सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
गंगा-यमुना-सरस्वती की पावन भूमि प्रयागराज में गुरुवार को राधा सर्वेश्वर नगर के सेक्टर 20 के जयपुरी शैली में सजे-धजे पांडाल में दूसरे दिन की भागवत-कथा सुनाते हुए जगद् गुरु निम्बार्क पीठ, गिरिराज के पीठाधीश्वर राधा मोहन शरणजी महाराज ने कहा कि भागवत में भगवान की परिभाषा की गई है। भगवान को परमसत्ता कहकर सम्बोधित किया गया है। परमसत्ता क्या है? उत्तर के रूप में कहा गया कि जो जन्मादि कार्य करता है अर्थात वह सत्ता जो जन्म, पालन और विनाश की लीला करती है। भगवान ही उत्पन्न होते हैं, भगवान ही भगवान का पोषण करते हैं और भगवान ही भगवान का संहार करते हैं। भागवत-कथा में पूर्व में युवा साध्वी सर्वेश्वरी देवी ने सम्बोधित करते हुए भागवत का वास्तविक महत्त्व बताया। कथा प्रबंधक वाल्मीकिजी शर्मा ने कथा के दौरान बताया कि कुंभ मेले के इस आयोजन में सर्वेश्वर पीठ की ओर से प्रति दिन संतों एवं सामान्यजन का द्विस्तरीय वृहद भण्डारे का आयोजन किया जा रहा है,आज कुंभ में पधारे हुए सैकड़ों संतो का यहां यथोचित सम्मान किया गया। यहाँ भागवत कथा का आयोजन हरि प्रसाद जांगिड़, जयपुर के सौजन्य से किया जा रहा है। डॉ० चेतन स्वामी ने बताया कि गुरुवार से संगम में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की प्रातः 5 बजे से भीड़ देखी गई। स्नान के लिए यहां सुगम घाट बनाए गए हैं तथा पुलिस दल का चप्पे-चप्पे पर पहरा रहता है। कुंभ क्षेत्र की सफाई व्यवस्था उल्लेखनीय कही जा सकती है। आज दोपहर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समूचे कुंभ क्षेत्र का हवाई निरीक्षण किया तथा वे सतुआ महाराज के आश्रम में भी पधारे।सर्वेश्वर -पीठ के अधिष्ठाता राधा मोहन शरण जी महाराज ने आज की कथा में जीव, ब्रहम तथा माया की विशद् व्याख्या की। आपने कहा कि देशकाल,परिस्थिति में जो अपरिवर्तनीय है। वही परम सत्य है। आपने कहा कि भगवान की प्रत्येक चीज कल्याण कारी है।



















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