पारसनाथ दिगंबर जैन वैधमंदिर में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान , हो रही सिद्धों की आराधना
टीकमगढ़ म प्र से कविन्द पटैरिया पत्रकार की रिपोर्ट

टीकमगढ़। शहर के वैध मंदिर जी वानपुर दरवाजा में चल रहे सिद्ध चक्र महामंडल विधान में हो रही सिद्धों की आराधना
धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया की प्रातः 6:30 बजे से अभिषेक शांति धारा और पूजन के पश्चात विधान का प्रारंभ हुआ और ठीक 9:00 से मुनि श्री
परम पूज्य 108 समत्व सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन की अधिकांश समस्याओं का समाधान जिन धर्म में निहित है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी, युवा, व्यापारी और गृहस्थ — सभी अपने-अपने जीवन में अनेक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, किंतु समाधान की दिशा सही नहीं होने के कारण शांति प्राप्त नहीं हो पा रही।
छह आवश्यकों पर दिया विशेष जोर
मुनि श्री ने कहा कि जैसे दैनिक जीवन में भोजन, स्नान और विश्राम आवश्यक हैं, वैसे ही आत्मिक उन्नति के लिए षट् आवश्यक अनिवार्य हैं। इनमें प्रथम और प्रमुख है — देव पूजा।

उन्होंने बताया कि प्रातःकाल उठकर जिनालय में प्रवेश करना, देव दर्शन और अभिषेक करना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
सुबह की दिनचर्या बदलने का आह्वान
प्रवचन में विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि देर रात तक जागना और सुबह देर तक सोना एकाग्रता व बुद्धि के विकास में बाधक है।
उन्होंने कहा कि दिन की शुरुआत मोबाइल, समाचार या नकारात्मक सूचनाओं से करने के बजाय जिनेंद्र भगवान के दर्शन से करनी चाहिए।
जिनालय को बताया “ऊर्जा का केंद्र
मुनि श्री ने समझाया कि जिन मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा के केंद्र हैं। मंदिर की संरचना, मंत्र ध्वनि, दीप-धूप और शुद्ध वातावरण मन और मस्तिष्क को शांत करते हैं।

उन्होंने कहा कि जैसे डिश एंटीना तरंगों को ग्रहण करता है, वैसे ही जिनालय आत्मिक तरंगों का केंद्र है, जहां से व्यक्ति नई शक्ति प्राप्त करता है।
नकारात्मकता से बचने की सीख
प्रवचन में गृहस्थ जीवन की समस्याओं — संबंधों में तनाव, व्यापारिक निर्णय, आर्थिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं — का उल्लेख करते हुए मुनि श्री ने कहा कि नियमित देव दर्शन से मन की स्थिरता और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है।
आठ दिवसीय प्रवचन श्रृंखला
यह प्रवचन “जीवन जीने की कला” विषय पर चल रही श्रृंखला का भाग है। मुनि श्री ने बताया कि आगामी दिनों में षट् आवश्यक के प्रत्येक अंग का विस्तार से विवेचन किया जाएगा, जिससे जीवन की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान समझाया जाएगा।
प्रवचन के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने नियमित रूप से प्रातः जिनालय आने और षट् आवश्यक का पालन करने का संकल्प लिया।
इस मौके पर सैकड़ो की संख्या में पुरुष, माताएं, बहने, और इंद्र इंद्राणियां सम्मिलित रहे तथा अनेक मंदिर कमेटी के पदाधिकारी गण मौजूद रहे.
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सिद्ध चक्र महामंडल विधान के समापन पर निकल जाएगी विमान उत्सव यात्रा दिनांक 19 फरवरी 2026 को प्रातः 8:30 पर
बानपुर दरवाजा स्थित 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन चौबीसी वेध मंदिर में दिनांक 12 फरवरी से 19 फरवरी तक ,सिद्ध चक्र महामंडल विधान चल रहा है
नरेंद्र जनता ने बताया कि इस विधान के पूर्ण होने पर समापन के रूप में विमानोत्सव यात्रा निकाली जाएगी ,जो वेध मंदिर जी से प्रारंभ होकर दीक्षित मोहल्ला कटरा बाजार पुराना मजदूर चौराया सुभाष बुक डिपो ,लक्ष्मी टॉकीज, से वैध मंदिर वापस पहुंचेगी जनता जी ने बताया कि इस विमान उत्सव यात्रा में श्री राम कथा वाचक जैन संत मुनि 108 सोम्य सागर महामुनि राज एवं 108 जयंत सागर महाराज व अमेरिका में इंजीनियर के पद पर रह चुके आज वर्तमान के 108 समत्त सागर महामुनि राज एवं शीलसागर जी महामुनि राज के सानिध्य में यह यात्रा निकाली जाएगी मंदिर जी वापस पहुंचने पर प्रवचन का लाभ प्राप्त होगा
















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