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पूँजीपति बनने के लिए सतकर्म करने वालो की संगति करना होंगी- गोविन्द जाने

पूँजीपति बनने के लिए सतकर्म करने वालो की संगति करना होंगी- गोविन्द जाने

सुनील वर्मा ब्यूरो चीफ अकोदिया मध्य प्रदेश

श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस हुआ सती कथा का हुआ वर्णन

अकोदिया। रामचरितमानस पुरे जीवन जीने की तिजोरी है जिसमें अध्यात्म का समस्त सार मौजूद है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जैसा पुत्र पाने के लिए दशरथ जी जैसा पिता के रूप मे आचरण करना होगा। भरत,लक्ष्मण जैसा भाई चाहिए तो राम बनना पड़ेगा और जानकी जैसी बहू चाहिए तो कौशल्या जैसी सास बनना पड़ेगी। उक्त उदगार ग्राम फुलेन मे श्रीराम दरबार प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव व पंच कुण्डीय विष्णु महायज्ञ के अंतर्गत 5 मई से प्रारम्भ हुई सात दिवसीय श्रीराम कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास पंडित विनोद नागर गोविन्द जाने जी ने माता सती की कथा का वर्णन करते हुए व्यक्त किए।

कथावाचक गोविन्द जाने ने कहा की श्री रामचरितमानस मनुष्य के जीवन मे बदलाव लाती है। शत्रु से प्रतिदिन सीताराम करने पर ही राजीनामा हो जाता है। लंका मे धन पाने के लिए रावण ने अपने भाई का त्याग कर दिया लेकिन अयोध्या में भाई को पाने के लिए श्रीराम ने अपने समस्त वैभव का त्याग कर दिया।

कथा व्यास पंडित नागर ने कहा की सनातन प्रेमियों के प्रत्येक घर में रामचरितमानस चलना चाहिए जिससे उसके जीवन मे खुशहाली की बाहार चलती रहेगी। अगर पूंजीपति बनना चाहते हो तो सतकर्म,व्रत व भगवान की भक्ति करने वालो की संगति करना चाहिए ताकि वह अपने को पुण्य के माध्यम से पूँजीपति बना दे। श्री नागर ने कहा की भगवान की आरती, कथा, शत्रु के आँगन मे धार्मिक अनुष्ठान,कथा या दुख की घड़ी मे बिना बुलाए जाना चाहिए।

गोविन्द जाने ने माता सती का वर्णन करते हुए कहा की सती ने सीता बनकर श्रीरान की परीक्षा लेने पहुंची तो प्रभु ने उनको माता सती के चरणों को प्रणाम किया जिससे माँ सती अपने आप मे भावुक हो गई। जिस स्थान या आयोजन मे पति का अपमान हो रहा हो उस स्थान पर अगर पत्नी सम्मिलित होती है तो वह पतीव्रत धर्म के खिलाफ है। माता सती ने पिता राजा दक्ष प्रजापति के निवास पर आयोजित यज्ञ मे महादेव को स्थान न मिलने पर माता सती ने अग्नि मे अपने जीवन का त्याग कर दिया। पंडित गोविन्द जाने ने कहा की अहंकार मे रहने वाला व्यक्ति को महादेव दंडित करते है। पंडित नागर ने कहा व्यक्ति जैसा बीज बोएगा वैसा ही फल प्राप्त करेगा। इस जगत रूपी खेत मे मनुष्य को अपमानरूपी फ़सल चाहिए या सम्मानरूपी फ़सल चाहिए यह तय करना जरूरी है। अगर अच्छा बीज बोओगे तो पूरा गांव नगर प्रशंसा करेगा और गलत बीज बोओगे तो घर मे ही सगे भाई से अपमान पाओगे।

मालवा माटी के संत गोविन्द जाने ने मालवी रसीली भाषा में बड़ी संख्या में पधारे श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। कथा के दौरान संगीतमय भजनो की धुन पर भक्तजनो ने नृत्य किया। आरती के पश्चात भंडारे का आयोजन हुआ।

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