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सोशल ग्रुप “आपणो राजस्थान…आपणी राजस्थानी” के माध्यम से लोगों को राजस्थानी भाषा के प्रति जागरूक किया जा रहा हैं।

हर्षल रावल
सिरोही/राज.

 

सोशल ग्रुप “आपणो राजस्थान…आपणी राजस्थानी” के माध्यम से लोगों को राजस्थानी भाषा के प्रति जागरूक किया जा रहा हैं।


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आपणो राजस्थान..आपणी राजस्थानी” अभियान का समर्थन व प्रचार कर रहा हैं।
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सिरोही। आपणी राजस्थानी भासा के सोशल मीडिया ग्रुप के एडमिन हर्षल रावल राजस्थानी भाषा का पूर्ण जोर समर्थन एवं प्रचार कर रहे हैं।
राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलवाने के लिए मायड़ भाषा प्रेमी समय-समय पर कई प्रकार के अभियान चलाते रहते हैं। लेकिन इस बार सोशल मीडिया के माध्यम से “आपणो राजस्थान…आपणी राजस्थानी” अभियान का प्रचार कर रहे हैं। सोशल मीडिया ग्रुप के एडमिन हर्षल रावल ने बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप आपणो राजस्थान आपणी राजस्थानी पर समस्त लोगों हमें मिलकर जोड़ना होगा। क्योंकि इस अभियान के बारे में लोगों ज्ञात होना चाहिए। जिससे राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से केंद्र सरकार पास करें।
आपणो राजस्थान आपणी राजस्थानी के संस्थापक हरीश हैरी को देखकर प्रेरणा मिली। इससे अभियान को आरंभ किया गया। आपणो राजस्थान आपणी राजस्थानी अभियान के तरफ राजस्थानी भाषा को व्यवहार की भाषा बनाकर सर्वप्रथम स्वयं मान्यता देनी होगी। इस अभियान के तहत प्रिंटिंग प्रेस से छपने वाले विभिन्न तरह के बैनर व अन्य सामग्री राजस्थानी में ही छपवाने की पहल करनी होगी। इस अभियान की मुख्य बात यह है कि यह बिना किसी अध्यक्ष के नेतृत्व में होता हैं। सैंकड़ों सक्रिय कार्यकर्ताओं का इसमें योगदान है। इस अभियान में प्रतिदिन राजस्थानी भाषा संबंधित इस अभियान को सोशल मीडिया पर प्रसारित करते हैं। इसके तहत समय और ऊर्जा बचाने के लिए प्रचार प्रसार करने के लिए बाहर जाने की बजाए अपने सोशल मीडिया से अपने लोगों को ही राजस्थानी भाषा के प्रति जागरूक करना है। मायड़ भाषा राजस्थानी प्रेमियों द्वारा किए गए कार्य को सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाता हैं। ताकि दूसरे लोग भी इससे प्रेरणा ले।

आपणो राजस्थान आपणी राजस्थानी अभियान की मुख्य बातें:-

1. राजस्थानी भाषा को व्यवहार की भाषा बनाकर हमें सर्वप्रथम स्वयं मान्यता देनी होगी।
2. सोशल मीडिया पर समस्त पोस्ट राजस्थानी में ही लगाने के लिए लोगों को जागरूक करना है।
3. राजस्थानी भाषा का प्रचार-प्रसार करने के लिए अपने आस-पास गली मोहल्ले, गांव और शहर पर जोर देना है।
4. आपणो राजस्थान…आपणी राजस्थानी की भावना का प्रचार-प्रसार करना।
5. प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने ढंग से राजस्थानी भाषा का प्रचार प्रसार करेगा।

आपणी राजस्थानी मायड़ भाषा की ताकत:-
सोशल मीडिया एडमिन हर्षल रावल बताते हैं कि राजस्थान भाषा को संवैधानिक मान्यता मिलने पर बहुत अधिक राजस्थानी लोगों को लाभ होगा। राजस्थान भाषा के मान्यता से बहुत अधिक बातें संभव हो जाएंगी।
राजस्थानी शब्दों का विकास, भाषा का आधिकारिक प्रयोग, संस्कृति का संरक्षण आदि कुछ अन्य बिंदु हैं। लेकिन उनके बारे में न लिखने के तात्कालिक लाभों पर विचार किया है। राजस्थान के युवा अपनी भाषा के मूल्य को समझते हैं और सरकार से आधिकारिक मान्यता की मांग करते हैं और सोशल मीडिया पर अधिक से अधिक राजस्थानी भाषा का उपयोग करना चाहिए। अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब राजस्थानी भाषा विलुप्त भाषाओं में गिनी जाएगी।
हर्षल रावल आगे बताते हैं कि देश में प्रत्येक राज्य की अपनी भाषा हैं। दुर्भाग्य यह हैं कि अंग्रेजों ने राजस्थानी भाषा को मान्यता दिला थी। लेकिन राजनीति के नेताओं ने अपनी रोटियां के चक्कर में इस राजस्थानी भाषा को संवैधानिक से हटा दिया गया और राजस्थानी लोगों पर हिंदी भाषा थोपी गयी। जिसके चलते विद्यालय में यही सिखाया जाता हैं कि हमारी मातृभाषा “हिंदी” हैं। यह राजस्थानियों के लिए शर्म की बातें हैं। राजस्थानी लोगों को अपने स्तर पर इसे संवैधानिक मान्यता मिले इसके लिए प्रयास करना चाहिए। मायड़ भाषा केवल भाषा नहीं होती हैं। यह हमारी पहचान होती हैं।
इसके साथ ही लोगों को इस अभियान से जुड़ कर सोशल मीडिया पर राजस्थानी में ही लिखने का प्रण लेना चाहिए और राजस्थान में केवल राजस्थानी भाषा का प्रयोग हो यह प्रण लेना आवश्यक हैं। इस अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 10 लोगों को सोशल मीडिया ग्रुप में जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।

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