काजलवास धाम गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़
देवगढ़ जिला राजसमंद राजस्थान

यह स्थान पाली जिले के डिंगोर चौराहे से 4 किलोमीटर अरावली की पहाड़ियों के गोद में स्थित संतों की भूमि काजलवास ,नो नाथों की तपोस्थली है । यहाँ 7000 साल से 11 सीद्धो की तपोस्थली है । 11 जीवित समाधियाँ, काजलवास अनादि काल से नाथों का स्थान रहा है ।यहां कई सीद्धो ने घोर तपस्या की है। काजलवास अरावली पर्वत श्रृंखला के गौरव पर्वत की तलौटी में नाथ संप्रदाय का एक सिद्ध और प्रसिद्ध स्थल है। खास अनादि काल से नाथों का स्थान रहा है ।यह स्थान तपोस्थली के रूप में विख्यात है। यहां हर वर्ष की भांति श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ देखने को मिली यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है । यहां आने वाले जीवित समाधियों पर मत्था टेक अपने मनोकामना पूर्ण करते हैं ।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने विशेष भंडारे का आयोजन किया जहां श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण की एवं भजन कीर्तन चला यहां आने वाले लोग बावड़ी से पानी ले जाकर अपने पशुओं और घर में छिटेँ देने से कोई बीमारी नहीं आती है ऐसी मान्यता है। यहां श्रद्धालुओं के लिए मनोरंजन के साधन एवं खिलौने की दुकान आदि पर बच्चों एवं महिलाओं की भारी संख्या में भीड़ देखने को मिली थी। यहां नाथ संप्रदाय के बारहवे संप्रदाय, जिन्हें( माई शक्ति उपासक के पथ) कहा जाता है! इस अरावली की पहाड़ियों में कई महात्माओं ने घोर तपस्या की, और अपने तपोबल से कई सनसनी केज का अनुभव रहा,यंहा श्री गोरखनाथ जी गुरु, गुरु शिष्य दोनों ने एक साथ जीवित समाधि ली, दोनों एक ही समाधि में है। एवं 11 वे श्री भाऊनाथ जी महाराज की काजलवास में अंतिम जीवित समाधि है।
श्री भाऊ नाथ जी महाराज जिन्होंने बाबा श्री गंगानाथ जी को गुरु पद प्रधान किया। यह स्थान सिरियारी से 3 किलोमीटर की दूरी पर ,मारवाड़ से 25 किलोमीटर की दूरी पर ,अरावली पहाड़ियों के मध्य स्थित है। यहां हर्ष वर्ष की भांति यहां भक्तों की भीड़ रही।
संवाददाता हीरालाल देवगढ़


















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