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बीकानेर-सेवा करने के लिए जेब नहीं, दिल बड़ा होना चाहिए, 15 दिनों के लिए डॉ एपीजे अब्दुल कलाम वेलफेयर ट्रस्ट को प्रदान कर दी निजी एम्बुलेंस, किया सम्मान जताया आभार

सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ

सेवा भाव मानव जीवन का अनमोल रत्न है। इसकी उत्पति मनुष्य में जन्मजात होती है। व्यक्ति बचपन से ही अपने बुजुर्गो के पद चिह्नों पर चलते हुए अपने अंदर सेवा भाव की जड़ें मजबूत करता है। सेवा एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही सुखद अनुभूति का एहसास होता है। प्रत्येक मनुष्य चाहें वह अपने किसी धर्म को मानने वाला हो अपने आराध्य के प्रति तन-मन और कर्म से संपूर्ण समर्पित होकर सेवा करता है। ताकि उसका वर्तमान और भविष्य ईश्वर के इर्द-गिर्द अपने आराध्य के सानिध्य में संचालित होता है। सेवा भाव में मनुष्य महान बन जाता है। सेवा करने के लिए जेब नहीं, दिल बड़ा होना चाहिए… इसका उदाहरण पेश किया हैं। कस्बे के कालूबास निवासी गोरधन जाट पुत्र गणपत राम जाट ने दिया है। क्षेत्र में आपातकालीन सेवाएं दे रही नवगठित डॉ एपीजे अब्दुल कलाम वेलफेयर ट्रस्ट की एम्बुलैंस आज से 15 दिन पहले तकनीकी दिक्कतों के कारण खराब हो गई थी। संस्था के सदस्यों ने बताया कि ऐसे में आपातकालीन सेवाओं में आ रही बाधाओं को देखते हुए उन्होंने गोरधन जाट भाई को एक कॉल किया और एम्बुलेंस की मांग की गोरधन ने बिना कुछ सोचे तुरन्त एम्बुलेंस के लिए हां भर दी। वो भी निःशुल्क एपीजे टीम ने बताया कि गोरधन भाई एक गरीब परिवार से आते है। और एम्बुलेंस ही एकमात्र सहारा है। ऐसी परिस्थिति में भी निजी एम्बुलेंस निःशुल्क देना बहुत बड़ी बात है। शनिवार शाम को सोसायटी की एम्बुलैंस सही होकर आ गई तो सोसायटी द्वारा गोरधान को उसकी एम्बुलैंस लौटा दी गई एवं इस मौके पर एपीजे अब्दुल कलाम ट्रस्ट द्वारा उनका सम्मान करते हुए आभार जताया

 

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