हेमंत खंडेलवाल: मध्य प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष, सत्ता और संगठन के बीच समन्वय के माहिर
हरिशंकर पाराशर सत्यार्थ न्यूज़ संवाददाता

भोपाल। मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल का निर्विरोध चयन किया है। सोमवार को उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया, जिसका कोई विरोध नहीं हुआ। खंडेलवाल की पहचान सत्ता और संगठन के बीच बेहतरीन समन्वय स्थापित करने वाले नेता के रूप में है। उनकी राजनीतिक यात्रा और संगठन के प्रति समर्पण ने उन्हें इस महत्वपूर्ण पद तक पहुंचाया। आइए, जानते हैं हेमंत खंडेलवाल के राजनीतिक जीवन और उनके योगदान की विस्तृत कहानी।
राजनीतिक गुरु: पिता विजय कुमार खंडेलवाल
हेमंत खंडेलवाल का जन्म और परवरिश एक ऐसे परिवार में हुई, जहां राजनीति और सामाजिक कार्य उनके जीवन का हिस्सा रहे। उनके पिता विजय कुमार खंडेलवाल एक दिग्गज भाजपा नेता थे, जिन्होंने 1996 से 2004 तक बैतूल लोकसभा सीट से लगातार चार बार सांसद के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
हेमंत ने अपने पिता से ही राजनीति का ककहरा सीखा।

बीकॉम और एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राजनीति में कदम रखा। विजय कुमार खंडेलवाल ने न केवल उन्हें राजनीतिक सूझबूझ दी, बल्कि संगठन के प्रति निष्ठा और जनसेवा का मूल मंत्र भी सिखाया।लोकसभा उपचुनाव से शुरू हुआ सफर2007 में विजय कुमार खंडेलवाल के निधन के बाद बैतूल लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में हेमंत खंडेलवाल ने पहली बार अपनी राजनीतिक पारी शुरू की और कांग्रेस के दिग्गज नेता सुखदेव पांसे को हराकर सांसद बने। यह जीत उनकी राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। हालांकि, 2008 के परिसीमन के बाद बैतूल लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई, जिसके कारण हेमंत को नई दिशा में कदम बढ़ाने पड़े।
संगठन में मजबूत पकड़
पार्टी ने हेमंत की संगठनात्मक क्षमता को पहचाना और 2010 में उन्हें बैतूल जिला भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। इस भूमिका में उन्होंने संगठन को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी मेहनत और नेतृत्व का परिणाम था कि 2013 में उन्होंने बैतूल विधानसभा सीट से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और शानदार जीत हासिल की। तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार में उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं, जिन्हें उन्होंने बखूबी निभाया।
खंडेलवाल को कुशाभाऊ ठाकरे भवन निर्माण समिति का प्रमुख बनाया गया
, जिसके तहत मध्य प्रदेश के कई जिलों में भाजपा के भव्य कार्यालय भवनों का निर्माण हुआ। यह उनकी संगठनात्मक कुशलता और नेतृत्व क्षमता का एक और उदाहरण था। हालांकि, 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इस हार ने उनके हौसले को कम नहीं किया। उन्होंने संगठन के प्रति अपनी निष्ठा और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रियता बनाए रखी।
2023 में दमदार वापसी
2023 के विधानसभा चुनाव में हेमंत खंडेलवाल ने शानदार वापसी की। उन्होंने बैतूल विधानसभा सीट पर कांग्रेस के निलय डागा को बड़े अंतर से हराकर दूसरी बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया। इस जीत ने न केवल उनकी लोकप्रियता को साबित किया, बल्कि उनके राजनीतिक कौशल को भी रेखांकित किया।
सत्ता और संगठन के बीच सेतु
हेमंत खंडेलवाल की सबसे बड़ी खासियत है सत्ता और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने की उनकी क्षमता। चाहे वह मध्य प्रदेश में पार्टी की रणनीति हो या देश के अन्य राज्यों में चुनावी जिम्मेदारियां, खंडेलवाल ने हर मोर्चे पर अपनी छाप छोड़ी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा के कई दिग्गज नेताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे रखा। भोपाल से लेकर दिल्ली तक उनकी कार्यशैली और समर्पण की चर्चा होती है।
भविष्य की चुनौतियां और अपेक्षाएं
मध्य प्रदेश में भाजपा के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें संगठन को और मजबूत करना, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना और आगामी चुनावों में पार्टी की स्थिति को और सुदृढ़ करना शामिल है। हेमंत खंडेलवाल के अनुभव और समन्वय की क्षमता को देखते हुए पार्टी को उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। उनकी अगुवाई में मध्य प्रदेश भाजपा न केवल संगठनात्मक स्तर पर मजबूती हासिल करेगी, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल भी स्थापित होगा।
संघ परिवार का भरोसा
खंडेलवाल का संघ परिवार के साथ भी गहरा जुड़ाव है। उनकी विचारधारा और कार्यशैली ने उन्हें संघ के दिग्गजों की ‘गुड लिस्ट’ में शामिल किया है। यह विश्वास और समर्थन ही उन्हें मध्य प्रदेश भाजपा का नेतृत्व सौंपने में महत्वपूर्ण कारक रहा।
निष्कर्ष
हेमंत खंडेलवाल का राजनीतिक सफर मेहनत, समर्पण और नेतृत्व का एक अनूठा उदाहरण है। अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने न केवल बैतूल में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की, बल्कि प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। मध्य प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति पार्टी के लिए एक नई शुरुआत है। उनके नेतृत्व में संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की
उम्मीदें और भी प्रबल हो गई हैं।
(लेखक: संपादकीय विभाग, दैनिक समाचार)
यह लेख अखबार में प्रकाशन के लिए उपयुक्त है।

















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