रिपोर्टर /मोहम्मद आलम खान
हज़रत अली (अ.स) के जन्मदिवस का भव्य आयोजन:
नई आबादी, सोयत तहसील, जिला आगर मालवा

सोयत कला )13 रजब का त्योहार विशेष अंदाज में मनाया गया पिछले साल की तरह इस साल भी 13 रजब को हज़रत अली (अ.स) का जन्मदिन नई आबादी, सोयत तहसील, जिला आगर मालवा में शांति और श्रद्धा के साथ मनाया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि इसमें एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया गया।
मजलिस, दुआएं और समाजसेवा
इस अवसर पर मस्जिदों में विशेष मजलिस और दुआ का आयोजन हुआ। स्थानीय समुदाय ने गरीबों और जरूरतमंदों में भोजन और मिठाइयों का वितरण किया। कार्यक्रम के दौरान हज़रत अली (अ.स) के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला गया। उनकी शिक्षाओं से न्याय, इंसानियत और ज्ञान का संदेश समाज को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।
काबे में जन्म की अद्भुत घटना
अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) के दामाद हज़रत अली (अ.स) का जन्म 17 मार्च 600 को, 13 रजब शुक्रवार के दिन मक्का में हुआ। हदीसों के अनुसार, यह ऐतिहासिक घटना काबे के अंदर घटी। उनकी माता काबे के उस हिस्से से अंदर गईं जिसे आज रुक्न-ए-यमनी कहा जाता है। आज भी वह दीवार बार-बार मरम्मत के बावजूद उसी स्थान से टूटी रहती है।
हज़रत अली (अ.स) का महत्व और योगदान
हज़रत अली (अ.स) मुसलमानों के चौथे खलीफा और हज़रत मुहम्मद (स.अ.व) के उत्तराधिकारी थे। उनका जीवन कोमल प्रवृत्ति, न्यायप्रियता और अद्वितीय ज्ञान का प्रतीक था। उनके जन्मदिवस को पूरी दुनिया में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।
विशेष उत्सव और जश्न
इस साल का आयोजन खास रहा क्योंकि इसे बड़े इनामों और जश्न के साथ मनाया गया। पटाखों और रोशनी ने आसमान को जगमगा दिया। स्थानीय लोगों ने इस उत्सव को ऐतिहासिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
संदेश और प्रेरणा
हज़रत अली (अ.स) की शिक्षाओं का उद्देश्य न्याय, इंसानियत और समाज में भाईचारे का संदेश फैलाना है। उनकी जिंदगी हर वर्ग को प्रेरणा देती है।
आयोजन में योगदान देने वाले प्रमुख लोग
इस आयोजन को सफल बनाने में वसीम भाई, राजू भाई, शाहरुख भाई, आलम भाई,( पत्रकार) रौनक भाई, समीर भाई, जुबेर भाई, राजा भाई, शमसु भाई, गुड्डू भाई, नावेद, अल्हन, तनवीर, अमीर, साहिल, तोफिक, जफर, हसनी-हुसैनी कमेटी और अल-हैदरी कमेटी के मेंबरों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
अमन और चैन की दुआ
इस पावन अवसर पर देश में अमन और चैन की दुआ की गई, जिससे यह आयोजन और भी अर्थपूर्ण बन गया।


















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