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बाबा साहेब की 134वीं जयंती पर मोमासर में हुआ आयोजन संविधान निर्माण में डॉक्टर अंबेडकर की भूमिका है अतुल्य राष्ट्र उन्हें सदैव याद रखेगा, पढ़े पूरी खबर देखें फ़ोटो

सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता ब्यूरो चीफ

आज बाबा साहेब की 134 वी जयंती देश भर में धूमधाम से मनाई जा रही है। इसी क्रम में क्षेत्र के गांव मोमासर के उतरादा बास ओर दिखणादा बास के अंबेडकर भवन में मनाई गई इस दौरान बाबा साहेब के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की गई। बाबा साहब सेवा समिति अध्यक्ष मनोज वाल्मीकि ने भारत रत्न डॉ.भीमराव अम्बेडकर को उनकी जयंती पर नमन किया है। पूर्व प्रधान मगाराम मेघवाल पंचायत समिति श्रीडूंगरगढ़ ने कहा कि डॉ.अम्बेेडकर ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज के जरूरतमंद,पिछडे,उपेक्षित और निर्बल वर्गों को उन्नत करने में लगाया। डॉ.अम्बेडकर ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। स्वतन्त्र भारत को एक लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने के लिए संविधान निर्माण में उन्होंने अतुल्य भूमिका निभाई। बाबा साहेब ने पिछड़े और कमजोर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। डॉ.अम्बेडकर के सामाजिक सद्भाव,समानता सामाजिक न्याय के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। ग्राम विकास अधिकारी भींवाराम ने कहा कि संविधान के बाईस भागों के मुख पृष्ठ पर भारत की संस्कृति और स्वाभिमान को दिखाती हुई तस्वीरें है। उन्होंने कहा कि इन तस्वीरों में भारत की प्राचीन सभ्यता मोहेंज से लेकर महाभारत में कुरुक्षेत्र और कृष्ण द्वारा दिए गए गीता के ज्ञान,भगवान श्री राम की लंका विजय,भगवान बुद्ध का जीवन चरित्र,महान सम्राट अशोक,उज्जैन के न्यायप्रिय महाराज विक्रमादित्य के राजदरबार,प्राचीन वैदिक गुरुकुल नालंदा विश्वविद्यालय ,भगवान नटराज,रामभक्त हनुमान के साथ ही झांसी की रानी लक्ष्मी बाई,नेताजी सुभाषचन्द्र बोस छत्रपति वीर शिवाजी और गुरु गोविन्द सिंह को प्रदर्शित किया गया है। सामाजिक अंकेक्षण शासन सचिवालय जयपुर बाबूलाल गर्ग कहा कि भारत का संविधान विश्व का सबसे लम्बा और लिखित संविधान है। यह हमारे लोकतांत्रिक गणराज्य की नींव है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान का इतिहास उन लाखों भारतीयों के संघर्षों और स्वतंत्र होने की आशाओं में निहित है जो स्वतंत्रता,न्याय एवं समानता के लिए तरस रहे थे। महात्मा गांधी,सुभाष चंद्र बोस सरदार पटेल बाबा साहेब अम्बेडकर,वीर सावरकर जैसे महापुरुषों के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत के लिए आशा की चिंगारी जलाई थी। जूनियर अकाउंटेंट रामकुमार ने बताया कि डॉ.बी.आर. अम्बेडकर जिन्हें संविधान के मुख्य वास्तुकार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान अद्भुत तार्किकता दूरदर्शिता,संवेदनशीलता से युक्त एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें विश्व के विभिन्न संविधानों के सर्वोत्तम तत्वों को शामिल किया गया था, साथ ही यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और दार्शनिक परम्पराओं का प्रतिनिधित्व करता है। इस दौरान राजूराम चाहिल मास्टर हरिकिशन,हुलाशा राम भागुराम श्रीचंद,उमेश डॉ. हीरालाल,ओमप्रकाश,मनीराम, विडिओ भिंवाराम पूनाराम जीवण राम,फेफाराम,पूराराम भागु,अमित बीरबल,राजू सुभाष,अनोप,रणजीत गोदारा,बाबूलाल गर्ग राम कुमार,हीरालाल,सांवरमल,बजरंग,मनोज वाल्मिकी,सुशील सहित अनेक गांवों के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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