मामला न केवल किसानों के साथ धोखा है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि आखिर किसान कल्याण के नाम पर अफसरों का कल्याण क्यों?
गाड़ियों पर उड़ा किसानों का पैसा
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, FDF का मकसद था किसानों को उर्वरक सब्सिडी, प्रशिक्षण और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को मजबूत करना। लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है:
कुल 5.31 करोड़ रुपये में से सिर्फ 5.10 लाख रुपये ही किसानों के लिए खर्च हुए।
2.77 करोड़ रुपये राज्य स्तर पर खर्च किए गए, जिनमें 2.25 करोड़ रुपये केवल 20 गाड़ियों की खरीद और रखरखाव पर उड़ा दिए गए।
जिला स्तर पर भी फंड का बड़ा हिस्सा प्रशासनिक खर्चों में चला गया।
CAG ने साफ कहा कि यह खर्च फंड के मूल उद्देश्य के खिलाफ है। यह पैसा किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और खेती को बढ़ावा देने के लिए था, लेकिन यह अफसरों की लक्जरी गाड़ियों का साधन बन गया।
उर्वरक प्रबंधन में लापरवाही
रिपोर्ट में उर्वरक प्रबंधन की खामियां भी सामने आई हैं:
उर्वरक जरूरतों का आकलन बिना किसी वैज्ञानिक आधार के, सिर्फ पुराने आंकड़ों के आधार पर किया गया। मिट्टी की सेहत और फसल की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
DAP और MOP जैसे उर्वरकों पर आपूर्तिकर्ताओं से मिली छूट को किसानों तक नहीं पहुंचाया गया, जिससे किसानों पर 10.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
मध्य प्रदेश कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (Markfed) ने 2021-22 में उर्वरकों को ऊंची कीमत पर खरीदकर और सब्सिडी दरों पर बेचकर 4.38 करोड़ रुपये का नुकसान किया, जिसे सरकारी खजाने से भरा गया।
सब्जी-बागवानी किसानों की अनदेखी
CAG ने खुलासा किया कि सब्जी और बागवानी क्षेत्र के किसानों को उर्वरक आवंटन में पूरी तरह अनदेखा किया गया। ये किसान पहले ही प्राकृतिक आपदाओं और कर्ज के बोझ तले दबे हैं, और अब उनकी अनदेखी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
विधानसभा में हंगामा
इस रिपोर्ट ने विधानसभा में तूफान मचा दिया। विपक्ष ने इसे “किसानों के साथ विश्वासघात” करार देते हुए सरकार पर जमकर हमला बोला। विपक्षी नेताओं ने पूछा, “जब किसान कर्ज में डूबा है, तब गाड़ियों की क्या जरूरत थी?”
सहकारिता विभाग ने गाड़ियों के खर्च को “निगरानी के लिए जरूरी” बताकर बचाव करने की कोशिश की, लेकिन CAG ने इस तर्क को खारिज कर दिया। कृषि मंत्री के बयान, “गाड़ी नहीं खरीदें क्या?” ने विपक्ष को और भड़का दिया। विपक्ष ने इसे सरकार की “किसान विरोधी मानसिकता” का सबूत बताया।
सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह मुद्दा छाया हुआ है। लोग इसे “किसानों का अपमान” और “भ्रष्टाचार की मिसाल” बता रहे हैं। कुछ यूजर्स ने लिखा:
“किसानों का 5 करोड़ रुपये गाड़ियों पर उड़ाया! यही है BJP का किसान कल्याण?”
“CAG ने डबल इंजन सरकार की पोल खोल दी। किसान भूखा, अफसर मजे में!”
“90% फंड गाड़ियों पर, 10% किसानों पर। यह है मध्य प्रदेश का हाल!”
अन्य अनियमितताएं भी उजागर
CAG ने आपदा राहत निधि में भी गड़बड़ी पकड़ी है, जहां 23.81 करोड़ रुपये असली किसानों के बजाय सरकारी कर्मचारियों और उनके रिश्तेदारों के खातों में पहुंचे। यह खुलासा सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाता है।
CAG की सख्त सिफारिशें
CAG ने इस मामले में सख्त कदम उठाने को कहा है:
जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई।
फंड के उपयोग की स्वतंत्र जांच।
उर्वरक आवंटन के लिए वैज्ञानिक प्रणाली लागू करना।
वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
किसानों का भविष्य दांव पर
जब मध्य प्रदेश का किसान बाढ़, सूखा और कर्ज से जूझ रहा है, तब उसके लिए बने फंड का इस तरह दुरुपयोग निंदनीय है। यह खुलासा सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है। किसानों और सामाजिक संगठनों ने भोपाल में प्रदर्शन की चेतावनी दी है और मांग की है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
















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