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सुसनेर – जैन मंदिर में समाज जन विधान के अंतिम दिन जिनालय भक्ति रस में सराबोर रहे

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सत्यार्थ न्यूज़
मनोज कुमार माली सुसनेर

जैन मंदिर में समाज जन विधान के अंतिम दिन जिनालय भक्ति रस में सराबोर रहे

सुसनेर। नगर के इंदौर कोटा मार्ग पर स्थित श्री त्रिमूर्ति दिगम्बर जैन मंदिर में सिद्ध चक्र महा मण्डल विधान के आठवें दिन जिनालय भक्ति में सराबोर रहा। स्थानीय जैन समाजजन भक्ति में भजनों पर नाचते झूमते रहे एवं भक्ति आराधना में मग्न रहे। स्मरण रहे कि स्थानीय दिगंबर जैन त्रिमूर्ति मंदिर सुसनेर पर विगत 13 जुलाई से सोमवार 22 जुलाई तक श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान आयोजन चल रहा है। सोमवार को विधान के आठवें दिन में आर्यका श्री पूर्णमति माताजी द्वारा लिखित सिद्ध चक्र विधान के आठवें दिन 1024 अर्घ समर्पित किया गया। तथा अंतिम दिन नित्य नियम पूजा के साथ हवन किया गया। समापन अवसर पर विधान आचार्य खुमानसिंह उज्जैन एवं नगर के संगीतकार ललित सांवला, दीपक जैन, विजय जैन, कुलदीप चौधरी का सम्मान भी किया गया।
सौधर्म इंद्र अनिल जैन पिता सोहनलाल जैन एवं उनके परिजनों ने शांतिनाथ भगवान को पांडुकशिला पर विराजमान किया। श्री जी को पाण्डुशिला पर विराजमान कर सभी इंद्रोें ने भक्ति की।
विधान के अंतिम दिन मंगलाष्टक का पाठ किया
सिद्धचक्र महामंडल विधान समस्त सिद्ध समूह की आराधना मंडल की साक्षी में की जाती है। जो हमारे समस्त मनोरथों को पूर्ण करती है। इस अवसर पर पण्डित खुमानसिंह ने कहा कि जैन दर्शन में अष्टनिका महापर्व का विशेष महत्व बतलाया गया है। इस अवसर पर देव लोग भी नंदीश्वर दीप में आकर सिद्ध भगवान की आराधना करते हैं।
चित्र 1 : सिद्धचक्र विधान के अंतिम दिन भक्ति में डूबे जैन समाजजन।
चित्र 2 : सुसनेर के संगीतकार ललित सांवला का सम्मान करते हुए।

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