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बीकानेर-लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में एकादशी का स्नान किया। अखाड़ों की शोभायात्राएं निकलीं

सवांददाता ब्यूरो चीफ रमाकांत झंवर बीकानेर श्रीडूंगरगढ़

प्रयागराज के महा कुंभ क्षेत्र से श्रीमद् भागवत के तृतीय दिवस की कथा करते हुए निम्बार्क सम्प्रदाय के जगत गुरु श्री राधा मोहन शरण देवाचार्यजी महाराज ने कहा कि हमारा शरीर त्रिगुणात्मक है। यह सतरह तत्वों से बना है। स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर में, कारण शरीर 17 तत्वों को साथ लेकर जाता है और दूसरा शरीर प्राप्त करने पर भी कारण शरीर का अभिमान मौजूद रहता है। महाराज ने कहा कि चार जगह अधर्म का निवास रहता है जुआ,मदिरापान,वेश्यावृत्ति और जीव हत्या जैसे चार दुर्गुणों से बचे हुए रहना चाहिए। संत राधा मोहनजी ने कहा कि हमारे शास्त्र कितने दिव्य हैं। उनमें प्राण त्यागने की भी विधि लिखी है, किंतु आजकल जो अविवेकपूर्ण आत्महत्याएं हो रही है, उसका शास्त्रों में कहीं भी उल्लेख नहीं है। वह बड़ा पापमय कृत्य है।आत्महत्या करनेवाले को तामस योनि प्राप्त होती है। महाराज ने कहा भागवत कथा जीवन जीना सीखाती है। कथा के दौरान डॉ. चेतन स्वामी ने कहा कि कुम्भ के माध्यम से हमें हमारी संत परम्परा का परिचय प्राप्त होता है तथा विशद रूप से संतों के स्वभाव को जान पाते हैं। चेतन स्वामी का कथा पीठ से महाराजजी के हाथों साफा पहनाकर सम्मान भी किया गया। कथा के यजमान हरिप्रसाद जांगिड़ का भी सम्मान किया गया। आज एकादशी के अवसर पर लाखों श्रध्दालुओं ने संगम में स्नान किया तथा साधुओं के लिए सैकड़ों भण्डारे आयोजित किए। कुंभ के सेक्टर 19-20 के मुक्ति मार्ग पर तीन अखाड़ों के संतों ने मिलकर ऊंट, घोड़ों तथा रथों पर शोभायात्रा निकाली। सभी संत खालसों में अब संतों एवं श्रद्धालु‌ओं की चहल पहल बढ़ गई है। आज प्रातः यहां सघन कोहरा रहा, इसके बावजूद श्रद्धालुओं ने प्रातः चार बजे से ही संगम में स्नान कर पुण्यार्जन किया।

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