सवांददाता नरसीराम शर्मा बीकानेर श्रीडूंगरगढ
श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर) के अनंतनाग में तैनात बीकानेर के जवान की मौत का मामला शांत नहीं हुआ है। जवान का परिवार और ग्रामीण गुरुवार दोपहर 12.30 बजे से लेकर अब तक बीकानेर-जयपुर नेशनल हाईवे पर धरना लगाकर बैठे हैं। परिजन जवान को शहीद का दर्जा देने और जिला सैनिक अधिकारी पर कार्रवाई की मांग पर अड़ा है। वहीं प्रशासन परिजनों की इस मांग को पूरा करवाने में खुद को अक्षम बता रहा है। जवान की मौत के तीसरे दिन भी अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। बता दें कि बीकानेर के पांचू में रहने वाले जवान रामस्वरूप कस्वां (24) की 25 सितम्बर को अनंतनाग में गोली लगने से मौत हुई थी। प्रारंभिक तौर पर सामने आया था कि ऑन ड्यूटी फायरिंग के दौरान जान गई, जिसे बाद में आत्महत्या बताया गया। परिजनों का मानना है कि जवान की मौत ऑन ड्यूटी हुई है, ऐसे में उसे शहीद का दर्जा मिलना चाहिए। वहीं, वहीं जिला सैनिक अधिकारी ने इसे फिजिकल कैजुएल्टी बताते हुए शहीद मानने से मना कर दिया है। इसके बाद से दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया है। आंदोलन कर रहे जवान के परिजन और ग्रामीण लगातार जिला सैनिक अधिकारी की ओर से दिए गए उस पत्र का विरोध कर रहे हैं, जिसमें मौत को सुसाइड बताया गया है।
नेशनल हाइवे जाम
पिछले 20 घंटे से ज्यादा से बीकानेर-जयपुर के नेशनल हाइवे नंबर
11 पर जाम है। आंदोलकारी रातभर जाम लगाए बैठे रहे। उनके साथ पुलिस अधिकारी भी तैनात रहे। नेशनल हाइवे जाम होने से शहर के अन्य मार्ग प्रभावित हुए हैं। बस और ट्रक जयनारायण व्यास कॉलोनी और सार्दुल कॉलोनी से होकर निकल रहे हैं। उधर, छोटे वाहनों को पब्लिक पार्क के अंदर से निकाला जा रहा है। स्कूल बस और ऑटो को भी आज सुबह परेशानी का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस नेता बोले- पहले भी हो चुका ऐसा
कांग्रेस नेता शिवलाल गोदारा का कहना है कि- ये पहला अवसर नहीं है जब किसान के बेटे के शहीद होने पर उसे शहीद घोषित नहीं किया गया। इससे पहले हमारे जवानों के साथ ऐसा ही हुआ था। अब रामस्वरूप कस्वां चौथा जवान है, जिसे तुरंत शहीद घोषित करने के बजाय कार्रवाई में रखा जा रहा है। जो बॉर्डर पर लड़ रहा है, उसके साथ ऐसा क्यों होता है? धरने पर बैठकर शहीद का दर्जा दिलाना उन्हें अपमानित करने जैसा है। उन्होंने कहा कि यहां जिला मुख्यालय होने के नाते बड़े-बड़े प्रशासनिक अधिकारी बैठते हैं, वो सीएम से बात नहीं कर सकते ? सीएम केन्द्र सरकार के मंत्री से बात नहीं कर सकते? कर सकते है, लेकिन सभी ने मामले को हल्के में ले लिया। गोदारा ने कहा कि जवान को शहीद का दर्ज दिलवाने के लिए हमें चाहे किसी भी स्तर पर लड़ाई लडनी पड़े, उसको लड़ने के लिए तैयार हैं।
नेशनल हाईवे का रूट डायवर्ट किया
नेशनल हाईवे- 11 (बीकानेर-जयपुर) पर गुरुवार दोपहर 12.30 से परिवार व अन्य लोग बैठे हुए हैं। नेशनल हाइवे जाम होने से बीकानेर शहर के अन्य मार्ग प्रभावित हुए हैं। बस और ट्रक जयनारायण व्यास कॉलोनी और सार्दुल कॉलोनी से होकर निकल रहे हैं। उधर, छोटे वाहनों को पब्लिक पार्क के अंदर से निकाला जा रहा है। स्कूल बस और ऑटो को भी आज सुबह परेशानी का सामना करना पड़ा। धरने पर आज नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल और चूरू सांसद राहुल कस्वां के पहुंचने की संभावना है। पहले शहीद की तरह अंतिम संस्कार की तैयारी पांचू के पूर्व प्रधान भंवरलाल ने कहा कि प्रशासन ने पहले जवान को शहीद बताया था। उसी तरह गुरुवार सुबह तक अंतिम संस्कार की तैयारी की गई थी। एसडीएम और तहसीलदार खुद मौके पर आए थे। अंतिम संस्कार के लिए जगह देख रहे थे। गांव में एक जगह फाइनल भी की गई थी। शाम को जब जिला सैनिक अधिकारी ने सुसाइड का पत्र जारी किया तो सारी पिक्चर ही उलट गई। इससे समाज की गरीमा को ठेस पहुंची है। ग्रामीण और परिजनों को सेना के अधिकारियों ने वार्ता के लिए बुलाया था लेकिन उनसे मिलने कोई नहीं गया। जिला प्रशासन ने भी दोनों पक्षों में वार्ता का प्रयास किया लेकिन सहमति नहीं हो सकी। इसके बाद गुरुवार देर शाम जिला कलेक्टर के साथ प्रतिनिधि मंडल की वार्ता हुई लेकिन इसमें सहमति नहीं बन पाई। अब शुक्रवार को फिर से सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत का प्रयास हो सकता है।
भाई बोला- उसे डिप्रेशन नहीं था
जवान के भाई सैन्यकर्मी श्रीराम कस्वां ने मीडिया बातचीत में बताया- 25 सितम्बर को सुबह 8.26 बजकर रामस्वरूप (जवान) ने पिता और मेरी बेटी से बात की थी। उसकी बातों से कोई डिप्रेशन नहीं दिखा। 10 मिनट लगातार बात की थी। इसके बाद मेरे पास फोन आया था लेकिन ड्यूटी पर होने के कारण बात नहीं हो पाई। इसके बाद 9.10 बजे मेरी बात हुई है। तब उसने बोला था- आप कैसे हो भाई। मैंने बोला, मैं ठीक हूं तू कैसा है रामस्वरूप। उसने कहा था- मैं ठीक हूं भाई। रात के करीब एक बजे मेरे पास सूचना आई

















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