म्हारी छोरिया छोरो से कम है के
प्रज्ञा ने अर्जित किया स्वर्ण पदक
निवास स्थान पर ग्रामवासियों ने बिछाए पलक पांवड़े
बेटियो को आजादी दे तो वो भी भर सकती है उड़ान : प्रज्ञा प्रजापति
रिपोर्ट कालीचरण सैनी।
फुलेरा : परिंदो को मिलती है मंजिले यकीनन, फैले हुए उनके ये पर बोलते है, प्राय खामोश ही रहते है वो चेहरे जमाने में जिनके हुनर बोलते है…जी हां उक्त पंक्तियां सटीक चरितार्थ बैठती है फुलेरा क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पीपली का बास में रहने वाली प्रजापति परिवार की होनहार लाडो प्रज्ञा प्रजाति पर। प्रज्ञा को राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र के द्वारा राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में आयोजित 33 वे दीक्षांत समारोह में राजस्थान यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ एजुकेशन ( विशेष शिक्षा ) में टॉपर रहने पर स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। प्रज्ञा ने बताया की पूर्ण लगन, निष्ठा, ईमानदारी आत्मविश्वास के साथ अगर हमेशा सटीक मार्गदर्शन मिले और नियमित रूप से मेहनत करे तो राह खुद ब खुद आसान हो जाती है। व्यक्ति को खुद से कभी हार नही माननी चाहिए और हमेशा अपने लक्ष्य के प्रति प्रयासरत रहना चाहिए। प्रज्ञा की प्रारंभिक शिक्षा टोंक और उच्च शिक्षा राजधानी जयपुर में हुई। वर्तमान में प्रज्ञा जोधपुर जिले के बिलाड़ा क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुरिया में सरकारी शिक्षिका के तौर पर कार्यरत है। 24 वर्षीय प्रज्ञा ने बताया की मेरे माता पिता ने हमेशा मुझे हर कदम पर सहयोग किया, अगर बेटियो को आजादी दी जाए तो वो उड़ान भरने का हौंसला रखती है ,मेरा जेसे ही 2023 में शिक्षक भर्ती परीक्षा में चयन हुआ तो फिर मेने कभी पीछे मुड़कर नही देखा। प्रज्ञा की इस अपार सफलता पर उसको और उसके माता पिता को बधाई देने वालो का तांता लगा हुआ है। दीक्षांत समारोह से जब प्रज्ञा अपने निवास स्थान फुलेरा पहुंची तो ग्राम वासियों ने पलक पांवड़े बिछाकर लाडो का अभिनंदन किया। गौरतलब है की प्रज्ञा मध्यम वर्गीय परिवार से है और उसकी माता मिश्री देवी गृहिणी है और पिता राजेंद्र कुमार प्रजापति पेशे से निजी चिकित्सक है। प्रज्ञा के पिता डॉक्टर राजेंद्र प्रजापति ने कहा की म्हारी छोरियां छोरो से कम थोड़ी है। आज मुझे फक्र हो रहा है की में एक बेटी का पिता हु, सभी को अपनी बेटियो को उनकी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने के लिए समुचित अवसर प्रदान करने चाहिए। प्रज्ञा का अंतिम लक्ष्य राजस्थान प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज सेवा करना है, इस हेतु अभी से प्रयासरत है।


















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