सूर्य कल मकर राशि में प्रवेश करेगा
शुक्रवार
सत्यार्थ न्यूज
ब्यूरो चीफ मनोज कुमार माली सोयत कला, सुसनेर से

सुसनेर जिला आगर मालवा मध्य प्रदेश के सुसनेर नगर के चिंता हरण हनुमान मंदिर के पुजारी के द्वारा जानकारी दी गई सामान्यतः: यह माना जाता है कि रवि उत्तरायण (मकर संक्रांति) 14 जनवरी को होता है, परंतु यह वास्तविकता से परे है। पंडित विजय शर्मा ने बताया कि सायन गणित से सूर्य 21-22 दिसंबर को उत्तरायण में प्रवेश कर जाते हैं और शिशिर ऋतु का प्रारंभ हो जाता है। ऐसा प्रत्यक्ष गणित में होता है, जो भारत को छोड़कर संपूर्ण विश्व में अपनायी जाती है। इस गणित में लाखों वर्षों के बाद भी किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता। मगर भारतीय निरयन पद्धति में सूर्य पृथ्वी के अंतराल को अयनांश रुप में गिनते हैं, जो वर्तमान में करीब 24 अंश के करीब चल रहा है। जिसके कारण भारत में रवि उत्तरायण अर्थात मकर संक्रांति 21 दिसंबर के 24 दिन बाद अर्थात 14 जनवरी को मनाई जाती है। जो भविष्य में 15 जनवरी को मनाई जाएगी, ईस्वी सन् 285 में अयनांश शून्य था, उस समय भारत में भी मकर संक्रांति 21 दिसंबर को मनाई जाती थी। चूंकि उस समय निरयन सायन गणित से 21 दिसंबर को रवि उत्तरायण में प्रवेश करता था, परंतु दोनों की गणित में प्रति वर्ष अंतर बढ़ता जा रहा है, जो लगभग 70 वर्ष में 1 अंश हो जाता है। जो वर्तमान में करीब 24 अंश हो चुका है और लगभग आज से 700 वर्ष बाद 34 अंश हो जाएगा। तब मकर संक्रांति 24 जनवरी को मनाई जाएगी। चूंकि 70 वर्ष में तीन पेढिय़ा गुजर जाती है तथा पिछले लगभग 70 वर्षों से 14 जनवरी को मकर संक्रांति मना रहे है,अत: हम उसे स्थाई संज्ञा देने लगे है। त्रिवेदी ने बताया कि निरयन गणित में 70 वर्ष तक एक ही तारीख आने से सामान्य व्यक्ति की आम धारणा बन जाती है कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही आएगी। वास्तव में ऐसा नहीं है, 19वीं सदी के प्रारंभ में मकर संक्रांति 13 जनवरी को आती थी। त्रिवेदी ने बताया कि अगले वर्ष 2015 में मकर राशि में सूर्य का प्रवेश 14 जनवरी को 19.28 पर होगा, जिससे पुण्य काल 15 जनवरी को होगा और धीरे-धीरे आने वाले कुछ वर्षों में स्थाई रुप से 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी।


















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