छ.ग. विशेष संवाददाता :- राजेन्द्र मंडावी गोड़ी भाषा अनुवाद कार्यशाला का सफल आयोजन

कांकेर। नवा रायपुर, अटल नगर: आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, अटल नगर, नवा रायपुर में 10 दिवसीय गोड़ी भाषा अनुवाद कार्यशाला का सफल आयोजन संपन्न हुआ। यह कार्यशाला विशेष रूप से गोड़ी भाषा के संरक्षण और प्रसार के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, जिसमें स्थानीय भाषाई विशेषज्ञों और अनुवादकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस कार्यशाला की एक विशेष उपलब्धि रही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण भाषणों का गोड़ी भाषा में अनुवाद। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र को संबोधन, प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम और 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस भाषण का हिंदी से गोड़ी भाषा में अनुवाद कर इनका वॉइस रिकॉर्डिंग किया गया। इस पहल का उद्देश्य गोड़ी भाषा बोलने वाले लोगों तक इन महत्वपूर्ण संदेशों को पहुंचाना और उन्हें भाषा के प्रति गौरव का अनुभव कराना था। कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने गोड़ी भाषा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे अनुवाद कार्यशाला जैसी पहलें न केवल भाषाई धरोहर को संरक्षित करती हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने में भी मदद करती हैं। अनुवाद प्रक्रिया के दौरान भाषा विशेषज्ञों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के भाषणों के गूढ़ और गहन संदेशों को सरल और प्रभावी रूप से गोड़ी भाषा में प्रस्तुत किया। अनुवादकों ने न केवल शब्दों का सही चयन किया, बल्कि सांस्कृतिक संदर्भों का भी विशेष ध्यान रखा ताकि भाषणों का मूल भाव पूरी तरह से बरकरार रहे। कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने इस अनुभव को बेहद शिक्षाप्रद और समृद्ध बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं गोड़ी भाषा की शब्दावली को और समृद्ध करती हैं और भाषा की विकास यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ती हैं। इस अवसर पर गोड़ी भाषा में अनुवादित भाषणों की रिकॉर्डिंग को भी प्रदर्शित किया गया, जिसे प्रतिभागियों ने बेहद सराहा। आयोजनकर्ताओं ने बताया कि इन रिकॉर्डिंग्स को जल्द ही व्यापक स्तर पर जारी किया जाएगा, ताकि गोड़ी भाषा के समुदाय के लोग इन महत्वपूर्ण संदेशों से सीधे जुड़ सकें। कार्यशाला का समापन समारोह भी बेहद खास रहा, जहां प्रतिभागियों को उनकी मेहनत और योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने इस तरह की और भी कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि गोड़ी भाषा का विकास और प्रसार होता रहे। इस 10 दिवसीय अनुवाद कार्यशाला ने न केवल एक नई दिशा दी, बल्कि भाषाई विविधता और संस्कृति के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी प्रकट किया।

















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