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गौशाला में भूख से मरते गौवंश, तो वही विकास कार्यों में हुई जमकर धांधली

संवाददाता: करनेश सिंह पुरवा उन्नाव

गौशाला में भूख से मरते गौवंश, तो वही विकास कार्यों में हुई जमकर धांधली

पुरवा उन्नाव! पूरा मामला पुरवा ब्लाक की ग्राम पंचायत अडंगाव पासाखेड़ा का है, जहां गौशाला में गौवंश भूख और प्यास से दम तोड़ते हुए मार रहे हैं, गौवंशो के लिए ना तो चारे की व्यवस्था है, ना ही पानी की, किस तरह से इन बेजुबानों को अपना जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है, जिन्हें तस्वीरों में सांफ देखा जा सकता है, राम के राज्य में गौवंशों की ऐसी दुर्दशा होगी शायद ही किसी ने सोचा होगा, हर महीने इन गौवंशों के चारे की व्यवस्था के लिए सरकार की तरफ से अच्छा खासा बजट आता है, मगर वह प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी के हाथों भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है, इसी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में भी जमकर धांधली हुई है, जिसमें लाखों रुपये की हेरा फेरी का मामला सामने आया है, लेकिन धरातल पर एक भी काम हुआ ही नहीं है, प्रधान और सचिव ने मिलकर जमकर बंदरबांट किया है, किस-किस काम पर फर्जी तरीके से रुपया निकल गया है,जो कि गौशाला में टीनसेट के नाम पर, केयरटेकर का फर्जी तरीके से भुगतान, पंचायत भवन मेंटिनेंस कार्य में, और कुछ अन्य कार्यों को मिलाकर ग्राम पंचायत के विकास के नाम पर लाखों रुपये का गमन हुआ है, जबकि धरातल पर एक भी कार्य समुचित तरीके से नहीं हुआ है,

प्रदेश सरकार की इतनी महत्वाकांक्षी योजनाओं में इतनी बड़ी ग्राम पंचायत से इस कदर भ्रष्टाचार होना, सरकार की आंखों में धूल झोंकने जैसा है, आखिर लाखों रुपए का फर्जी तरीके से भुगतान कैसे हो गया, यह धनराशि 2021 से 2024 के बीच में निकाली गई, जिसमें एक ही कार्य को कई बार दिखाकर बिल वाउचर पास भी हो गया, एक ओर जहां सुबे के मुखिया भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की बात करते हैं तो वहीं दूसरी ओर प्रधान और सचिवों का भी बंदर बाट करने में कोई जोड़ नहीं है, सूत्रों की माने तो ग्रामीण हुए विकास कार्यों की जांच की मंशा रखते हैं, ऐसे में उच्च स्तरीय जांच होना स्वाभाविक है, फिलहाल पूरे मामले में क्या कार्रवाई होती है, यह तो समय पर ही निर्भर है!

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