वीर शिरोमणि राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहकर सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने हिंदू वीरता का घोर अपमान किया है-राष्ट्रीय सनातन सेना भारत
पत्रकार भिंड से अभिषेक शर्मा की रिपोर्ट
राष्ट्रीय सनातन सेना ने सपा सांसद, सुमन का परेड चौराहे पर पुतला दहन किया

भिंड। राष्ट्रीय सनातन सेना भारत के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र ओझा ने नेतृत्व परेड चौराहे पर पतला धारण करते हुए कहा समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के द्वारा वीर शिरोमणि योद्धा राणा सांगा को गद्दार कहकर हिंदू वीरता का घर अपमानित करने का कार्य किया है जिन्होंने अपनी ओक्षी मानसिकता को अपना कर मा पुरुषों के बारे में इस तरह की अश्वनीय टिप्पणी से हिंदू समाज को नीचा दिखाने का कार्य किया है इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा सेवा के जिला अध्यक्ष ने कहा की राणा सांगा के इतिहास को पूरा देश जानता है और समाजवादी पार्टी के सांसद और राष्ट्रद्रोही जैसी बातें कर सुर्खियों में बना रहना चाहते हैं उन्होंने कहा की गद्दार तो समाजवादी पार्टी के नेता है जिन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता के साथ हमेशा गद्दारी के तौर पर खड़े रहे लूट डकैती अपहरण एवं अपराधिक घटनाओं में पूरे उत्तर प्रदेश को जग जोड़ दिया था जब से प्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी बने हैं तब से उन्होंने समाजवादी या अपराधियों की बोलती को बंद कर दिया

और महापुरुष अपनी वीरता को और अपने प्राणों को समर्पित करते हैं तो ऐसे साफ सफा सांसद को तत्काल लोकसभा की सदस्यता से बर्खास्त कर देना चाहिए। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी अवधेश शर्मा ने परेड चौराहे पर सपा सांसद रामजीलाल सुमन का पुतला दहन करने से पूर्व कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि राणा सांगा बीर योद्धा थे जिन्होंने 80 धाव सहकर भी, रणभूमि नहीं छोड़ी उन्हें गद्दार कहना हमारे इतिहास को कलंकित करने का दुशसाहस किया है। सपा सांसद को देश से सार्वजनिक इसके लिए माफी मांगनी होगी। सपा सांसद रामजीलाल सुमन को वीर योद्धा राणा सांगा के बारे में इतिहास दोहराते हुए कहा कि
“राणा साँगा ने पारंपरिक तरीके से लड़ते हुए मुग़ल रैंकों पर आरोप लगाया। उनकी सेना को बड़ी संख्या में मुगल बाहुबलियों द्वारा गोली मार दी गई, कस्तूरी के शोर ने राजपूत सेना के घोड़ों और हाथियों के बीच भय पैदा कर दिया, जिससे वे अपने स्वयं के लोगों को रौंदने लगे। राणा साँगा को मुग़ल केंद्र पर आक्रमण करना असंभव लग रहा था, उसने अपने आदमियों को मुग़ल गुटों पर हमला करने का आदेश दिया।

दोनों गुटों में तीन घंटे तक लड़ाई जारी रही, इस दौरान मुगलों ने राजपूत राजाओ पर कस्तूरी और तीर से फायर किया, जबकि राजपूतों ने केवल करीबियों में जवाबी कार्रवाई की। “पैगन सैनिकों के बैंड के बाद बैंड ने अपने पुरुषों की मदद करने के लिए एक दूसरे का अनुसरण किया, इसलिए हमने अपनी बारी में टुकड़ी को टुकड़ी के बाद उस तरफ हमारे लड़ाकू विमानों को मजबूत करने के लिए भेजा।” बाबर ने अपने प्रसिद्ध तालकामा या पीनिस आंदोलन का उपयोग करने के प्रयास किए, हालांकि उसके लोग इसे पूरा करने में असमर्थ थे, दो बार उन्होंने राजपूतों को पीछे धकेल दिया, लेकिन राजपूत घुड़सवारों के अथक हमलों के कारण वे अपने पदों से पीछे हटने के लिए मजबूर हो गए। लगभग इसी समय, रायसेन की सिल्हदी ने राणा की सेना को छोड़ दिया और बाबर के पास चली गई। सिल्हदी के दलबदल ने राणा को अपनी योजनाओं को बदलने और नए आदेश जारी करने के लिए मजबूर किया। इस दौरान,राणा को एक गोली लगी और वह बेहोश हो गया, जिससे राजपूत सेना में बहुत भ्रम पैदा हो गया और थोड़े समय के लिए लड़ाई में खामोश हो गया। बाबर ने अपने संस्मरणों में इस घटना को “एक घंटे के लिए अर्जित किए गए काफिरों के बीच बने रहने” की बात कहकर लिखा है। अजा नामक एक सरदार ने अजजा को राणा के रूप में काम किया प्रदेश संगठन मंत्री भिण्ड प्रभारी सुरेश दांतरे ने कहा कि राणा सांगा ने राजपूत सेना का नेतृत्व किया,

जबकि राणा अपने भरोसेमंद लोगों के एक समूह द्वारा छिपा हुआ था। उन्होंने कहा कि मेवाड़ में सबसे महत्वपूर्ण शासक। इन्होंने अपनी शक्ति के बल पर मेवाड़ साम्राज्य का विस्तार किया और उसके तहत राजपूताना के सभी राजाओं को संगठित किया। राणा रायमल की मृत्यु के बाद, 1509 में, राणा सांगा मेवाड़ के महाराणा बन गए। राणा सांगा ने अन्य राजपूत सरदारों के साथ सत्ता का आयोजन किया।राणा सांगा ने मेवाड़ में 1509 से 1528 तक शासन किया, जो आज भारत के राजस्थान प्रदेश में स्थित है। राणा सांगा ने विदेशी आक्रमणकारियों के विरुद्ध सभी राजपूतों को एक किया। राणा सांगा सही मायनों में एक वीर योद्धा व शासक थे जो अपनी वीरता और उदारता के लिये प्रसिद्ध हुए।इन्होंने दिल्ली, गुजरात, व मालवा मुगल बादशाहों के आक्रमणों से अपने राज्य की ऱक्षा की। उस समय के वह सबसे शक्तिशाली राजा थे फरवरी 1527 ई. में खानवा केे युद्ध से पूर्व बयाना केे युद्ध में राणा सांगा ने मुगल सम्राट बाबर की सेना को परास्त कर बयाना का किला जीता | खानवा की लड़ाई में हसन खां मेवाती राणाजी के सेनापति थे। युद्ध में राणा सांगा केे कहने पर राजपूत राजाओं ने पाती पेेरवन परम्परा का निर्वाहन किया।बयाना के युद्ध के पश्चात् 16 मार्च,1527 ई. में खानवा के मैैैदान में राणा साांगा घायल हो गए। ऐसी अवस्था में राणा सांगा जी को युद्ध मैैदान से बाहर निकलना पडा। ओर उनकी जगह उनके परम मित्र राज राणा अजजा झाला ने ली । उन्होंने अपनी वीरता से दूसरों को प्रेरित किया। इनके शासनकाल में मेवाड़ अपनी समृद्धि की सर्वोच्च ऊँचाई पर था। एक धर्मपरनय राजा की तरह इन्होंने अपने राज्य की रक्षा तथा उन्नति की।राणा सांगा इतने वीर थे की एक भुजा, एक आँख, एक टांग खोने व अनगिनत ज़ख्मों के बावजूद उन्होंने अपना महान पराक्रम नहीं खोया, सुलतान मोहम्मद शाह माण्डु के युद्ध में हराने व बन्दी बनाने के बाद उन्हें उनका राज्य पुनः उदारता के साथ सौंप दिया,। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 12 वर्षों से विशाल कुंभ महा मेला के बारे में जिसका विरोध किया

और करोड़ भारत के सही विदेश तक के सनातनियों ने गंगा जमुना सरस्वती त्रिवेणी में इस्लाम करते हुए अपने सनातन धर्म को वह हमारी भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ने का काम किया इसी तरह समाजवादी पार्टी के सांसद विधायक और उनके नेता हमेशा राष्ट्रद्रोही टिप्पणी कर समाज को तोड़ने का काम करते हैं। अवधेश शर्मा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी , सुरेश दांतरे प्रदेश संगठन मंत्री एवं भिंड प्रभारी ओमप्रकाश पुरोहित संभागीय संगठन मंत्री एवं प्रदेश कार्यसमिति सदस्य , महेशबोहरे संभागीय अध्यक्ष,अशोक शर्मा रजनीश शर्मा शहर अध्यक्ष राकेश शर्मा जिला महामंत्री रिंकू भदौरिया जिला अध्यक्ष युवा बृजेश पूजा सोनू सिंह राजावत जिला उपाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह भदोरिया आनंद पाठक, महेश रजनीश शर्मा प्रमोद शर्मा सुरेंद्र सिंह नरवरिया अनिल शर्मा, रवि तोमर गोवर्धन जयपुर वाले सहित भारी संख्या में राष्ट्रीय सनातन सेना भारत के पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे


















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