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ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना से आत्मनिर्भर बनीं रामरती: पशुपालन बना आय का साधन

पारुल राठौर हरिद्वार

ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना से आत्मनिर्भर बनीं रामरती: पशुपालन बना आय का साधन

मुख्य विकास अधिकारी महोदया के निर्देशानुसार जनपद हरिद्वार में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत अल्ट्रा पूवर सपोर्ट और सीबीओ स्तर पर उद्यमों की स्थापना की जा रही है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा रहा है। इसी का एक प्रेरणादायक उदाहरण बहादराबाद विकासखंड के नूरपुरपंजनहेड़ी गांव की रामरती हैं।

रामरती, संस्कार स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। पूर्व में उनके पास कोई स्थायी आय का स्रोत नहीं था। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की टीम ने उनके गांव का दौरा कर उनकी आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन किया और उन्हें अति गरीब श्रेणी में पाया।

वित्तीय वर्ष 2023–24 में परियोजना के अल्ट्रा पूवर सपोर्ट के तहत रामरती को ₹35,000 का ब्याजमुक्त ऋण प्रदान किया गया, जिसमें उन्होंने स्वयं ₹1,100 का अंशदान जोड़ा। इस सहायता से उन्होंने एक गाय खरीदी और पशुपालन के कार्य को व्यावसायिक रूप में शुरू किया।

आज रामरती प्रतिमाह ₹5,000 से ₹8,000 तक की आय अर्जित कर रही हैं, जिससे वह अपने परिवार की आवश्यकताओं को अच्छी तरह पूरा कर पा रही हैं। यह सफलता रिद्धि-सिद्धि ग्राम संगठन और स्वागत सीएलएफ के सहयोग से संभव हो सकी है।

रामरती की यह कहानी ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आए बदलाव का सशक्त उदाहरण है, जो अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

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