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मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को सरकार करवाएगी अयोध्या धाम दर्शन

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों को सरकार करवाएगी अयोध्या धाम दर्शन

 संवाददाता :-परवीन कुकरेजा


पलवल, 21 मार्च, उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत बृहस्पतिवार 26 मार्च को अयोध्या धाम जाने के लिए बीपीएल परिवारों से संबंधित पात्र वरिष्ठ नागरिक रविवार 22 मार्च तक सरल पोर्टल पर अपना आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवेदन करने उपरांत सूचना जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय पलवल में दें। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बृहस्पतिवार 26 मार्च को रेलगाडी को अंबाला जंक्शन से अयोध्या धाम के लिए रवाना करेंगे। पलवल जिला के तीर्थ यात्रियों के लिए रेलगाडी बृहस्पतिवार 26 मार्च को सांय के समय पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए रवाना होगी। इस योजना के तहत यात्रियों के रहने, खाने और स्थानीय परिवहन की पूरी व्यवस्था सरकार द्वारा अपने स्तर पर की जाएगी।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत आवेदन करने के लिए कुछ आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं, जिनमें वैध फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य सरकारी आईडी), परिवार पहचान पत्र (पीपीपी), शारीरिक रूप से यात्रा के लिए फिट होने की स्वयं घोषणा तथा पिछले तीन वर्षों में योजना का लाभ न लेने की घोषणा शामिल है। उन्होंने पात्रता की जानकारी देते हुए बताया कि आवेदक का हरियाणा का निवासी होना और परिवार पहचान पत्र होना अनिवार्य है। 80 वर्ष से अधिक आयु और 1.80 लाख तक वार्षिक आय वाले वरिष्ठ नागरिक अपने जीवनसाथी को मुफ्त साथ ले जा सकते हैं, जबकि एक अन्य व्यक्ति को पूर्ण भुगतान पर साथ ले जाने की अनुमति है। 60 से 80 वर्ष आयु वर्ग के पात्र नागरिक भी अपने जीवनसाथी को मुफ्त ले जा सकते हैं और विशेष परिस्थितियों में सहायक को भुगतान के आधार पर साथ ले जा सकते हैं। वहीं 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग या 1.80 लाख से अधिक आय वाले लोग इस योजना का लाभ पूर्ण भुगतान पर उठा सकते हैं। योजना के नियमों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति हर तीन वर्षों में केवल एक बार ही इस सुविधा का लाभ ले सकता है। “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर संचालित इस योजना में आवेदन के लिए परिवार पहचान पत्र अनिवार्य है और हर तीन वर्ष में एक बार ही इसका लाभ लिया जा सकता है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक या शारीरिक सीमाओं के कारण कोई भी बुजुर्ग तीर्थ यात्रा से वंचित न रहे।

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