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72 घंटे में सुलझी मरवाही-(उषाढ़) किडनैपिंग की गुत्थी: फर्जी पुलिस बनकर उठाने वाले 3 अंतरराज्यीय बदमाश गिरफ्तार, कारोबारी सकुशल बरामद,

72 घंटे में सुलझी मरवाही-(उषाढ़) किडनैपिंग की गुत्थी: फर्जी पुलिस बनकर उठाने वाले 3 अंतरराज्यीय बदमाश गिरफ्तार, कारोबारी सकुशल बरामद,

सूरज यादव,गौरेला पेंड्रा मरवाही। छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश सीमा से लगे मरवाही थाना क्षेत्र में 20 जून को दिनदहाड़े हुए किराना कारोबारी के सनसनीखेज अपहरण का पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। गौरेला पेंड्रा मरवाही पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ऑपरेशन को अंजाम देते हुए अपहृत कारोबारी गिरीश यादव को सकुशल बरामद कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी पुलिस बनकर वारदात को अंजाम दे रहे थे। आरोपियों के कब्जे से पिस्टल, जिंदा कारतूस और नीली बत्ती लगी फर्जी पुलिस की स्कॉर्पियो भी बरामद की गई है। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में पुलिस की कार्रवाई की सराहना हो रही है।

घटना 20 जून 2026 की सुबह करीब 11 बजे की है, जब उषाढ़ गांव के रहने वाले 41 वर्षीय किराना व्यवसायी गिरीश यादव अपने घर के सामने खड़े थे। तभी एक नीली बलेनो कार वहां आकर रुकी और उसमें से दो हथियारबंद युवक उतरे। बदमाशों ने गिरीश को पिस्टल दिखाकर धमकाया और जबरन कार में ठूंसकर फरार हो गए। इस दौरान घर के बाहर मौजूद परिजनों ने बीच-बचाव की कोशिश की और शोर मचाया, लेकिन बेखौफ बदमाश अर्धनग्न अवस्था में ही गिरीश को उठाकर ले गए। यह पूरी सनसनीखेज वारदात घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, जिसका फुटेज बाद में वायरल भी हुआ।

अपहरण के बाद बदमाशों ने गिरीश यादव के घर में छूटे मोबाइल फोन पर कॉल किया और उसे छोड़ने के एवज में 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी। कॉल पर धमकी दी गई कि अगर रकम नहीं दी गई तो गिरीश की हत्या कर दी जाएगी। पीड़ित की पत्नी की शिकायत पर मरवाही थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 333, 140(3), 351(3), 3(5) और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के मार्गदर्शन और पुलिस अधीक्षक जीपीएम मनोज खिलारी के निर्देशन में तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में जिला साइबर सेल और मरवाही थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान फिरौती के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर का सीडीआर और टावर लोकेशन निकाला गया। साथ ही सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की गई। पुलिस को पता चला कि आरोपी अंतरराज्यीय गैंग से जुड़े हैं और लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे हैं।

सटीक लोकेशन मिलने के बाद पुलिस ने एक साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में दबिश दी। लगातार 72 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में पुलिस को बड़ी सफलता मिली और अपहृत गिरीश यादव को सकुशल बरामद कर लिया गया। मौके से तीन अपहरणकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान पुंडलिक केंद्रे उम्र 37 वर्ष निवासी उमरगा, थाना जलकोट, जिला लातूर महाराष्ट्र, चंद्रशेखर उम्र 30 वर्ष निवासी बाशनी जोधपुर, जिला जोधपुर राजस्थान और शेषपाल सिंह यादव उम्र 30 वर्ष निवासी नगला भिक्की, थाना एंका, जिला फिरोजाबाद उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। पूछताछ और तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से एक पिस्टल, 6 जिंदा कारतूस और 6 एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बदमाश एक स्कॉर्पियो-एन वाहन का इस्तेमाल कर रहे थे, जिस पर नीली बत्ती और पुलिस लिखी हुई फर्जी नेमप्लेट लगी थी। आशंका है कि आरोपी इसी गाड़ी का इस्तेमाल कर खुद को पुलिसकर्मी बताकर लोगों को डराते और वारदात को अंजाम देते थे।

तीनों आरोपियों को आज मरवाही न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उन्हें रिमांड पर लिया है। पुलिस अधीक्षक मनोज खिलारी ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई तकनीकी साक्ष्यों और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय का नतीजा है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है, जिससे इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा की गई दूसरी वारदातों का भी खुलासा होने की उम्मीद है। फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील ऑपरेशन को सफल बनाने में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अविनाश कुमार मिश्रा, एसडीओपी मरवाही राजेश देवांगन, निरीक्षक शैलेन्द्र सिंह, निरीक्षक अंजना केरकट्टा, साइबर सेल प्रभारी मनोज हनोतिया सहित थाना मरवाही, अजाक, गौरेला और चौकी सिवनी की पुलिस टीम का विशेष योगदान रहा। पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से न सिर्फ एक परिवार को उसका सदस्य वापस मिला है, बल्कि अपराधियों में भी कानून का खौफ पैदा हुआ है।

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