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श्रीडूंगरगढ़ वन विभाग द्वारा तोलियासर ग्राम मियावाकी पद्धति से पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन,’बाल वाटिका’ के रूप में विकसित होगा हरा-भरा परिसर, गांव की बालिकाओं ने उठाया जिम्मेदारी का बेड़ा

सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता ब्यूरो चीफ

‘वन्दे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के अंतर्गत आज श्रीडूंगरगढ़ रेंज वन विभाग द्वारा बुधवार को गांव तोलियासर में सघन पौधरोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर फलदार वृक्षों की विभिन्न प्रजातियों के 400 पौधे रोपे गए जिनमें अमरुद, जामुन, इमली, आंचला और शहतूत शामिल है। सहायक वन संरक्षक श्री सत्यपाल सिंह ने बताया कि इस मियायाकी पौधरोपण स्थल पर फल आधारित वृक्ष प्रजातियों यथा अमरूद, जामुन, इमली, आंवला तथा शहतूत के कुल 400 पौधे रोपित किए गए। पौधों की दीर्घकालिक सुरक्षा हेतु विभाग द्वारा फेसिंग तथा बूंद-बूंद सिंचाई व्यवस्था सुनिश्वित की गई है। उन्होंने बताया कि बून्द बून्द सिचाई व्यवस्था से पानी की बचत होगी और पौधों को पर्याप्त नभी मिलेगी जिससे इन पौधों को तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी और ये जल्द ही पेड़ों का रूप ले लेंगे। श्री सिंह ने बताया इस पौधरोपण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि मियावाकी पद्धति से रोपे गए पौधे तेजी से वृक्षों का रूप लेंगे और आने वाले समय में ग्रामीणों को फलों के साथ-साथ छाया और स्वच्छ वायु भी प्रदान करेंगे। इस पहल की खास बात यह रही कि गाँव की बालिकाओं ने इन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी स्वयं संभाली है, जिसके चलते इस स्थान को ‘बाल वाटिका नाम दिया गया है। साथ ही, पौधों की सुरक्षा और समुचित विकास के लिए बून्द बून्त सिंचाई व्यवस्था भी की गई है, जिससे पानी की बचत होगी और पौधों को पर्याप्त नमी मिलेगी। पौधरोपण कार्यक्रम में वन विभाग की टीम के सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जिनमें सहायक वन सरक्षक श्री सत्यपाल सिंह, वन रेंज अधिकारी ग्रेड प्रथम श्री सुभाष चंद्र वर्मा, सहायक वनपाल राजू सेवग, रामकुमार, वनरक्षक राजेंद्र बारोठिया, गिरधारी मदेरणा, सुभाष, दोपती, तकनीशियन लालचंद और वाहन चालक रोहिताश उपस्थित रहे। वन विभाग द्वारा यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है, बल्कि सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत विकास की धारणा को भी बढ़ावा देती है। इस तरह के प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ हरित भूमि का विस्तार होगा।

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