शिक्षा विभाग अनियमितताएं शिक्षा विभाग में प्रभारों की मनमानी, नियमों को ताक पर रख बांटे जा रहे पद
वरिष्ठों को दरकिनार कर वरिष्ठ अध्यापक और माध्यमिक शिक्षक को बीआरसीसी का प्रभार गैर राजपत्रित कर्मचारियों को वित्तीय अधिकार देने पर सवाल

टीकमगढ़ म प्र से कविन्द पटैरिया पत्रकार
टीकमगढ़ । जिले के शिक्षा विभाग में विभागीय नियमों और उच्चाधिकारियों के निर्देशों को नजरअंदाज कर प्रभार बांटने का मामला एक बार फिर सामने आया है। आरोप है कि पात्र और वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर कनिष्ठ कर्मचारियों को महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल, पलेरा जनपद शिक्षा केंद्र में नियमानुसार पात्र अधिकारियों को दरकिनार कर एकल माध्यमिक शिक्षक को बीआरसीसी के साथ वित्तीय प्रभार सौंप दिया गया, जबकि इस पद के लिए व्याख्याता या उच्च माध्यमिक शिक्षक ही पात्र माने जाते हैं। वहीं न्यायालीन प्रकरण और विभागीय जांच के साथ आपराधिक मामला न हो। लेकिन विभाग के जिम्मेवाराे की मेहरबानी की वजह से टीकमगढ़ विकासखंड स्रोत केन्द्र वरिष्ठ अध्यापक को बीआरसीसी की जिम्मेवारी सौंपी गई।
सूत्रों के मुताबिक कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने बीआरसीसी का प्रभार किसी वरिष्ठ अधिकारी को देने के निर्देश दिए थे, लेकिन विभागीय स्तर पर इन निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया गया। चर्चा है कि रातों रात आदेश में बदलाव कर माध्यमिक शाला अजखोर में एकल शिक्षक पदस्थ माध्यमिक शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार पाठक को पलेरा बीआरसीसी का प्रभार सौंप दिया गया जबकि कार्यालय में इन से भी वरिष्ठ चार बीएससी को दरकिनार करते हुए उन्हें न केवल बीआरसीसी का प्रभार दिया गया, बल्कि वित्तीय अधिकार भी सौंप दिए गए। नियमानुसार इस पद के लिए मिडिल स्कूल के प्राचार्य, व्याख्याता अथवा उच्च माध्यमिक शिक्षक ही पात्र माने जाते हैं। इसे शासन के नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जनपद शिक्षा केंद्र पलेरा के बीआरसीसी भानु प्रकाश श्रीवास्तव 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद शासकीय माध्यमिक शाला अजोखर पदस्थ माध्यमिक शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार पाठक को 1 अप्रैल 2026 में बीआरसीसी का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। वे पहले से ही जनपद शिक्षा केंद्र में सह-समन्वयक (साक्षरता) की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
राज्य शिक्षा केंद्र के आयुक्त द्वारा जारी निर्देशों को भी विभागीय स्तर पर नजर अंदाज किए जाने की चर्चा है। नवभारत साक्षरता अभियान के तहत सह-समन्वयक पद पर ऐसे शिक्षक की नियुक्ति किए जाने का प्रावधान बताया गया है जो अतिशेष शिक्षक की श्रेणी में आते हो, लेकिन इसके विपरीत माध्यमिक शाला अजोखर के एकल शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार पाठक माध्यमिक शिक्षक को नियम के विरुद्ध जिम्मेदारी दे दी गई, जबकि वे इस श्रेणी में नहीं आते है । ऐसी स्थिति में पिछले दो वर्षों से अधिक समय से शैक्षणिक व्यवस्था चौपट हो गई है जिससे पढ़ने वाले गरीब और निर्धन बच्चों का भी भविष्य अधंकार डूब रहा है।
ग्रामीणों का कहना है,कि माध्यमिक शाला अजखोर के प्रभारी पुष्पेंद्र कुमार पाठक माध्यमिक शिक्षक को
जनपद शिक्षा केंद्र पर सह-समन्वयक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है, जिससे विद्यालय की व्यवस्थाएं चौपट हो गई। शैक्षणिक व्यवस्था दो साल से चौपट हो रही है। संस्था प्रभारी माध्यमिक शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार पाठक के भरोसे ही विद्यालय का संचालन हो रहा है।
आयुक्त के निर्देशों में जांच लंबित अधिकारियों के आवेदन स्वीकार न करने की बात, फिर भी टीकमगढ़ बीआरसीसी का प्रभार, आदेश पर उठे सवाल
कलेक्टर जिला शिक्षा केन्द्र कार्यालय से 3 मार्च 2025 को जारी बीआरसीसी प्रतिनियुक्ति आदेश को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आदेश के अनुसार वरिष्ठ अध्यापक (उच्च माध्यमिक शिक्षक) महेन्द्र कुमार गुप्ता को प्रतिनियुक्ति पर विकासखंड स्रोत केन्द्र में पदस्थ किया गया है, जबकि वे वर्तमान में शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय लिधौरा में पदस्थ हैं।
आदेश में ही उनके पद को लेकर भी भ्रम की स्थिति दिखाई दे रही है। दस्तावेज में एक ही अधिकारी के लिए वरिष्ठ अध्यापक और माध्यमिक शिक्षक दोनों पदों का उल्लेख किया गया है, जबकि नियमानुसार किसी भी कर्मचारी का एक ही पद होता है।
सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव तैयार करते समय शिक्षा विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों ने नियमों का सही उल्लेख नहीं किया और कलेक्टर को पूरी जानकारी दिए बिना ही आदेश पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए गए। बताया जा रहा है कि महेन्द्र कुमार गुप्ता के विरुद्ध एक प्रकरण में जांच लंबित होने के बावजूद उन्हें बीआरसीसी का प्रभार दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट उल्लेख है कि जिन अधिकारियों के विरुद्ध न्यायालयीन या विभागीय जांच लंबित हो, उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएं। सूत्रों के अनुसार संबंधित अधिकारी के खिलाफ न्यायालय में करीब 12 वर्षों से मामला लंबित बताया जा रहा है। इसके बावजूद प्रतिनियुक्ति आदेश जारी होने से विभागीय कार्यप्रणाली और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों से इस संबंध में स्पष्ट जवाब की अपेक्षा की जा रही है।
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नियुक्ति से पहले जिला शिक्षा समिति का प्रस्ताव आवश्यक
जिला शिक्षा समिति के अध्यक्ष द्वारा किसी भी नियुक्ति पर एकल रूप से निर्णय नहीं लिया जाता है। नियमानुसार ऐसे मामलों में निर्णय जिला शिक्षा समिति की बैठक में प्रस्ताव के माध्यम से किया जाता है। संबंधित पद या नियुक्ति के संबंध में सबसे पहले समिति की बैठक में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है, जिस पर समिति के सदस्य चर्चा करते हैं। चर्चा के बाद यदि सदस्यों का बहुमत प्रस्ताव के पक्ष में होता है तो उसे पारित कर दिया जाता है। प्रस्ताव पारित होने के बाद समिति के अध्यक्ष द्वारा उस पर स्वीकृति स्वरूप हस्ताक्षर किए जाते हैं। इसके पश्चात पारित प्रस्ताव के आधार पर संबंधित पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया, जैसे चयन और नियुक्ति आदेश जारी करने की कार्यवाही, नियमानुसार की जाती है। इस प्रकार नियुक्ति से संबंधित किसी भी कार्यवाही के लिए पहले जिला शिक्षा समिति से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक माना जाता है, जिसके बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।
इनका कहना है : —
“इस मामले की मुझे कोई जानकारी नहीं है। जिला शिक्षा समिति में माध्यमिक शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार पाठक को पलेरा बीआरसीसी बनाए जाने संबंधी कोई प्रस्ताव समिति की बैठक में पारित नहीं कराया गया है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
— गौ भक्ति तिवारी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष जिला शिक्षा समिति, टीकमगढ़।
“पलेरा जनपद शिक्षा केंद्र में बीआरसीसी का प्रभार दिए जाने के मामले की जानकारी ली जाएगी। यदि नियुक्ति या प्रभार देने में शासन के नियमों और निर्देशों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
— नवनीत धुर्वे,सीईओ, जिला पंचायत टीकमगढ़।

















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