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19 मार्च 2025 बुधवार आज का पंचांग व राशिफल और जानें कुछ खास बातें पंडित नरेश सारस्वत रिड़ी के साथ

सत्यार्थ न्यूज श्रीडूंगरगढ़-सवांददाता नरसीराम शर्मा

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है। शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है। पंचांग में सूर्योदय सूर्यास्त,चद्रोदय-चन्द्रास्त काल,तिथि,नक्षत्र,मुहूर्त योगकाल,करण,सूर्य-चंद्र के राशि,चौघड़िया मुहूर्त दिए गए हैं।

🙏जय श्री गणेशाय नमः🙏

🙏जय श्री कृष्णा🙏

🕉️आज का पंचांग🕉️

दिनांक:- 19/03/2025, बुधवार

पंचमी, कृष्ण पक्ष

चैत्र””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि———– पंचमी 24:36:25 तक
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र——— विशाखा 20:49:07
योग———– हर्शण 17:36:34
करण———– कौलव 11:24:18
करण———- तैतुल 24:36:25
वार———————- बुधवार
माह————————- चैत्र
चन्द्र राशि—— तुला 14:05:42
चन्द्र राशि————— वृश्चिक
सूर्य राशि——————- मीन
रितु———————— वसंत
आयन—————— उत्तरायण
संवत्सर——————– क्रोधी
संवत्सर (उत्तर) ————कालयुक्त
विक्रम संवत————– 2081
गुजराती संवत———— 2081
शक संवत—————- 1946
कलि संवत—————- 5125

वृन्दावन
सूर्योदय————– 06:25:28
सूर्यास्त————— 18:28:39
दिन काल———— 12:03:10
रात्री काल———— 11:55:42
चंद्रास्त————– 08:53:58
चंद्रोदय—————- 23:05:11

लग्न—- मीन 4°28′ , 334°28′

सूर्य नक्षत्र——– उत्तरा भाद्रपदा
चन्द्र नक्षत्र————– विशाखा
नक्षत्र पाया—————— रजत

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

तू—- विशाखा 07:21:24

ते—- विशाखा 14:05:42

तो—- विशाखा 20:49:07

ना—- अनुराधा 27:31:29

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= मीन 04°40, उ oभाo 1 दू
चन्द्र= तुला 26°30 , विशाखा 2 तू
बुध =मीन 14°52 ‘ उ o भा o 4 ञ
शु क्र= मीन 10°05, उ o फाo’ 3 झ
मंगल=मिथुन 25°30 ‘ पुनर्वसु ‘ 2 को
गुरु=वृषभ 19°30 रोहिणी, 3 वी
शनि=कुम्भ 28°28 ‘ पू o भा o , 3 दा
राहू=(व) मीन 03°20 उo भा o, 1 दू
केतु= (व)कन्या 03°20 उ oफा o 3 पा

🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩💮

राहू काल 12:27 – 13:57 अशुभ
यम घंटा 07:56 – 09:26 अशुभ
गुली काल 10:57 – 12: 27अशुभ
अभिजित 12:03 – 12:51 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:03 – 12:51 अशुभ
वर्ज्यम 25:17* – 27:05* अशुभ
प्रदोष 18:29 – 20:54 शुभ

चोघडिया, दिन

लाभ 06:25 – 07:56 शुभ
अमृत 07:56 – 09:26 शुभ
काल 09:26 – 10:57 अशुभ
शुभ 10:57 – 12:27 शुभ
रोग 12:27 – 13:57 अशुभ
उद्वेग 13:57 – 15:28 अशुभ
चर 15:28 – 16:58 शुभ
लाभ 16:58 – 18:29 शुभ

चोघडिया, रात

उद्वेग 18:29 – 19:58 अशुभ
शुभ 19:58 – 21:28 शुभ
अमृत 21:28 – 22:57 शुभ
चर 22:57 – 24:27* शुभ
रोग 24:27* – 25:56* अशुभ
काल 25:56* – 27:25* अशुभ
लाभ 27:25* – 28:55* शुभ
उद्वेग 28:55* – 30:24* अशुभ

होरा, दिन

बुध 06:25 – 07:26
चन्द्र 07:26 – 08:26
शनि 08:26 – 09:26
बृहस्पति 09:26 – 10:27
मंगल 10:27 – 11:27
सूर्य 11:27 – 12:27
शुक्र 12:27 – 13:27
बुध 13:27 – 14:28
चन्द्र 14:28 – 15:28
शनि 15:28 – 16:28
बृहस्पति 16:28 – 17:28
मंगल 17:28 – 18:29

होरा, रात

सूर्य 18:29 – 19:28
शुक्र 19:28 – 20:28
बुध 20:28 – 21:28
चन्द्र 21:28 – 22:27
शनि 22:27 – 23:27
बृहस्पति 23:27 – 24:27
मंगल 24:27* – 25:26
सूर्य 25:26* – 26:26
शुक्र 26:26* – 27:25
बुध 27:25* – 28:25
चन्द्र 28:25* – 29:25
शनि 29:25* – 30:24

🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩

मीन > 06:14 से 07:40 तक
मेष > 07:40 से 09:18 तक
वृषभ > 09:18 से 11:16 तक
मिथुन > 11:16 से 13:34 तक
कर्क > 13:34 से 15:50 तक
सिंह > 15:46 से 18:02 तक
कन्या > 18:02 से 20:20 तक
तुला > 20:20 से 22:34 तक
वृश्चिक > 22:34 से 00:56 तक
धनु > 00:56 से 03:12 तक
मकर > 02:12 से 04:46 तक
कुम्भ > 04:42 से 06:10 तक

विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट-दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। चर में चक्र चलाइये ,उद्वेगे थलगार ।शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार।
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषुच l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।।

महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्।
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 5 + 4 + 1 = 25 ÷ 4 = 1 शेष
पाताल लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

मंगल ग्रह मुखहुति

शिव वास एवं फल –:

20 + 20 + 5 = 45 ÷ 7 = 3 शेष

वृषभारूढ़ = शुभ कारक

भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

बासोड़ा पूजन (शीतला पूजन)

रंग पंचमी

सर्वार्थ सिद्धि योग 20:49 से

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

प्रत्युत्थानञ्च युध्द्ञ्च संविभागञ्च बन्धुषु ।
स्वयमाक्रम्यभुक्तञ्चशिक्षेच्चत्वारिकुक्कुटात् ।।
।। चा o नी o।।

मुर्गे से हे चार बाते सीखे…
१. सही समय पर उठे.
२. नीडर बने और लढ़े.
३. संपत्ति का रिश्तेदारों से उचित बटवारा करे.
४. अपने कष्ट से अपना रोजगार प्राप्त करे.

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: पुरुषोत्तमयोग :- अo-15

सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टोमत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च
वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्योवेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम्‌ ॥,

मैं ही सब प्राणियों के हृदय में अन्तर्यामी रूप से स्थित हूँ तथा मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और अपोहन (विचार द्वारा बुद्धि में रहने वाले संशय, विपर्यय आदि दोषों को हटाने का नाम ‘अपोहन’ है) होता है और सब वेदों द्वारा मैं ही जानने योग्य (सर्व वेदों का तात्पर्य परमेश्वर को जानने का है, इसलिए सब वेदों द्वारा ‘जानने के योग्य’ एक परमेश्वर ही है) हूँ तथा वेदान्त का कर्ता और वेदों को जानने वाला भी मैं ही हूँ॥,15॥,

*💮🚩 दैनिक राशिफल 🚩💮*

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष-व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। रोजगार मिलेगा। अप्रत्याशित लाभ होगा। नौकरी करने वालों को ऐच्छिक स्थानांतरण एवं पदोन्नति मिलने की संभावना है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। विवाद न करें। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें।

🐂वृष-यात्रा सफल रहेगी। आपसी मतभेद, मनमुटाव बढ़ेगा। किसी से मदद की उम्मीद नहीं रहेगी। आर्थिक समस्या बनी रहेगी। व्यसनाधीनता से बचें। व्यापार, रोजगार मध्यम रहेगा। विवाद से क्लेश होगा। शारीरिक कष्ट संभव है। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे।

👫मिथुन-घर-बाहर तनाव रहेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। जल्दबाजी न करें। नई योजना बनेगी। नए अनुबंध होंगे। किसी मामले में कटु अनुभव मिल सकते हैं। सरकारी, कानूनी विवाद सुलझेंगे। जोखिम, लोभ, लालच से बचें। नया काम, व्यवसाय आदि की बात बनेगी।

🦀कर्क-धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। यात्रा सफल रहेगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। कानूनी बाधा दूर होकर लाभ होगा। पूँजी निवेश बढ़ेगा। पहले किए गए कार्यों का लाभदायी फल आज मिल सकेगा। संतान के कामों से खुशी होगी। व्यापार-व्यवसाय में तरक्की होगी।

🐅सिंह-फालतू खर्च होगा। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। वाणी पर नियंत्रण रखें। चिंता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। नवीन मुलाकातों से लाभ होगा। आमदनी बढ़ेगी। रुका धन मिलने से निवेश में वृद्धि होने के योग हैं। उदर संबंधी विकार हो सकते हैं।

🙍‍♀️कन्या-शारीरिक कष्‍ट से बाधा संभव है। भागदौड़ रहेगी। घर-परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। राजकीय सहयोग मिलेगा। कार्यकुशलता सहयोग से लाभान्वित होंगे। काम में मन लगेगा। स्वयं का सोच अनुकूल रहेगा। रिश्तेदारों से संबंधों की मर्यादा बनाए रखें।

⚖️तुला-चोट,चोरी व विवाद आदि से हानि संभव है। पुराना रोग उभर सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। परिवार की स्थिति अच्छी रहेगी। रचनात्मक काम करेंगे। कर्मचारियों पर निगाह रखें। परिवार की समस्या का उचित समाधान होगा।

🦂वृश्चिक-भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होगी। रोजगार मिलेगा। संतान के स्वास्थ्य में सुधार होगा। सोचे कामों में मनचाही सफलता मिलेगी। व्यापारिक निर्णय समय पर लेना होंगे। पुरानी बीमारी उभर सकती है। चोट व रोग से बाधा संभव है। बेचैनी रहेगी।

🏹धनु-पुराना रोग उभर सकता है। भागदौड़ रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। धैर्य रखें। अस्वस्थता बनी रहेगी। खुद के प्रयत्नों से ही जनप्रियता एवं सम्मान मिलेगा। रोजगार के क्षेत्र में संभावनाएँ बढ़ेंगी। स्थायी संपत्ति संबंधी खटपट हो सकती है।

🐊मकर-पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग को सफलता मिलेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें। नए कार्यों, योजनाओं की चर्चा होगी। लाभदायी समाचार आएँगे। समाज में आपके कार्यों की प्रशंसा होगी। साहस, पराक्रम बढ़ेगा। विश्वासप्रद माहौल रहेगा।

🍯कुंभ-प्रयास सफल रहेंगे। प्रशंसा प्राप्त होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। लाभ होगा। व्यवसाय अच्छा चलेगा। कार्य क्षेत्र में नई योजनाओं से लाभ होगा। लगन, मेहनत का उचित फल मिल सकेगा। क्रोध एवं उत्तेजना पर संयम रखें। विवाद सुलझेंगे।

🐟मीन-पुराने संगी-साथियों से मुलाकात होगी। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। लाभ होगा। परिश्रम का पूरा परिणाम मिलेगा। अच्छी व सुखद स्थितियाँ निर्मित होंगी। विरोधी आपकी छवि खराब करने का प्रयास कर सकते हैं। व्यावसायिक सफलता से मनोबल बढ़ेगा।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

शबरी के गुरु मतङ्ग
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आप महातपस्वी,योगी,त्यागी,वीतराग एवं सिद्ध महात्मा थे। हजारों वर्षों तक समाधि में रहते थे,इनकी ख्याति सर्वत्र व्याप्त थी। इनकी सत्यसंकल्प के प्रभाव से शबरी नाम की ब्राह्मणी इनकी शिष्या थी। इन्होंने जीवन में ब्राह्मण के अतिरिक्त किसी दूसरे वर्ण को मन्त्र दीक्षा न देने का संकल्प लिया था,अतः ये जन्म से ही ब्राह्मण सिद्ध होते हैं। अज्ञानतावश कुछलोगों का कथन है कि यह मतङ्ग 【हाथी】 मारकर खाते थे,इसलिए इनका नाम ‘मतङ्ग’ हुआ,परन्तु यह नितान्त असत्य है,यह बात त्याज्य है। आप परम् अहिंसा व्रत का पालन करते थे। इनके अहिंसा व्रत के प्रभाव के कारण आश्रम के चारों ओर विरोधी स्वभाव वाले जीव-जन्तु भी परस्पर विरोध का त्याग करके सद्भाव से रहते थे। इनका विशेष जीवन-चरित्र वाल्मीकीय रामायण के अरण्यकांड के ७३-७४ सर्ग में वर्णित है।भगवान श्रीराम का लक्ष्मण सहित कंदमूल, फल से स्वागत करने के अनन्तर शबरी वन में जाकर गुरु जी का आश्रम उन्हें दिखाते हुये, मतङ्ग ऋषि का चरित्र सुनाते हुए कहती है कि हे राम जिस समय आप सीता लक्ष्मण सहित चित्रकूट में पधारे थे,उस समय मैं अपने गुरु महाराज की सेवा करती थी। वे अति वृद्ध थे,तब योग समाधि द्वारा अपने शरीर को त्यागने की इच्छा उन्होंने की। तब मैंने भी शरीर त्याग करने की इच्छा प्रकट की।” इसपर गुरुजी ने मना करते हुये कहा हे धर्मज्ञे तुम इसी आश्रम में रहो,इसी पवित्र आश्रम में पूर्ण परमब्रह्म,श्रीराम के रूप में,लक्ष्मण सहित पधारेंगे। तुम दोनोंका आतिथ्य सत्कारपूर्वक दर्शन करते हुए अपने अविनाशी रूप को प्राप्त होगी।’हे पुरुषश्रेष्ठ ! ऐसा कहकर गुरुजी ने शरीर त्याग दिया। उनके अनन्तर मैं आपकी प्रतीक्षा करते हुए आश्रम में ही रहने लगी।” शबरी ने श्रीराम को उनका आश्रम दिखाते हुये कहा~हे रघुनन्दन इस स्थान पर स्नानादि के अनन्तर गुरुजी बैठकर संध्योपासना तथा अग्निहोत्र करने के उपरान्त अपने वृद्ध कांपते हाथों से स्वयं पुष्प तोड़कर तथा उनका सुंदर हार बनाकर देवताओं को समर्पित किया करते थे। हे रघुराम उनकी तपस्या के प्रभाव से जिस चबूतरे पर बैठकर वे पूजन करते थे,उस चबूतरे से दशों-दिशाओं को प्रकाशित करने वाला अतुलित प्रकाश आज भी निकल रहा है। मेरे गुरुदेव के द्वारा चढ़ाये हुए पुष्प तेरह वर्ष व्यतीत हो जाने पर,आज भी ज्यों के त्यों है,वे मुरझाये नहीं है। अब आप गुरुजी का दूसरा चमत्कार देखें। गुरुजी अत्यंत वृद्ध होने के कारण जब सम्पूर्ण तीर्थों की यात्रा करने में असमर्थ हुये, तब उन्होंने यहीं पर बैठे ही बैठे सातों समुद्रों तथा नदियों का आवाहन किया, तो उनके स्नान के लिए सातों समुद्र यहां आये हुये देखे गये। वे अपने वृद्ध हाथों से जिन पेडों की सिंचाई करते थे, उनके तप के प्रभाव से वह जल आजतक भी नहीं सूखा है।”इतना कहने के पश्चात् शबरी ने भगवान की स्तुति करने के अनन्तर कहा” मैं अब आपका दर्शन करते हुए इस शरीर को त्यागना चाहती हूं।”भगवान की आज्ञा से शबरी ने योगाग्नि से शरीर त्यागकर गुरूजी का ब्रह्मलोक प्राप्त किया। बाल्मीकीय रामायण में शबरी द्वारा कहे हुये मतङ्ग ऋषि का चरित्र निष्कलंक, आदर्श एवं तपोत्यागमय सिद्ध होता है।

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