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माता पिता के चरणों मे ही सारे तीरथ ओर भगवान बसते है – कथावाचक रितिकजी महाराज

माता पिता के चरणों मे ही सारे तीरथ ओर भगवान बसते है – कथावाचक रितिकजी महाराज

सत्यार्थ न्यूज़ लाइव ब्यूरो चीफ मनोज कुमार माली
सोयत कला नगर


सुसनेर। शुक्रवार को स्थानीय श्री खेड़ापति हनुमान मठ मन्दिर परिसर में आयोजित 5 दिवसीय श्री हनुमंत कथा को व्यास पीठ से श्रोताओ को सम्बोधित करते हुएं श्री सकलद्वारी बालाजी धाम ओरछा के पीठाधीश्वर कथावाचक रितिक जी महाराज ने कथा में दूसरे दिन कहा कि माता पिता के चरणों मे ही सारे तीर्थ ओर भगवान बसे है। इसीलिए सभी सनातनी हिंदुओ को अपने माता पिता की अच्छे सेवा और सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कथा में दूसरे दिन हनुमानजी को माता सीता का पता लगाने के लिए लंका आगमन एवं विभीषण हनुमान संवाद एवं माता सीता से हनुमानजी के परिचय का किस्सा सुनाया। ओर कहा कि जब हनुमानजी लंका पहुंचे तो उन्‍होंने रावण के भवन के आगे विभीषण जी का घर देखा। वहां तुलसी के वृक्ष देखकर प्रसन्‍न हो गए। क्‍योंकि तुलसी सभी प्रकार से शुभ होती है। हनुमानजी थोड़ी देर के लिए ठहरे। चिंतन करते हैं।
लंका निसिचर निकर निवासा
इहां कहां सज्‍जन कर बासा
लंका में निशाचर समूह का निवास है। यहां सज्‍जन का वास कहां। हनुमानजी विचार करते हैं कि जहां एक भी खल होता है, वहां सज्‍जन नहीं रहते। तब अनेक खलों के बीच एक सज्‍जन कैसे रह सकता है। हमारे शास्‍त्रों में लिखा है जहां दुष्‍ट लोग रहते हों, उनके बीच में सज्‍जनों को नहीं रहना चाहिए।
हनुमानजी महाराज ये विचार करते हैं लंका में निशाचरों का समूह है। निकर मतलब समूह। यहां सज्‍जन कैसे है। इसका मतलब ये स्‍पष्‍ट है कि राक्षसों के बीच में अच्‍छे व्‍यक्ति को नहीं रहना चाहिए। जीवन में एक बात ध्‍यान रख लें। जहां गलत संगत है, जहां गलत लोग हों, वहां पर कभी नहीं रहना चाहिए। हनुमंत लाल जी का तर्क कि मन महुं तरक करैं कपि लागा, तेहीं समय बिभीषनु जागा।
हनुमानजी के मन में तर्क करने लग गए। कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी दुष्‍ट ने माया से मंदिर बना दिया हो। कहीं मुझसे छल किया जा रहा हो। हनुमानजी ने सूक्ष्‍म रूप बनाया हुआ है।
गोस्‍वामीजी ने कितना सुंदर शब्‍द लिखा है, तेहीं समय विभीषण जागा। रात्रि के लगभग तीन से छह बजे की बात है। इसका एक अर्थ ये है होता है कि जब दरवाजे पर हमारे संत आ जाते हैं तो तभी वास्‍तव में सांसारिक लोग जाते हैं। वरना तो सभी सो ही रहे हैं।
दूसरी बात ये है कि सज्‍जन लोग हमेशा रात्रि तीन से छह बजे के बीच में जाग जाते हैं। अच्‍छे लोग सुबह सुबह जाग जाते हैं। जब हनुमानजी दरवाजे पर खड़े हैं गोस्‍वामी जी लिखते हैं- तेहीं समय बिभीषणु जागा। विभीषण जाग गए हैं।
राम नाम कौन जपता है।
राम राम तेहिं सुमिरन कीन्‍हा
ह्रदयं हरष कपि सज्‍जन चीन्‍हा
एक सुंदर दर्शन यहां मिल रहा है। सज्‍जन लोग जब जागते हैं तो राम राम जापते हैं। विभीषण जागते हैं तो राम नाम का जाप करते हैं। शंकर भगवान भी राम नाम का जाप करते हैं। अब हनुमानजी महाराज प्रसन्‍न हो गए।
हनुमानजी जान गए हैं कि ये सज्‍जन हैं। एकांत में अगर प्रभु का नाम कोई जप रहा है, बाहर तुलसी का वृक्ष है, रामायण अंकित है, इसका अर्थ है कि वहां निवास करने वाला सज्‍जन है। जो सज्‍जन है वही भगवान का नाम लेगा। रात को जैसा विचार करके सोएंगे, वैसा ही सुबह विचार आता है। सोते हुए प्रभु का नाम लेते हैं, जागते हुए भी हम प्रभु का नाम लेते हैं।
इस अवसर पर श्री खेड़ापति हनुमान मठ समिति के अध्यक्ष रामसिंह कांवल, समिति के सदस्य टेकचंद गहलोत, लक्ष्मणसिंह कांवल, बालकिशन भावसार, आनंदीलाल सिसोदिया, दिलीप जैन सारँगयाखेड़ी, विष्णु भावसार, गोविंद सोनी, रामेश्वर सोनी, संजय तिवारी, कैलाश जायसवाल एवं भाजपा जिलाध्यक्ष चिंतामण राठौर ने कथावाचक रितिकजी महाराज का हारफुल माला पहनाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर भाजपा जिला महामंत्री डॉक्टर गजेन्द्रसिंह चन्द्रावत, लोकतंत्र सेनानी संघ जिला उपाध्यक्ष गोवर्धन शुक्ला, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष मांगीलाल सोनी एवं , भाजपा मंडल महामंत्री पवन शर्मा, गिरजाशंकर राठौर, घनश्याम शर्मा, मनीष बंग, सुनील जैन, लोकेश शर्मा, दीपक गिरी, विकास कुमरावत, पुरुषोत्तम बैरागी एवँ पूर्व विधायक बद्रीलाल सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रृद्धालुजन उपस्थित रहे।

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