व्यापारी भर रहे सरकार का खजाना, समस्याओं पर नहीं कोई ध्यान देने वाला
बड़ौत। वोटों के लिए नेताओं ने व्यापारियों के पास पहुंचना शुरू कर दिया है। चुनाव में ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। पहले भी चुनाव में नेता उनके दरवाजे पर पहुंचते रहे है। हर बार व्यापारी अपनी समस्याएं रखते है और उनके समाधान का आश्वासन भी मिलता है लेकिन आज तक समस्याएं बनी हुई हैं। यह तब है, जब यहां का व्यापारी प्रतिमाह करीब 30 से 40 करोड़ रुपये जीएसटी देकर सरकार का खजाना भरता है। बाजार में एक पार्किंग तक नहीं है और बिजली की समस्या का भी समाधान नहीं हुआ है। बातचीत में व्यापारियों ने तमाम समस्याएं सामने रखीं।
110 से अधिक हैं रिम-धुरे की फैक्टरी, विदेशों तक सप्लाई
जिले में रिम धुरे की तकरीबन 110 फैक्टरियां है, जिनमें पांच हजार से ज्यादा लोग काम करते हैं। इन फैक्टरियों में कृषि संबंधी वाहनों बुग्गियों, ट्रालियों आदि में प्रयोग होने वाले रिम व धुरे बनते हैं। इनकी गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, यूपी, छत्तीसगढ़, बिहार समेत अन्य राज्यों के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत अन्य कई देशों में भी सप्लाई होती है। यह जिले का सबसे पुराना उद्योग है और इन रिम धुरे के नाम से बड़ौत की हर जगह पहचान है।
जिले में सबसे बड़ा बड़ौत का बाजार, पार्किंग बड़ी समस्या
जिला मुख्यालय भले ही बागपत हो, मगर जिले में सबसे बड़ा बाजार भी बड़ौत है। वहां सराफा वाली गली में सबसे ज्यादा ज्वैलर्स हैं तो कपड़ों का बड़ा बाजार है। वाहनों के शोरूम से लेकर अधिकतर उत्पाद के लिए लोगों को वहां जाना पड़ता है। मगर वहां पार्किंग की सबसे बड़ी समस्या है। बाजार में कोई वाहन लेकर नहीं जा सकता है और अगर कोई जाता है तो वह घंटों तक जाम में फंस जाता है। इससे लोगों को काफी दूर तक पैदल जाना पड़ता है और इस समस्या को कोई समाधान नहीं करा रहा।
व्यापारियों की समस्याओं का समाधान कराए भावी सांसद
कर का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। व्यापार को बढ़ावा देने या बाजारों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते हैं। चुनाव दर चुनाव गुजरते रहतेे हैं, परंतु बाजारों में समस्याएं दशकों से जस की तस बनी हैं। इसलिए ऐसा सांसद होना चाहिए जो हमारे लिए पैरवी कर सके और व्यापारियों की समस्याओं का आसानी से समाधान करा सके। – योगेश जिंदल, कनवीनर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
पार्किंग की समस्या का समाधान होना जरूरी
यहां रिम-धुरे उद्योग के अलावा कपड़ा, बर्तन, वाहनों के शोरूम समेत अन्य प्रमुख कारोबार है। व्यापारी वर्ग करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की जीएसटी सरकार को देता है। इसके बावजूद यहां सुविधा के नाम पर पार्किंग तक नहीं है। व्यापारी बदतर हालातों में कारोबार करने को मजबूर हैं। राजनीतिक दलों की बाजार पर नजर नहीं है और स्थानीय नेता बाजार की समस्याओं से कन्नी काटे हुए हैं। पार्किंग की समस्या का सबसे पहले समाधान हो। – संदीप गर्ग, व्यापारी
व्यापारियों को मिले आर्थिक पैकेज
देश में रिकार्ड तोड़ जीएसटी संग्रह के बावजूद व्यापारियों को जीएसटी में कोई छूट नहीं दी गई है। साथ ही सरकार को व्यापारियों के हित में आर्थिक पैकेज देने के लिए कोई योजना चलानी चाहिए। व्यापारियों के लिए बैंकों से कम ब्याज पर लोन की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। – मुदित जैन, अध्यक्ष उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल
अघोषित विद्युत कटौती बंद हो
यहां बिजली की अघोषित कटौती से परेशानी होती है तो बिजली बिलों में फिक्स चार्ज खत्म होना चाहिए। व्यापारी वर्ग से वसूला जाने वाला शॉप एक्ट, फूड एक्ट, लेबर एक्ट, मार्केटिंग बोर्ड आदि से व्यापारी वर्ग बहुत चिंतित है। व्यापारियों पर बढ़ते जा रहे इस बोझ को कम करना होगा। – नवनीत जैन, व्यापारी
लाइसेंस के लिए नहीं उठानी पड़े परेशानी
व्यापार करने के लिए संबंधित लाइसेंस के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। दुकानदारों को प्राथमिकता के आधार पर लाइसेंस जारी किए जाएं। साथ ही सरकार व्यापारियों के लिए कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराए। इसके अतिरिक्त जीएसटी पर भी छूट मिलनी चाहिए। – रिंकू जैन, व्यापारी
पार्किंग नहीं होने से अतिक्रमण बड़ी समस्या
किसी भी जगह पार्किंग नहीं होने से वाहनों को सड़कों पर खड़ा कर दिया जाता है। पार्किंग स्थलों के अभाव में बाजारों में बड़ी समस्या है। विभिन्न पार्टियों के प्रत्याशियों को स्थानीय स्तर पर घोषणा पत्र जारी करना चाहिए। जिसमें वह बताएं कि व्यापारी व कारोबार के हित में क्या काम करेंगे? अनिल जैन, व्यापारी
बागपत सत्यार्थ न्यूज संवाददाता अभिषेक शर्मा

















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