गुना जिले में देवारण्य योजना के अंतर्गत विकासखंड चांचौडा एवं आरोन में कृषकों एवं स्व सहायता समूह के सदस्यों को अश्वगंधा की कृषि पर आधारित प्रशिक्षण दिया गया।
गुना जिले से संवाददाता बलवीर योगी

इस प्रशिक्षण में अश्वगंधा की खेती के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्रदान की गई, जैसे कि:
– खेत तैयार करना और पौध तैयार करना
– बिजाई और जैविक खाद का प्रयोग
– कीटनाशक प्रयोग और निंदाई-गुड़ाई
– सिंचाई और फसल कटाई
– उपज भंडारण और प्रसंस्करण
– विपणन और फसल चक्र
– अश्वगंधा के औषधीय गुण और आयुर्वेदिक उपयोग
आयुष अधिकारी डॉ. के एस. गनावे ने बताया कि देवारण्य योजना के अंतर्गत अश्वगंधा को “एक जिला एक औषधि पौधा” के रूप में चयनित किया गया है और जिले में अश्वगंधा की खेती को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित करना और स्थानीय समितियों को सशक्त बनाना है।
अश्वगंधा को मिरेकल प्लांट और इंडियन जिनसिंग भी कहा जाता है, जिसकी मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। प्रशिक्षण में उपस्थित सभी सदस्यों को प्रशिक्षण किट और प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
















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