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गायों की भूमि गायों को मिल जाएं तो देश में एक भी निराश्रित गोवंश नहीं रहेगा- पीपाधीश्वर पूज्य झनकारेश्वर जी महाराज

गायों की भूमि गायों को मिल जाएं तो देश में एक भी निराश्रित गोवंश नहीं रहेगा- पीपाधीश्वर पूज्य झनकारेश्वर जी महाराज

सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित “गोवंश रक्षा वर्ष” के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 251 वें दिवस पर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज ने बताया कि आज मां अनुसूया एवं अत्री ऋषि के पुत्र के रूप में कल्पगुरु भगवान दत्तात्रेय ने जन्म लिया भगवान दत्तात्रेय को ब्रह्मा ,विष्णु और महेश इन तीनों ही देवों का अंश माना जाता है. भगवान दत्तात्रेय को गुरु और भगवान दोनो की उपाधि दी गई है और दत्तात्रेय में ईश्वर, गुरु और शिव यह तीनों ही रूप समाहित हैं इसीलिए उन्हें ‘परब्रह्ममूर्ति सद्गुरु’ और ‘श्रीगुरुदेवदत्त’ भी कहा जाता हैं। भगवान दत्तात्रेय को शैवपंथी शिव का अवतार और वैष्णवपंथी विष्णु का अंशावतार मानते हैं। दत्तात्रेय को नाथ संप्रदाय की नवनाथ परंपरा का भी अग्रज माना है। भगवान दत्तात्रेय के तीन मुखों का मतलब है कि उनके अंदर ईश्वर, गुरु, और शिव की तीनों शक्तियां हैं. ये तीनों शक्तियां मिलकर ‘गुरु शक्ति’ बनाती हैं ।

स्वामीजी ने बताया कि आज भारत लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का निर्वाण दिवस है उन्होंने देश की एकता एवं अखंडता के लिए भारत की 562 छोटी-बड़ी रियासतों का भारतीय संघ में विलीनीकरण करके भारत के एकीकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर भारत की एकता का निर्माण कर एक भारत श्रेष्ठ भारत का नारा देकर भारत को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया है। भारत के लौह पुरुष आज ही के दिन मां भारती की गोद में चिर निंद्रा में सो गए थे, ऐसे दिव्य लौह पुरुष को शत शत नमन ।

*विश्व के प्रथम गो अभयारण्य में कल्पगुरु दत्तात्रेय भगवान का भव्य प्रकट उत्सव के शुभावसार पर पीपाधाम गागरोन (झालावाड़)
के पीठाधीश्वर पूज्य झनकारेश्वर जी महाराज एवं बड़ोदरा गुजरात के कौशलय पीठ के संस्थापक स्वामी संस्कृतानंद जी महाराज,माता मंजुलता देवी। संस्कृत विदुषी एवं डॉक्टर नीरज गो वैज्ञानिक का सानिध्य मिला ।
पूज्य स्वामी झनकारेश्वर जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में बताया कि अगर देश एवं राज्यों की सरकार गायों की भूमि गायों को दिला दे तो पुण्यभूमि भारत का एक भी गोवंश निराश्रित नहीं घूमेगा लेकिन वर्तमान में जो गोचर भूमि है उसे सरकार विकास के नाम पर या अपने रसूकदारों को कब्जा करवाकर नष्ट कर रही है,जिसके कारण आज भगवती गोमाता को दर दर की ठोकरें खानी पड़ रही है क्योंकि गोमाता को पोष्टिक आहार देने के बजाय उसे स्वच्छंद विचरण करने के लिए गोचर भूमि की आवश्यकता है और शासन गोमाता के गोचर को कब्जा मुक्त कर दे यही सबसे बड़ी गौसेवा है।

गो कृपा कथा के 251 वें दिवस पर हितेष दवे स्वामीनारायण अक्षरधाम से गुरु हरी महंत स्वामी जी के सेवक कोटा, रमण यादव व्यवसायि कोटा, मोहन राठौर झालावाड़,, श्याम सुन्दर राठौर रावतभाटा, गिरिराज पाटीदार पाटीदार सुसनेर,शिवलाल पाटीदार सुसनेर,अनिल अग्रवाल ,राजेंद्र अग्रवाल झालावाड़,एडवोकेट रूप नारायण श्रीवास्तव ,घनश्याम शर्मा एवं द्वारिका दास लड्डा सुसनेर आदि अतिथि उपस्थित रहें

251 वे दिवस पर चुनरीयात्रा राजस्थान एवं मध्यप्रदेश से

एक वर्षीय गोकृपा कथा के 251 वें दिवस पर चुनरी यात्रा राजस्थान के झालावाड़ जिले की डग तहसील के पतलाई- गाँव , पचपहाड़ तहसील के सिंगपुर कुडाल ग्राम व भगवतीपुरा जीजर्ण ग्राम की महिला मंडल एवं मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले के मोहन बडौद से महर्षि दयानंद कन्या गुरुकुल की बालिकाएं
आचार्या- ऋचा शास्त्री के सानिध्य में


बालिकाएं:-भूमिका आर्या, हेमलता आर्य, प्रतिभा आर्य,कोमल आर्य एवं सोनल आर्य ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी 56 भोग लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।

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