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ग्राम भान बेड़ा में मां दुर्गा प्रतिमा का भव्य विसर्जन

विशेष संवाददाता पुनीत मरकाम ✍️                                                      ग्राम भान बेड़ा में मां दुर्गा प्रतिमा का भव्य विसर्जन

भानुप्रतापपुर। ग्राम भान बेड़ा में नवरात्रि पर्व के अवसर पर माता दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन धूमधाम से किया गया। नौ दिनों तक माता की पूजा अर्चना करने के बाद, दसवें दिन श्रद्धालुओं ने डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए प्रतिमा का विसर्जन किया।

नवरात्रि के दौरान गांव में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विसर्जन के दिन मां दुर्गा को जसगीत के साथ गांव में भ्रमण कराया गया, जहां चौक-चौराहों पर लोग श्रद्धा से पूजा अर्चना करते रहे।

माता की विदाई में हजारों की भीड़ उमड़ी, और अंतिम आरती में भक्तों ने श्रद्धा पूर्वक भाग लिया। नव दुर्गोत्सव समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने गांव के सभी निवासियों को एकजुट कर दिया और सामूहिक श्रद्धा का परिचायक बना।


हाल ही में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में विशेष सहयोग से विभिन्न प्रतिभागियों ने मिलकर एक अद्भुत कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। इस आयोजन में ललिता जैन, गोदावरी यादव, अनिता जैन, पिलोबाई यादव, कुंती भुवार्य, विष्णु कदम, भागबली जैन, दिनेश जैन, परमेश्वरी धनकर, चंद्रिका यादव, भगवती धनकर, रंगोली, हेमा धनकर, हर्षा जैन, रत्ना दर्रों, निकिता यादव, युक्ति धनकर, अंजना गावड़े जैसे अनेक प्रमुख व्यक्तियों का योगदान रहा।

इस कार्यक्रम में माता के सेवक यश जैन, अभय ठगेल, गौरव यादव, प्रशांत जैन, उपेन्द्र भारद्वाज, अमन यादव, जयंत भुवार्य और महेश्वर पुरामे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, शिव शक्ति जस परिवार एवं टोमेश जैन, कमल देव जैन और तिलक भुवार्य का भी विशेष सहयोग मिला।

इस कार्यक्रम की व्यवस्था कोर्राम टेंट, लाईट एवं साउंड, और अभिषेक डिजे द्वारा की गई। कार्यक्रम की सफलता के लिए माननीय जागेश्वर सिंह, नरेटी, कमलेश धनकर, विष्णु राव, कदम भागबली जैन, मिलन शोरी, सुरज नरेटी और कन्हैया कुंजाम मंच संचालन का भार सुरेन्द्र धनकर ने निभाया ।

इस आयोजन ने सामूहिक प्रयासों की एक नई मिसाल कायम की है, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। सभी सहयोगियों को इस सफलता के लिए बधाई!
इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक भावनाओं को जगाया, बल्कि गांव की सांस्कृतिक धरोहर को भी सहेजने का काम किया।

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