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हाथियों के आतंक से आमजनों में दहशत का माहौल,आमजनों को नहीं मिल पा रहा है समय से मौजा राशि,

हाथियों के आतंक से आमजनों में दहशत का माहौल,आमजनों को नहीं मिल पा रहा है समय से मौजा राशि,

शासन कि घोषणाएं सिर्फ और सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।जमीनी हकीकत तो आखिर कुछ और ही हैं।

न्यूज एडिटर सूरज यादव

गौरेला पेंड्रा मरवाही: छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में खास तौर पे हम बात करें मरवाही विकास खण्ड के आम जनों कि तो आए दिन लग–भग दो–तीन सालों से हाथियों के आतंक से आम जनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। साथ ही उसका खामियाजा भी भुगतना पढ़ता हैं।यहां के लोगों को जान का खतरा हाथी के आतंक से हमेशा बना रहता हैं,यहां के आम जन अपना जीवन यापन जान जोखिम में डालकर कर रहें हैं।छत्तीसगढ़ राज्य का एक ऐसा जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही हैं,जिसमें मरवाही विकास खण्ड जो कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में से एक हैं,यहाँ कभी किसी किसान भाई को अपनी फसल का नुकसान होते देखना मजबूरी होता हैं,तो कभी अपने परिवार के किसी सदस्य का हाथी के चपेट में आकर जान गवाते देखना एक बेबसी होता हैं।हाथी के आतंक से आम जनों के फसलों के नुकसान और आमजनों के घरों के क्षतिग्रस्त होने का मौजा राशि तो छत्तीसगढ़ शासन और वनविभाग के द्वारा मुहैया कराने को घोषणा सिर्फ और सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। जमीनी हकीकत तो आखिर कुछ और ही हैं।

मरवाही विकास खण्ड कि हम बात करें तो यहां अभी बीते दिन कई गरीब किसान भाईयों को अपने घरों से बेघर होना पड़ा हैं।और अपने फसलों के नुकसान का खामियाजा भी भुगतना पड़ा हैं।इतना कुछ हो जाने के बाद भी मरवाही वनविभाग अभी तक अपने गहरी निद्रा से नहीं उठा हैं,किसान भाइयों को आए दिन हाथी का डर बना रहता हैं।वहीं देखा जाए तो एक तरफ छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी कि सरकार विकसित भारत की बड़ी–बड़ी बातें कर रहीं हैं,तो वहीं एक तरफ़ मरवाही विधानसभा के आमजनों को लगातार परेशानियों से होकर गुजरना पड़ता हैं। हाथी के आतंक से मरवाही कि जनता कि आवाज आखिर कौन सुनेगा,क्या मरवाही विधानसभा कि आवाज दबी रहेगी। या छत्तीसगढ़ सरकार आमजनों के समस्याओं को लेकर कोई योजना निकालेगी।

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