• शाखाएं बदल जाती लेकिन स्थानांतरण नही होता, कर्मचारियों की मिलीभगत से कई घोटालों की आशंका।
सुसनेर नगर में स्थानीय नगर परिषद में अधिकांश अधिकारी एवं कर्मचारी कई सालों से अंगद के पैर की तरह जम गए है। जिसके चलते कई घोटालो की आशंका भी जाहिर की जा रही है। जानकारी के अनुसार नगर परिषद कार्यालय में दो दर्जन कर्मचारियों का स्टाफ है जिसमे से सीएमओ एवं कुछ एक कर्मचारियों को ही छोड़कर बाकी सभी कर्मचारी स्थानीय होकर काफी लंबे समय से कार्यालय में जमे हुए है। सत्ता भले ही किसी भी दल की रहो इन कर्मचारियों की पकड़ इतनी गहरी है कि इनकी सिर्फ शाखा बदलती है कभी इनका स्थानांतरण नही होता है। और यही वजह है कि इन कर्मचारियों की मिलीभगत से कई बड़े-बड़े घोटाले होने की आशंकाएं भी जाहिर की जा रही हैं। जिसमे से कई घोटाले तो उजागर भी हुए है तो एक घोटाला लोकायुक्त भी पहुँच गया है। लेकिन इन कर्मचारियों का बाल भी बाका नही हो सका है। जिसके चलते नगर परिषद घोटालो का अड्डा बन गई है। इन कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद है कि नगर परिषद में कोई भी बड़ा कार्य बिना लेनदेन के आसानी से नही हो सकता है।
लोकायुक्त तक पहुँच चुका है ई रिक्शा घोटाला
नगर परिषद में चल रही अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला लोकायुक्त एवं आर्थिक अपराध अनुसंधान केंद्र तक पहुँच चुका है। नगर के पत्रकार व कांग्रेस ब्लॉक महामंत्री दीपक राठौर ने पूर्व में लोकायुक्त, आर्थिक अपराध अनुसंधान केंद्र एवं लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक को प्रामाणिक दस्तावेजो के साथ लिखित शिकायत भी की थी। जिसमे बताया था कि स्वच्छता मिशन शहरी योजनांतर्गत चार गुना कीमत पर 5 ई रिक्शा खरीदे गए है। जिसमे करीब 18 लाख रुपए का भ्रष्टाचार किया गया है। नगर परिषद द्वारा 1 लाख 20 हजार रुपये की कीमत का ई रिक्शा 4 लाख 81 हजार 200 रुपये में खरीदा गया। कांग्रेस पार्षदों द्वारा जिला कलेक्टर व सांसद से भी इसकीं शिकायत की गई थी। जिसमें प्रशासन ने 3 सदस्यीय जांच दल का गठन भी किया था।
मड पम्प और फायर वाहन के नाम पर डीजल का फर्जी भुगतान
नगर परिषद द्वारा मड पम्प और फायर वाहन जो कभी कभार ही उपयोग होते है उनमें प्रति सप्ताह 20 से 30 लीटर डीजल भरवाया जाना बताकर भुगतान होने का भी खुलासा किया गया था। जबकि मड पम्प के उपयोग के लिए आम नागरिक को 2 हजार रुपये का शुल्क तय है। मड पम्प का कितनी बार उपयोग हुआ और इतना डीजल कहा गया अगर इसकीं जांच होतो काफी सत्यता सामने आ सकती थी।
दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को कर दिया था ज्यादा भुगतान
स्वच्छता अभियान पखवाड़े के तहत प्रस्ताव क्रमांक 7 दिनांक 24 नवम्बर 2011 के परिपालन में 27 कर्मचारियों को 125 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से दैनिक वेतनभोगी के रूप में नियुक्त किया गया था जिनको 7200 रुपए प्रतिमाह वेतन का भुगतान कर बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान करने का मामला भी सामने आ चुका है। वही वर्ष 2022-23 व 2023-24 की स्टॉक पंजी भी अधिकारी के बिना हस्ताक्षर संचालन होने की बात उजागर हुई थी।
तीन गुना कीमत में खरीदी गई थीं कचरा गाड़िया।
नगर परिषद में नगर की सफाई के लिए दो पहिया हाथ कचरा गाड़ीया 9000 रुपए प्रति गाड़ी की दर से 44 गाड़ियां जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी जाने की जानकारी भी उजागर हुई थी। जिनकी बाजार कीमत 3000 रुपए है। इस तरह तीन गुना राशि पर गाड़िया खरीदकर बड़ी मात्रा में भ्रष्टाचार करने एवं एलईडी लेम्प व चोक भी तीन से चार गुना कीमत पर खरीदे जाने का मामला सामने आ चुका है।
दुकान की नीलामी में भी किया आर्थिक नुकसान पहुँचाने प्रयास
इंदिरा गांधी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के पास स्थित नव निर्मित दुकान नम्बर 2 की नीलामी प्रथम ई-निविदा ऑफर में प्राप्त दर राशि रू. 28.10 लाख थी जिसको निरस्त कर दिया गया। तृतीय ई निविदा ऑफर में प्राप्त दर राशि रू. 23.75 लाख में हुई। इस प्रकार कर्मचारियों द्वारा वापस से नीलामी कर नगर परिषद को आर्थिक नुकसान पहुचाने का प्रयास किया गया था। नगर परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी राहुल सिसोदिया द्वारा संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग उज्जैन संभाग के नाम लिखे गए पत्र को सार्वजनिक कर बताया गया कि मेरे द्वारा मुख्य नगरपालिका अधिकारी को निर्देशित किया गया था कि पूर्व में प्रथम ई-निविदा ऑफर में प्राप्त दर राशि रू. 28.10 लाख थी जिसको परिषद द्वारा निरस्त कर दी गई थी तृतीय ई निविदा में जो दर प्राप्त हुई उसका मेरे द्वारा परिषद में विरोध भी किया गया।
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