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पांढुरना से जामसांवली तक आज बहेगी आस्था की गंगा वर्ष के अंतिम शनिवार निकलेगी विशाल जामसांवली पदयात्रा उमड़ेगा हनुमान भक्तों का जनसैलाब

पांढुरना से जामसांवली तक आज बहेगी आस्था की गंगा
वर्ष के अंतिम शनिवार निकलेगी विशाल जामसांवली पदयात्रा उमड़ेगा हनुमान भक्तों का जनसैलाब

संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

*संत विवेक महाराज सहित अनेक संत-महात्मा हजारों श्रद्धालुओं संग होंगे सहभागी

पांढुरना – वर्ष के अंतिम शनिवार को पांढुरना आज सनातन आस्था, हनुमान भक्ति और धार्मिक एकता का साक्षी बनने जा रहा है। विशाल जामसांवली पदयात्रा समिति के तत्वाधान में निकलने वाली विशाल जामसांवली पदयात्रा आज सुबह नगर के हृदय स्थल से अपने दिव्य प्रवाह के साथ जामसांवली धाम के लिए प्रस्थान करेगी। यह पदयात्रा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है।
हनुमान भक्ति के केंद्र के रूप में विख्यात पांढुरना नगर में 127 से अधिक श्री हनुमान मंदिरों का होना इस बात का प्रतीक है कि यहां की हर गली और हर घर में रामभक्त हनुमान जी की पूजा होती है। क्षेत्रवासियों की यही अखंड श्रद्धा सन 2010 में प्रारंभ हुई इस पदयात्रा की प्रेरणा बनी, जो आज पांढुरना, बैतूल और महाराष्ट्र तक फैले भक्तों को एक सूत्र में बांध रही है।


आज 27 दिसंबर को प्रातः 7 बजे, नगर के प्राचीन श्री हनुमान मंदिर, पांढुरना से पदयात्रा का शुभारंभ होगा। श्रद्धेय संत श्री विवेक जी महाराज (आनंद धाम, पांढुरना) के सान्निध्य में,हनुमंत श्री अजबराव साबले महाराज (मुलताई),श्री मदन भाऊ ठाकरे,श्री दादाजी दरबार (खंडवा),ह.भ.प. श्री रामेश्वर घाघरे महाराज (आळंदी–पंढरपुर)
सहित अनेक संत-महात्मा एवं हजारों श्रद्धालु भगवा ध्वज लेकर पदयात्रा में सहभागी होंगे।

करीब 38 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई चमत्कारी श्री हनुमान मंदिर जामसांवली पहुंचेगी, जहां दर्शन-पूजन के साथ भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और आत्मिक शांति की अनुभूति करेंगे। यह पदयात्रा पांढुरना जिले में प्रमुख धार्मिक उत्सव के रूप में स्थापित हो चुकी है।

पदयात्रा को लेकर नगर को हनुमान जी के चित्रों, भगवा पताकाओं और धार्मिक प्रतीकों से भव्य रूप से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा हेतु विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों द्वारा मार्ग में चाय, कॉफी, दूध, फल, साबूदाना व जल सेवा के स्टॉल लगाए गए हैं। यात्रा को लेकर युवाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
वर्ष के अंतिम शनिवार को निकलने वाली यह पदयात्रा आगामी वर्ष के लिए सुख, समृद्धि और शांति की कामना का माध्यम बनती है। सनातन एकता की मिसाल बन चुकी विशाल जामसांवली पदयात्रा में आज जनमानस सेवा, भक्ति और श्रद्धा के इस विराट संगम का साक्षी बनेगा।

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