टीकमगढ़ में ‘सार्थक ऐप’ को लेकर विधानसभा में सवाल, पंचायत मंत्री ने स्पष्ट किया नियमों का पालन
मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा—‘सार्थक ऐप’ अनिवार्य नहीं, तीन सचिवों की गैर-हाजिरी पर वेतन कटौती की गई, सीईओ पर मनमानी के आरोप निराधार
टीकमगढ़ म प्र से कविन्द पटैरिया पत्रकार

भोपाल:
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े सवालों के जवाब में पंचायत मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज कराने संबंधी वर्ष 1975 के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश अभी भी प्रभावी हैं। मंत्री ने कहा कि कार्यालयों में समय-पालन सुनिश्चित करने के लिए उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कराना अनिवार्य है और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने से निगरानी में आसानी हुई है।
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि टीकमगढ़ जनपद पंचायत ने ‘सार्थक ऐप’ को नवाचार के रूप में अपनाया है, जबकि जिले की अन्य जनपद पंचायतों में यह लागू नहीं है।
मंत्री ने जानकारी दी कि ऐप से उपस्थिति दर्ज न कराने वाले तीन सचिव—
1. श्रीमती उमा यादव
2. श्रीमती अनिता जैन
3. श्री मुकेश खरे
की सूची संबंधित परिशिष्ट में संलग्न है।

वेतन भुगतान विवाद पर मंत्री का स्पष्ट जवाब:
जनपद पंचायत टीकमगढ़ के सीईओ पर सचिवों के वेतन आहरण में मनमानी के आरोपों को मंत्री ने निराधार बताया। उन्होंने कहा कि जुलाई और अगस्त में पारंपरिक उपस्थिति पंजी के आधार पर तथा सितंबर और अक्टूबर 2025 में सार्थक ऐप के आधार पर वेतन दिया गया।
मंत्री ने बताया कि सितंबर में तीन सचिवों की गैर-हाजिरी पर वेतन कटौती की गई, जबकि अक्टूबर में उपस्थिति के अनुसार वेतन जारी किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीईओ द्वारा कोई मनमानी नहीं हुई, अतः जांच की आवश्यकता नहीं है।
सभी प्रश्न और जवाब संबंधित परिशिष्ट विधानसभा सचिवालय के पुस्तकालय में संरक्षित हैं।















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