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वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय में नव प्रवेशी छात्रों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देख भाव-विभोर हुए दर्शक।

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वाराणसी : काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत एवं मंच कला संकाय में पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में नव प्रवेशी छात्र-छात्राओं के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छात्र अधिष्ठाता प्रोफेसर अनुपम कुमार नेमा उपस्थित थे।

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उन्होंने नए छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश पर बधाई देते हुए, उनकी शिक्षा यात्रा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली सहायता और स्कॉलरशिप योजनाओं की जानकारी भी विस्तार से दी।

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संकाय प्रमुख प्रो. संगीता पंडित नें उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों और छात्रों का स्वागत किया और महामना मदन मोहन मालवीय की शिक्षा दृष्टि को आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया। वेलबीइंग कमेटी के समन्वयक डॉ. निखिल भगत नें उद्घाटन सत्र के समापन पर औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन किया।

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प्रथम सत्र: विशेष व्याख्यान

1. प्रो. स्वर वंदना शर्मा नें संगीत एवं मंच कला संकाय के इतिहास पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मालवीय जी नें संगीत को विश्वविद्यालय में शामिल करने के लिए संघर्ष किया और स्कूल से लेकर संकाय तक इसकी यात्रा को छात्रों के सामने रखा।

2. प्रो. बी. सी. कापरी (फिजिकल एजुकेशन विभाग, बीएचयू) नें खेल और स्वास्थ्य पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कलाकारों के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाया और योग के अंगों जैसे यम, नियम, आसन, प्राणायाम और प्रत्याहार के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली की जरूरत पर जोर दिया।

3. डॉ. हजाबम वरुण शर्मा (आईएमएस बीएचयू) नें स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों को संतुलित जीवनशैली और बैलेंस ट्रेनिंग के महत्व को सरलता से समझाया।कार्यक्रम के अंतिम सत्र में संकाय के विद्यार्थियों द्वारा संगीत और नृत्य प्रस्तुतियाँ दी गईं।

1. वायलिन और बांसुरी की जुगलबंदी: प्रत्यूष कुमार मेहता और हेमंत कुमार नें राग वृन्दावनी सारंग की प्रस्तुति दी, जिसके बाद पहाड़ी धुन से समापन हुआ। तबला संगति श्री सिद्धांत मिश्रा नें की।

2. भरतनाट्यम नृत्य: कनीष और सुभी सोनकर नें तिश्र एकम् ताल में निबद्ध “अलारिपु” की पारंपरिक प्रस्तुति दी, जबकि नेहा कुमारी और आरती थापा नें राग चारुकेशी में “कीर्तनम्” की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का समापन छात्र सलाहकार डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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