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मरवाही में “अनुकंपा नियुक्ति घोटाले” की सच्चाई आई सामने – जांच में जीवनलाल यादव पाए गए निर्दोष…

मरवाही में “अनुकंपा नियुक्ति घोटाले” की सच्चाई आई सामने – जांच में जीवनलाल यादव पाए गए निर्दोष…

सूरज यादव, गौरेला पेंड्रा मरवाही। वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे सहायक ग्रेड-2 जीवनलाल यादव पर लगे फर्जी अनुकंपा नियुक्ति के आरोपों की सच्चाई आखिरकार सामने आ गई है। एक समय ऐसा था जब उन पर न केवल खुद की नियुक्ति को लेकर सवाल उठे थे, बल्कि यह भी आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी बहन को भी एक ही मृत्यु के आधार पर रसोइया पद पर नियुक्त करा लिया – यानी एक अनुकंपा, दो नौकरियाँ!

इस मामले ने विभाग में हलचल मचा दी थी और यह सवाल खड़े हुए थे कि जब नीति एक मृत कर्मचारी के एक ही परिजन को नौकरी देने की अनुमति देती है, तो कैसे दो लोगों को नौकरी मिल गई?

जांच ने खोले सारे पन्ने:

13 फरवरी 2017 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सुरजपुर द्वारा जारी विस्तृत पत्र (पत्र क्रमांक 1248/स्था-01/वि.ख.शि./2016-17) में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की गई। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि जीवनलाल यादव की नियुक्ति स्वीकृत प्रक्रिया और नियमों के अनुसार हुई थी।

साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि:

श्रीमती शुभाबाई यादव (जीवनलाल यादव की माता) की मृत्यु के उपरांत उनकी अनुकंपा नियुक्ति मान्य मानी गई।

जीवनलाल यादव की बहन की नियुक्ति, जो अलग स्रोत से हुई थी, भी वैधानिक आदेशों पर आधारित पाई गई।

नियुक्तियों में किसी भी प्रकार की दोहराव या फर्जीवाड़ा नहीं पाया गया।

अफवाहों और राजनीतिक दबाव का शिकार हुआ एक कर्मचारी,

पूर्व में कुछ स्थानीय माध्यमों और व्यक्तियों द्वारा जीवनलाल यादव पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। यहां तक कहा गया कि “एक ही मृत्यु पर दो नौकरियाँ दी गईं”, जो जांच में पूरी तरह असत्य और भ्रामक साबित हुआ।

विभागीय चुप्पी नहीं, बल्कि प्रक्रिया का पालन

यह भी कहा गया कि अधिकारी डर के कारण कार्रवाई नहीं कर रहे थे। जबकि दस्तावेजों से स्पष्ट होता है कि शिकायत मिलने पर तत्काल जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी और आवश्यक पत्राचार व अभिलेखों की जांच कर मामले को निपटाया गया।

मरवाही में “अनुकंपा नियुक्ति घोटाले” के नाम से चर्चित यह प्रकरण दरअसल अफवाह और आधे-अधूरे तथ्यों पर आधारित निकला। अब जब जांच में जीवनलाल यादव निर्दोष साबित हो चुके हैं, यह आवश्यक हो गया है कि बेबुनियाद आरोप लगाने वालों के विरुद्ध भी जिम्मेदारी तय की जाए।

सवाल अब यह नहीं कि नियुक्ति फर्जी थी या नहीं – सवाल यह है कि सच्चाई सामने आने के बावजूद क्या झूठ फैलाने वालों पर कोई कार्रवाई होगी?

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