सवांददाता मीडिया प्रभारी मनोज मूंधड़ा बीकानेर श्रीडूंगरगढ़
शक्ति को भौतिक सुख से आध्यात्मिक दर्शन तक सारे लाभ मिलते हैं सप्त चक्र से : कालवा
श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की ओम योग सेवा संस्था के निदेशक योगाचार्य ओम प्रकाश कालवा ने सत्यार्थ न्यूज चैनल पर 63 वां अंक प्रकाशित करते हुए बताया। योग शास्त्र में बताया गया है कि मनुष्य के शरीर में 7 मुख्य चक्र हैं जिनका नाम- मूलाधार चक्र,स्वाधिष्ठान चक्र,मणिपुर चक्र,अनाहत चक्र,विशुद्ध चक्र,आज्ञा चक्र,सहस्त्रार चक्र है। यह सभी चक्र हमारे विचारों, भावनाओं, स्मृतियों, अनुभवों और कर्मों के कारक हैं।
मूलाधार से सहस्रार चक्र तक मानव शरीर में हैं सात चक्र
शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करके जगाया जाता है शक्ति को भौतिक सुख से आध्यात्मिक दर्शन तक सारे लाभ मिलने हैं इनसे
चक्र जगाने की विधि :
मनुष्य तब तक पशुवत है,जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है इसीलिए भोग,निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना। गहरी साँस लें और हृदय चक्र पर ध्यान केंद्रित करें जो हृदय की उसी स्थिति में स्थित है। ऐसा करते हुए,विश्राम,आनंद और प्रेम की भावना के साथ बार-बार “यम” ध्वनि का जाप करें। ध्यान के दौरान, आप कल्पना कर सकते हैं कि प्रत्येक जाप के साथ पन्ना हरा प्रकाश अधिक चमकीला और मजबूत होता जा रहा है।भीतर बसे हैं रंग इतना तो दुनिया जानती है कि सात रंग से अन्य दूसरे रंग बनते हैं। लाल मूलाधार का रंग।नारंगी स्वाधिष्ठान चक्र का रंग। पीला मणिपुर चक्र जो कि नाभि पर होता है, का रंग है पीला। हरा यह रंग अनाहत चक्र यानी हृदय से जुड़ा है। नीला ज़िंदगी सबसे ज़्यादा रंगीन तब लगती है जब यार-दोस्त साथ होते हैं।बैगनी सुनहरा
निवेदन
-ओम योग सेवा संस्था श्री डूंगरगढ़ द्वारा जनहित में जारी।



















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