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जितना अधिक गहरा हो कुआं, उतना ही मीठा जल मिलता है- शनिभक्त महंत मोतिगिरी

पारुल राठौर हरिद्वार

जितना अधिक गहरा हो कुआं, उतना ही मीठा जल मिलता है- शनिभक्त महंत मोतिगिरी

कर्म करो तो फल मिलता है, आज नहीं तो कल मिलता है।

साल 2025 में शनि जयंती 27 मई 2025 को ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को मनाई जाएगी। मान्‍यता के अनुसार, इस तिथि पर शनिदेव का जन्‍म हुआ था। शास्‍त्रों में बताया गया है कि इस दिन शनिदेव बेहद प्रसन्‍न और आशीर्वाद देने की मुद्रा में होते हैं, इसलिए इस दिन विधि विधान से पूजा करने से शनिदेव की कृपा भक्तजनों को प्राप्‍त होती है। आइए जानते हैं शनिभक्त महंत मोतिगिरी महाराज जी से जयंती की पूजाविधि एवं शुभ मुहूर्त का समय।

श्री महानिर्वाणी पंचायती अखाड़े के महंत श्री मोतिगिरी जी ने बताया कि इस दिन भक्त शनिदेव को प्रसन्न करने के लिये उपवास रखते हैं और शनि मन्दिरों में दर्शन के लिए जाते हैं। कहते हैं कि जो कोई भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से शनि देव की पूजा करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि आती है।

शनि जयंती की तिथि कब से कब तक
शनिभक्त महंत मोतिगिरी जी ने बताया कि शनि जयंती इस साल 27 मई को मनाई जाएगी और इसी दिन वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। ज्येष्ठ मास की अमावस्या 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और यह 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 बजे खत्म होगी। उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 27 मई को मनाई जाएगी। शनि जयंती के दिन ही सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री व्रत भी करती हैं।

शनि जयंती पर कौन से शुभ योग बने हैं
इस साल शनि जयंती बहुत खास है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस दिन कृतिका और रोहिणी नक्षत्र के साथ सुकर्मा योग बन रहा है। शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा करने से साढ़ेसाती और शनि की पीड़ा से छुटकारा मिलता है। मान्‍यता है कि इस खास योग में शनिदेव की पूजा करने से भक्तों को बहुत ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

शनि जयंती की पूजाविधि
शनिभक्त महंत मोतिगिरी जी ने बताया कि शनिदेव की पूजा में कुछ खास चीजों का प्रयोग होता है। काले कपड़े पहने जाते हैं। तेल से बने पकवान बनाए जाते हैं। शनि जयंती के दिन, नहाने से पहले सरसों के तेल से शरीर की मालिश करें। फिर साफ पानी से नहा लें।
इसके बाद एक लकड़ी की चौकी लें। उस पर काला कपड़ा बिछाएं। शनिदेव की मूर्ति, तस्वीर या सुपारी रखें। सुपारी को शनिदेव का प्रतीक माना जाता है। फिर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
शनिदेव को पंचामृत और इत्र से स्नान कराएं। इसके बाद गुलाल, सिंदूर और काजल लगाएं। फिर फूल और फल चढ़ाएं। तेल में बने पकवान या इमरती का भोग लगाएं।
पूजा के बाद शनि स्त्रोत और बीज मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

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