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व्यक्ति के विचार एवं आहार शुद्ध करने में सबसे बड़ी भूमिका गोमाता की ही होती है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

व्यक्ति के विचार एवं आहार शुद्ध करने में सबसे बड़ी भूमिका गोमाता की ही होती है- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

 

सुसनेर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित गो रक्षा वर्ष के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 221 वे दिवस पर स्वामी गोपालानंद जी सरस्वती ने बताया कि आज देव दीपावली है। चंद्रमा को पूरा ध्यान में रखते हुए यह कार्तिक पूर्णिमा पर कार्तिक के महीने में मनाई जाती है। देव दीपावली पर साक्षात देवता काशी में गंगाजी सहित अयोध्या में सरयू में स्नान हेतु पृथ्वी पर पधारते है। देव दीपावली मनाने का एक और प्रसंग है कि त्रिपुरासुर दानव इस दिन देवताओं द्वारा मारा गया था, तो यह देव दीपावली के रूप में जाना जाता है, इसलिए कार्तिक पूर्णिमा देवताओं की विजय के दिवस के रूप में मनाया जाता है।साथ ही आज के दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी का कार्तिक पूर्णिमा 1469 ईस्वी को पंजाब के तलवंडी में जन्म हुआ था और नानक देव ने आजीवन समाज में फैले अज्ञान या अंधकार को दूर करने की कोशिश है एवं गुरु नानक देव ने अपने ज्ञान से समाज को प्रकाशवान करने की हमेशा कोशिश की, यही वजह है कि गुरु नानक जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है।

पूज्य स्वामीजी ने प्रसवकाल एवं प्रसतवोत्तर काल में मां एवं गोमाता की भूमिका के बारे में बताते हुए कहां कि इस संसार में माता से बढ़कर और कोई देवता नहीं है अर्थात् मां ही सबसे बड़ी देवता है ।और प्रसवकाल के समय मां ही प्रसवता को सबसे बड़ी हिम्मत बढ़ाने वाली होती है यानि मां प्रसव के बाद मां द्वारा अपनी बेटी के सिर पर हाथ फेरने मात्र से वह अपने सारे कष्ट दुःख भूल जाती है और इसी प्रकार गोमाता प्रवस के बाद होने वाले 72 रोगों को अपने पंचगव्य के माध्यम से ठीक कर देती है क्योंकि मां के स्वास्थ्य का प्रभाव बच्चे पर पढ़ता है इसलिए प्रसव से पूर्व व प्रसव के बाद मां का विचार एवं आहार दोनों ठीक रहें तो बाकि सब अपने आप ठीक हो जाता है और व्यक्ति के विचार एवं आहार शुद्ध करने में सबसे बड़ी भूमिका गोमाता की होती है और जो निष्काम भाव से गोसेवा करता है उसके विचार एवं आहार शुद्धि के बाद गोसेवा करने वाला मनुष्य मुक्ति अवश्य पाता है ।

221 वे दिवस पर महेश जोशी उदयपुर, रामेश्वर पालीवाल आगर, देव सिंह यादव खजूरी एवं अमर सिंह ,लोकेश सिंह लसानी (राजसमंद) आदि अतिथि उपस्थित रहें

*221 वे दिवस पर चुनरीयात्रा गुजरात एवं राजस्थान से *
एक वर्षीय गोकृपा कथा के 221 वें दिवस पर चुनरी यात्रा गुजरात के कर्णावती से जयसुख भाई मिस्त्री, पुरुषोत्तम भाई देवपुरा एवं रमेश भाई प्रजापति व राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी तहसील से हुरा बा गो सेवा संस्थान करजू से दयाल शर्मा, लक्ष्मी नारायण रैगर, कमलेश टांक, किशन लाल एवं दिनेश मीणा आदि ने अपने परिवार की और से सम्पूर्ण विश्व के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया।
चित्र 1 : गोकथा सुनाते स्वामी गोपालानंद सरस्वती।
चित्र 2 : गोकथा में उपस्थित गौभक्त।
चित्र 3,4 : गोकथा में गोमाता को चुनड़ ओढाते गोभक्त ।
चित्र 5,6 : चुनरी यात्रा में आए गोभक्तो को सम्मानित करते महोत्सव के कार्यकर्ता
चित्र 7 : गो पुष्टि पूजन करते गो भक्त ।
चित्र 8 : गोमाता के लिए चुनड़ लाते गोभक्त

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