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बी. एल. पोया” का समर्पित सेवा यात्रा – सहकारिता विभाग में नये आयाम गढ़ते हुए 

छ. ग. विशेष संवाददाता :- राजेन्द्र मंडावी                                                           “बी. एल. पोया” का समर्पित सेवा यात्रा – सहकारिता विभाग में नये आयाम गढ़ते हुए 

 

कांकेर। सहकारिता के क्षेत्र में अपनी मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा से पहचान बनाने वाले बी.एल. पोया का हाल ही में कांकेर में पदोन्नति के साथ नए पद पर आगमन हुआ। सुकमा जिले के सहायक सहकारिता आयुक्त के रूप में अपने अनुभवों और कुशल नेतृत्व के चलते उन्होंने सहकारिता विभाग में नयी ऊर्जा का संचार किया। उनकी इन असाधारण सेवाओं को देखते हुए उन्हें कांकेर जिले में सहकारिता एवं सहकारी संस्थाओं के उपायुक्त के पद पर नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने 29 अक्टूबर 2024 को कार्यभार संभाला। कांकेर में अपने इस नए पद पर एक नई शुरुआत करते हुए, बी.एल. पोया के अनुभव और निपुणता से सहकारी संस्थाओं में सकारात्मक बदलाव की उम्मीदें बंधी थीं। लेकिन संयोगवश, कार्यभार ग्रहण करने के अगले ही दिन, 30 अक्टूबर 2024 को उन्होंने सेवानिवृत्ति ग्रहण कर लिया।                               उनके सेवा निवृत्त होने से विभाग में एक शून्य उत्पन्न हुआ है जिसे भरना कठिन होगा। उनके कुशल नेतृत्व और सहकारिता क्षेत्र में दीर्घकालिक योगदान ने कई सहकारी संस्थाओं को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाने में सहायता की। बी.एल. पोया का सेवा कार्यकाल न केवल उनके साथ काम करने वाले सहकर्मियों के लिए प्रेरणास्रोत रहा है, बल्कि उन सहकारी समितियों के लिए भी एक मिसाल है जिनका संचालन उन्होंने समय-समय पर किया। उन्होंने अपने कार्यकाल में सहकारी संस्थाओं को मजबूती देने, छोटे किसानों और निम्न आय वर्ग के लोगों तक सहकारिता की पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में सहकारी संस्थाओं के लिए नई योजनाओं का निर्माण और उनका प्रभावी क्रियान्वयन किया गया, जिससे सहकारी क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला। उनके सहयोगियों के अनुसार, बी.एल. पोया एक सरल, विनम्र और कार्य के प्रति समर्पित अधिकारी थे, जो हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने के पक्षधर रहे। उनका संपूर्ण सेवा काल सहकारी क्षेत्र के लिए समर्पित रहा और उन्होंने इसे एक मिशन के रूप में निभाया। उनके योगदान को सहकारी क्षेत्र में हमेशा याद किया जाएगा और उनकी नीतियाँ एवं कार्यशैली सहकारी संस्थाओं के लिए मार्गदर्शक बनी रहेंगी। इस तरह बी.एल. पोया का कार्यकाल सहकारिता क्षेत्र में नए मानक स्थापित करता है और सेवानिवृत्ति के बाद भी उनकी विरासत भविष्य की सहकारी व्यवस्थाओं में उनकी अनुपस्थिति को महसूस कराएगी।

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