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सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्योहारा के अंतर्गत आनेवाले गांव बगवाड़ा में लगाया गया हैपेटाइटिस जांच का वृहद शिविर.

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्योहारा के अंतर्गत आनेवाले गांव बगवाड़ा में लगाया गया हैपेटाइटिस जांच का वृहद शिविर.

रिपोर्टर -इश्तियाक अली

बिजनौर- स्योहारा सीएचसी स्योहारा अधीक्षक डॉ बी के स्नेही ने फीता काटकर कैंप की कराई शुरुआत। हेपेटाइटिस से डरें नहीं, समय से इलाज है बचाव .. डॉक्टर स्नेही। सरकार के आदेशों के क्रम में आज 27 फरवरी 2025 दिन गुरुवार को जनमानस में जनजागरूकत बाबत राष्ट्रीय वायरल हैपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम /एन वी एच सी पी के तहत आउट रीच केम्प सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्योहारा के गांव बगवाड़ा में वृहद जांच शिविर का अयोजन किया गया । कैंप की शुरुवात सीएचसी स्योहारा अधीक्षक डॉ बी के स्नेही ने फीता काट कर की। ग्राम प्रधान श्री अवनीश कुमार चौहान ने अपना पूरा सहयोग दिया । उन्होंने बताया की सरकार गरीब, वंचितों ,पिछड़ों, दलितों ओर आदिवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाए उनके समीपस्थ संस्थानों में मुहैया कराने को कृत संकल्पित है। इसी के क्रम में ये आउट रीच शिविर हमारे भगवाड़ा में लगाया जा रहा है। लोगो को इसका लाभ लेना चाहिए। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्योहारा जनपद बिजनौर के अधीक्षक और प्रभारी चिकत्सा अधिकारी डॉक्टर बी के स्नेही ने समस्त लोगो को विस्तार से बताया की हैपेटाइटिस भारत में एक गंभीर समस्या है और अधिकांश लोग हेपेटाइटिस सी यानी काला पीलिया से पीड़ित हैं। संक्रामक हेपेटाइटिस को अन्यथा वायरल हेपेटाइटिस के रूप में जाना जाता है। यह पीलिया का एक सामान्य कारण है। इलाज और परहेज व समुचित आहार से इससे बचा जा सकता है।
हेपेटाइटिस से डरें नहीं, समय से इलाज है बचाव। इलाज ओर जांच की समस्त व्यवस्था जिला बिजनोर के साथ साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धामपुर ओर नहटौर में भी उपलब्ध है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि क्रोनिक हेपेटाइटिस वाले 95 प्रतिशत लोग नहीं जानते कि वे संक्रमित हैं। यह भारत में एक गंभीर समस्या है और अधिकांश लोग हेपेटाइटिस सी से पीड़ित हैं। संक्रामक हेपेटाइटिस को अन्यथा वायरल हेपेटाइटिस के रूप में जाना जाता है। यह पीलिया का एक सामान्य कारण है। हेपेटाइटिस ए और ई प्रकार या बी, सी और डी वायरस के कारण हो सकता है। वे महत्वपूर्ण तरीकों से भिन्न होते हैं, जिनमें संचरण का तरीका, रोग की गंभीरता, भौगोलिक वितरण और रोकथाम शामिल हैं।प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. स्नेही ने बताया कि 10 हजार में से दो प्रतिशत को हेपेटाइटिस होता है। इसकी जानकारी हमें रक्त की जांच के बाद पता चलती है। मरीजों को भी नहीं पता होता है।डा. स्नेही ने बताया कि स्योहारा क्षेत्र में हेपेटाइटिस सी के ज्यादा मरीज होते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालो से हेपेटाइटिस सी के मरीजों की संख्या काफी ज्यादा निकल रही है। अपने ब्लॉक के क्षेत्रों में भी हेपेटाइटिस सी के मरीजों की अधिकता ज्यादा होती है।हेपेटाइटिस के प्रकार
हेपेटाइटिस ए- हेपेटाइटिस ए लीवर की सूजन है। यह दूषित भोजन और पानी के अंतर्ग्रहण या किसी संक्रामक व्यक्ति के सीधे संपर्क से फैलता है।हेपेटाइटिस बी- यह एक वायरल संक्रमण है। यह जन्म और प्रसव के दौरान, साथ ही असुरक्षित इंजेक्शन और शारीरिक संबंध के माध्यम से मां से बच्चे में फैल सकता है।हेपेटाइटिस सी- वायरस तीव्र और जीर्ण दोनों प्रकार के हेपेटाइटिस का कारण बन सकता है।हेपेटाइटिस डी- हेपेटाइटिस वायरस उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्हें हेपेटाइटिस बी वायरस से पुराना संक्रमण है।
हेपेटाइटिस ई- यह संक्रमण के कारण होने वाले लीवर की सूजन है। वायरस मुख्य रूप से दूषित पानी के माध्यम से मल-मौखिक मार्ग से फैलता है।अन्य प्रकार के हेपेटाइटिस, अल्कोहलिक हेपेटाइटिस – बहुत अधिक शराब पीने के कारण लीवर की सूजन।हेपेटाइटिस के कारण लीवर एक महत्वपूर्ण अंग है जो पोषक तत्वों को संसाधित करता है, रक्त को फिल्टर करता है और संक्रमण से लड़ता है। जब लीवर में सूजन या क्षति हो जाती है, तो उसका कार्य प्रभावित हो सकता है। भारी शराब का उपयोग, विषाक्त पदार्थ, कुछ दवाएं, ऑटो प्रतिरक्षा प्रणाली प्रतिक्रियाएं और कुछ चिकित्सीय स्थितियां हेपेटाइटिस का कारण बन सकती हैं।हेपेटाइटिस के लक्षण
एक संक्रमित व्यक्ति के लक्षण एनोरेक्सिया, गहरे रंग का मूत्र, भूख न लगना, त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, पेट में दर्द, तेजी से वजन कम होना और उल्टी है। उपेक्षित वायरल हेपेटाइटिस से लीवर का सिरोसिस हो जाता है।
हेपेटाइटिस के प्रकार और संक्रमण तीव्र और पुराना है या नहीं, इसके आधार पर उपचार के विकल्प अलग-अलग होंगे।
फार्मास्युटिकल थेरेपी – प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाएं भी एक उपचार कार्यक्रम का हिस्सा हो सकती हैं।वैक्सीन-ए का टीका हेपेटाइटिस के लिए उपलब्ध है।प्रभावी स्वच्छता – हेपेटाइटिस ए और ई संक्रमण से बचा जा सकता है।स्वास्थ्य और पोषण शिक्षा सभी के लिए उपयोगी।आहार प्रबंधन एक उच्च प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और मध्यम वसा का सेवन करने की सलाह दी जाती है। नियमित अंतराल पर छोटे मोहक भोजन बेहतर ढंग से सहन किए जाते हैं। ओवरफीडिंग से बचना चाहिए।भोजन में शामिल हैं।अनाज का दलिया, नरम चपाती, रोटी, चावल, आलू, रतालू, फल, गुड़, शहद और उत्तेजक पेय।
खाने से परहेज दालें, बीन्स, मांस, मछली, अंडा, चिकन, मीठी तैयारी जहां घी, मक्खन या तेल का उपयोग किया जाता है, बेकरी उत्पाद, सूखे मेवे, मेवे, मसाले, चटनी, साबुत दूध और क्रीम।एक डॉक्टर/आहार आमतौर पर इस संक्रमण वाले लोगों को पर्याप्त आराम करने, बहुत सारे तरल पदार्थ पीने, पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त करने और शराब से बचने की सलाह देगा। हालांकि, इस संक्रमण को विकसित करने वाली गर्भवती महिलाओं को कड़ी निगरानी और देखभाल की आवश्यकता होती है। रिपोर्ट लिखे जाने तक 102 लोगों की जांच हो चुकी थी। जिनमे 13 लोगों की हेपेटाइटिस सी और 2 लोगों की हेपेटाइटिस बी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। 2 मरीजों को दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। पॉजिटिव लोगो के ब्लड सेम्पल लेकर जिले पर वायरल लोड की जांच को भेजे जा रहे है। इस दौरान कैंप नोडल ऑफिसर डॉक्टर राकेश कुमार,राजेश कुमार , वीर सिंह हैल्थ सुपरवाइजर, राशी ऑपरेटर,सुनील कुमार, स्नेहलता, आरती एल टी, पुष्पेंद्र कुमार सी एच ओ, संगिनी और आशा आदि उपस्थित रहे।

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