कौशाम्बी में नहर का पानी बना तबाही की वजह, दर्जनों किसानों की गेहूं की फसल डूबी

कौशाम्बी (उत्तर प्रदेश)। जिले के मूरतगंज ब्लाक के बथुई गांव में अचानक नहर से आए पानी ने भारी तबाही मचाई है, जिससे करीब 20 बीघा गेहूं की फसल पूरी तरह डूब गई है। इस हादसे से सरस्वती तिवारी, शिव कुमार तिवारी, कमलेश कुमार, जगन्नाथ,अरविंद, लालमान, राम सागर, राधे, मिलन समेत दर्जनों किसान प्रभावित हुए हैं।
ब्रेकिंग & एक्सक्लूसिव: कौशाम्बी के बथुइ गांव में नहर का पानी बना ‘हरित कब्रगाह’, प्रशासन की लापरवाही से डूबी दर्जनों किसानों की जिंदगी!
मुख्य बिंदु:
1. 20 बीघा से अधिक गेहूं की फसल तबाह, किसानों का सालभर का श्रम और लाखों रुपये पल भर में बहा।
2. पूर्व सूचना शून्य: नहर विभाग द्वारा बिना चेतावनी पानी छोड़ने का आरोप।
3. प्रभावित परिवार: सरस्वती तिवारी, शिव कुमार तिवारी, अरविंद, लालमान, राम सागर समेत 12+ किसान परिवार आजीविका संकट में।
4. किसानों का आक्रोश: “सरकार नहर बनाती है सिंचाई के लिए, तबाही के लिए नहीं!” – प्रभावित किसान।
बथुई गांव के खेत आज पानी के नीचे दबे ‘हरित शव’ जैसे नजर आ रहे हैं। पीड़ित किसानों का कहना है कि अचानक आए इस जल प्रलय ने न केवल फसल, बल्कि उनकी आशाएं भी डुबो दी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नहर प्रशासन की लापरवाही और समन्वय की कमी इस त्रासदी की मुख्य वजह है।
किसानों की मांग
1. त्वरित उचित मुआवजा
उच्च स्तरीय जांच
2. दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
3. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दिशा-निर्देश

राजनीतिक प्रतिक्रिया का इंतजार: स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन अब तक मौन, जबकि किसान आंदोलन की तैयारी में हैं। यह घटना एक बार फिर किसानों की सुरक्षा और सिंचाई प्रबंधन में गंभीर चूक का सवाल खड़ा करती है।
किसानों का आरोप है कि अचानक नहर में पानी छोड़े जाने के कारण उनकी पकी तैयार फसल बर्बाद हो गई। इस घटना से पूरे इलाके में मायूसी छाई हुई है। किसानों ने तत्काल मुआवजे और जांच की मांग की है।
कौशाम्बी से ब्यूरो रिपोर्ट सुशील कुमार दिवाकर

















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