87 साल की समाजसेवी श्रीमती ताराबाई कंठाली की आंखों से अब 2 लोग देख सकेगे दुनिया

स्वयं की इच्छा पर मृत्यु उपरांत कंठाली की आखों का दान कर परिजनों ने कायम की मीसाल
सत्यार्थ न्यूज़ मनोज कुमार माली सोयत कला नगर
सुसनेर नगर में दिगम्बर जैन समाज की वरिष्ठ समाजसेविका 87 वर्षीय श्रीमति ताराबाई कंठाली की आंखों से एक नहीं बल्कि दो लोग इस दुनिया को देख सकेंगे। सुसनेर के प्रतिष्ठित मेडिकल व्यवसायी बसन्त कुमार कंठाली की धर्मपत्नी श्रीमति ताराबाई कंठाली की जीवन लीला भले ही समाप्त हो गई, लेकिन उनकी मृत्यु एक बड़ी मिसाल बन गई है। अपने जीवित रहते नेत्रदान की इच्छा जाहिर कर श्रीमति कंठाली आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा बनकर गई है। दरअसल वृद्धावस्था के चलते कुछ समय से अस्वस्थ श्रीमती कंठाली को आगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने इलाज शुरु किया। लेकिन जीवन की अंतिम सांस गिन रही श्रीमति कंठाली की इच्छा पर परिजनों ने नेत्रदान का फैसला लिया। नेत्रदान के बाद 28 अगस्त को नियम संयम के साथ श्रीमती ताराबाई ने देह त्याग दी। उनका यह सेवा कार्य मानव समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।

भारत विकास परिषद के सहयोग से हुआ नेत्रदान
इसके बाद भारत विकास परिषद शाखा आगर मालवा द्वारा यह नेत्रदान सम्पन्न हुआ है। इस संस्था के माध्यम से इस सत्र का यह का 21 वां एवं आगर शाखा का 34 वां नेत्रदान है जो कंठाली परिवार सुसनेर से सम्पन्न हुआ है। भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी डॉ संदीप चोपड़ा व कैलाश माहेश्वरी की तत्परता, राजेश मेठी के विशेष प्रयास एवं परिजनों की स्वप्रेरणा से टैक्नीशियन अजय यादव व सहायक लखन यादव द्वारा नेत्रदानी स्वर्गीय श्रीमती ताराबाई कंठाली सुसनेर का नेत्रदान सम्पन्न हुआ। नेत्रदान के इस पुनीत सेवार्थ कार्य से दो व्यक्तियों का जीवन रोशन हो सकेगा। नेत्रदान के इस पुनीत सेवार्थ कार्य मे सक्रियता से नेत्रदान करवाने के लिए संस्था सदस्यों ने सहयोगियों एवं कंठाली परिवार के विजय कंठाली, सर्वेश कंठाली सहित परिवार का आभार व्यक्त किया है।
मृत्यु उपरांत कोई भी कर सकता है नेत्रदान –
सिविल अस्पताल सुसनेर की मेडिकल ऑफिसर डॉ निलम जैन के अनुसार मृत्यु के बाद केवल आंख की आगे की पुतली (कॉर्निया) दान की जाती है। कॉर्निया निकालने के बाद आंख के आकार को बनाए रखने और चेहरे पर कोई विकृति न होने के लिए कॉन्टैक्ट लेंस लगाए जाते हैं। इससे चेहरे में कोई विकृति नही आती है। कॉर्निया को व्यक्ति की मृत्यु के 6 से 8 घंटे के भीतर निकाल लिया जाता है। इस प्रक्रिया में केवल 15 से 20 मिनट लगते हैं। दान की गई आंखों को खरीदा या बेचा नहीं जा सकता है। चश्मा पहनने वाले, डायबिटीज, अस्थमा, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या सांस फूलने जैसे शारीरिक विकारों वाले लोग भी नेत्रदान कर सकते हैं। मोतियाबिंद या आंखों का ऑपरेशन करवा चुके लोग भी नेत्रदान कर सकते हैं।
















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