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अमर्यादित भजन गाकर देश की युवा पीढ़ी को दिग्भ्रमित कर रहें है कुछ भजन गायक- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

सत्यार्थ न्यूज  सोयत कला

 

अमर्यादित भजन गाकर देश की युवा पीढ़ी को दिग्भ्रमित कर रहें है कुछ भजन गायक- स्वामी गोपालानंद सरस्वती

सुसनेर नगर से मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा मध्य प्रदेश के निराश्रित गोवंश के संरक्षण हेतु सम्पूर्ण मध्यप्रदेश में भारतीय नूतन संवत 2081 से घोषित गो रक्षा वर्ष के तहत जनपद पंचायत सुसनेर की समीपस्थ ननोरा, श्यामपुरा, सेमली व सालरिया ग्राम पंचायत की सीमा पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित एवं श्रीगोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा संचालित विश्व के प्रथम श्री कामधेनु गो अभयारण्य मालवा में चल रहें एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 194 वे दिवस के अवसर पर श्रोताओं को सम्बोधित करते स्वामी गोपालानंद जी महाराज ने आजकल के भजन गायकों द्वारा भगवान के बारे में अमर्यादित एवं अभद्र भजन गाने वालो को चेताया कि योगेश्वर भगवान कृष्ण का जीवन चरित्र बहुत अलौकिक एवं अद्भुत रहा है,लेकिन कुछ लोगों ने उनके चरित्र को योगी से भोगी जैसा साबित कर दिया । एक भजन में तो सांवरिया सेठ को अफीम का व्यापारी बताया है। अफ़ीम एक गन्दा नशा है और उसे ले जाते कोई पकड़ में आ जाता है तो उसे अजीवन कारावास होता है लेकिन आजकल के भजन गायक इस प्रकार के अमर्यादित भजन गाकर देश की युवा पीढ़ी को दिग्भ्रमित कर रहें है अर्थात वे तर्क देते है कि भगवान खुद अफीमची है तो फिर हम क्यों न इसका उपयोग करें । यानि युवा पहले ही कुतर्क का आश्रय लेकर गलत रास्ते में जा रहें है दूसरी और कुछ भजन गायक गलत एवं अमर्यादित आधारहीन भजन गाएंगे तो फिर लोगो में क्या संदेश जाएगा इसी प्रकार श्रावण मास में कावड़ यात्रा में भगवान शंकर को गंजेड़ी, भंगेड़ी बताने वाले भजन गाएं जाते है, जो चिंता का विषय है इस पर पूज्य महाराज जी ने देश के सभी भजन गायकों से आग्रह किया है कि आप लोग ऐसे भजन गाना एवं बनाना बन्द कीजिए क्योंकि आप लोगों की समाज को जागृत करने की जिम्मेदारी है इसलिए आप लोग केवल मर्यादित भजन ही गाएं साथ ही देश के सभी सनातनियों से आग्रह किया है कि वे इस प्रकार के अमर्यादित भजन गाने वालों को उसी समय मंच से उतार दे

स्वामीजी ने भगवती गोमाता की प्रकटीकरण कथा के बारे में बताते हुए कहां कि कालांतर में यह कथा सूत जी महाराज ने सोनकादी ऋषियों को सुनाई थी और भगवती गोमाता की कथा का लिंग पुराण एवं एवं वायु पुराण दो दो ग्रंथो में एक ही प्रकार की कथा का उल्लेख है जो भगवान शंकर ने ग्वालों को सुनाई है अर्थात भगवान शंकर ग्वाल से कह रहें है कि है गो पुत्र ग्वाल भगवती गोमाता की कथा अगर ध्यान से सुन लिया और गोमाता के प्रकटीकरण की कथा समझ में आ जाएगी और यह समझ में आ गई तो शरणागति समझाना आसान हो जाएगा और शरणागति समझ में आ गई तो फिर बाकि समझने की आवश्यकता नहीं है

*स्वामीजी ने बताया कि गाय माता जहां रहती है वहां सब सुखी हो जाते है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण कल पूज्य पथमेड़ा बाऊजी की गो अभयारण्य की परिक्रमा के समय देखने को मिला अर्थात कल हम परिक्रमा कर रहें थे तो रास्ते में अनेक हिरण मिले जो निर्भीक होकर स्वच्छंद घूम रहे थे । पूर्व में जब इस अभयारण्य में कोई वाहन लेकर निकलता था तो हिरण आधा किलोमीटर पहले से ही झाड़ियों में छुपकर ओझल जाते थे, लेकिन कल वे निर्भीक होकर पूज्य बाऊजी के दर्शन कर रहें थे ये सब गोमाता के सानिध्य का ही प्रभाव है और इन डेढ़ सालों में यहां इतना परिवर्तन आया है कि हिरण भी यहां एकदम निर्भीक हो चुके है *

गो कृपा कथा के 194 वें दिवस पर श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के वरिष्ठ न्यासी हरगोविन्द भाई मणिलाल जोशी, कर्णावती गुजरात,लखन राठौर ,अनिल भाई चोपड़ा महाराष्ट्र एवं दिलीप सिंह राजपूत उमरी नृसिंहगढ़(राजगढ)आदि अतिथि उपस्थित रहें

*194वे दिवस पर चुनरी यात्रा गुजरात एवं राजस्थान से *

एक वर्षीय गोकृपा कथा के 194 वें दिवस पर गुजरात के सूरत के अमरोली से रघूवीर सिंह एवं नैना लाल के साथ लखन राठौर एवं अनिल भाई चोपडा महाराष्ट्र व राजस्थान के झालावाड़ जिले की मनोहर थाना तहसील के टोडरी जगन्नाथ ग्राम की और से अपने परिवार सहित अपने ग्राम ,नगर,राज्य एवं देश के जन कल्याण के लिए गाजे बाजे के साथ भगवती गोमाता के लिए चुनरी लेकर पधारे और कथा मंच पर विराजित भगवती गोमाता को चुनरी ओढ़ाई एवं गोमाता का पूजन कर स्वामी गोपालानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद लिया और अंत में सभी ने गो पूजन करके यज्ञशाला की परिक्रमा एवं गोष्ठ में गोसेवा करके सभी ने गोव्रती महाप्रसाद ग्रहण किया

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